न्यूजीलैंड दौरे पर अपने खर्चे पर नेट गेंदबाज ले जाएंगे गिल
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धर्मांतरण से आदिवासी आरक्षण तक, Jharkhand में क्यों छिड़ी सियासी जंग?
Shilpi Neha Tirkey Controversy: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर धर्मांतरण और आरक्षण का पेचीदा मसला पूरी ताकत के साथ सतह पर आ गया है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा धर्म परिवर्तन और आरक्षण से जुड़े नियमों पर दी गई व्यवस्था के बाद राज्य का सियासी माहौल अचानक बेहद गरम हो गया है. भारतीय जनता पार्टी ने इस कानूनी व्यवस्था को आधार बनाते हुए राज्य सरकार की कृषि मंत्री नेहा शिल्पी तिरकी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रमुख विपक्षी दल ने सीधे तौर पर मंत्री के इस्तीफे की मांग की है और साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता को भी तत्काल प्रभाव से खत्म करने का दबाव बनाया है. इस पूरे विवाद के सामने आते ही राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का नया दौर शुरू हो चुका है.
आरक्षण के गलत इस्तेमाल का गंभीर आरोप
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने पूरे मामले को मीडिया के सामने लाते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. प्रवक्ता का कहना है कि मंत्री नेहा शिल्पी तिरकी ने अनुसूचित जनजाति यानी एसटी के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी. पार्टी का स्पष्ट तर्क है कि जब कोई व्यक्ति अपना मूल धर्म छोड़कर दूसरा धर्म अपना लेता है, तो उसे पुराने धर्म या समुदाय के आधार पर मिलने वाले आरक्षण के विशेष फायदों का दावा करने का कोई नैतिक या कानूनी हक नहीं रह जाता है. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के कानूनी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि इस तरह के दोहरे लाभ से समाज के उन वास्तविक आदिवासियों के अधिकारों का हनन होता है, जो आज भी अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और पहचान के साथ पूरी निष्ठा से जुड़े हुए हैं.
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