MahaShivratri 2026: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं, क्या नहीं? जानें सही पूजन विधि और महत्व
MahaShivratri 2026: हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी शुभ रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन भक्त शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा से शिव-शक्ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि 2026 पर शिवलिंग पर क्या अर्पित करना चाहिए, क्या नहीं चढ़ाना चाहिए और सही पूजन विधि क्या है।
शिवलिंग पर क्या-क्या चढ़ाना चाहिए?
- शुद्ध जल
- गंगाजल
- कच्चा दूध
- दही
- घी
- शहद
- शक्कर या मिश्री
- बेलपत्र (तीन पत्तों वाला, साबुत)
- चंदन
- अक्षत (साबुत चावल)
- भांग और धतूरा
- सफेद फूल और आक के पुष्प
- शमी के पत्ते या फूल
- जौ और तिल
- मौसमी फल
शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?
- तुलसी के पत्ते
- सिंदूर
- हल्दी
- केतकी का फूल
- कटा-फटा या धारीदार बेलपत्र
शिवलिंग पूजा विधि (Step-by-Step)
- सबसे पहले तांबे के लोटे से धीरे-धीरे जल या गंगाजल अर्पित करें।
- इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
- पुनः शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।
- शिवलिंग पर चंदन लगाएं।
- बेलपत्र (चिकना भाग ऊपर की ओर), धतूरा, आक के फूल, शमी पत्र आदि अर्पित करें।
- धूप-दीप प्रज्वलित करें और फल-मिश्री का भोग लगाएं।
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
- अंत में आरती कर पूजा का समापन करें।
- ध्यान रखें कि बेलपत्र अर्पित करते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर होना चाहिए और वह टूटा हुआ न हो।
महाशिवरात्रि पूजा का महत्व
महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि साधना और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी लोक पर पधारते हैं और भक्तों की प्रार्थना सुनते हैं। जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर सच्चे मन से पूजा करते हैं, उन्हें कई गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से व्रत रखते हैं, जबकि गृहस्थ सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति की कामना करते हैं। विशेष रूप से शिवधामों में इस दिन अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिलता है। रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और चार प्रहर का अभिषेक भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
महाशिवरात्रि 2026 के दिन श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ शिवलिंग पर अभिषेक और पूजन करने से शिव-शक्ति की कृपा प्राप्त होती है। सही सामग्री और उचित विधि का ध्यान रखते हुए पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है। Hari Bhoomi इसकी पुष्टि नहीं करता है।
Mahashivratri Vrat Kaise Karen: महाशिवरात्रि व्रत कैसे करें? यहां जानें सही विधि और नियम
Mahashivratri Vrat: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। धार्मिक मान्यता है कि इसी पावन तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। इसलिए इस दिन को शिव-भक्त विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, सच्ची भावना और विधिपूर्वक किया गया व्रत जीवन में सुख, शांति और मनोकामना सिद्धि का कारण बन सकता है। यहां जानें मां शारदा पीठ के ज्योतिषाचार्य डॉ. मनीष गौतम जी महाराज से महाशिवरात्रि के बारे बारे में।
व्रत का संकल्प कैसे करें?
महाशिवरात्रि के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि नित्यकर्म से निवृत्त हों। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में पवित्र भाव रखें। यदि संभव हो तो शिवालय जाएं, अन्यथा घर में ही पूजन स्थल तैयार करें। भगवान शिव के समक्ष हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। संकल्प करते समय मन ही मन प्रार्थना करें- “हे देवों के देव महादेव, हे त्रिलोचन, हे नीलकण्ठ, मैं श्रद्धा और भक्ति से शिवरात्रि का व्रत धारण करता हूं। कृपया मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें।” संकल्प के बाद पूजा की सामग्री जैसे बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, चंदन और पुष्प आदि एकत्र कर लें।
ज्योतिर्लिंग या पार्थिव लिंग की स्थापना
शास्त्रों के अनुसार, पूजा के लिए शिवलिंग की स्थापना करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि घर में स्थायी शिवलिंग न हो तो मिट्टी से पार्थिव लिंग बनाकर उसकी स्थापना की जा सकती है। पूजा से पूर्व तीन बार आचमन करें और मन को एकाग्र करें। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग का अभिषेक आरंभ करें। अभिषेक के लिए जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत तैयार कर सकते हैं। प्रत्येक अर्पण मंत्रोच्चार के साथ ही करें।
चार प्रहर की पूजा का महत्व
महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित किया जाता है, और प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा का विधान है।
- प्रथम प्रहर – जल और बेलपत्र से अभिषेक।
- द्वितीय प्रहर – दूध या पंचामृत से अभिषेक।
- तृतीय प्रहर – शहद और घी से पूजन।
- चतुर्थ प्रहर – गंगाजल और सुगंधित जल से अंतिम अभिषेक।
प्रत्येक प्रहर में “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। भजन, कीर्तन और शिव स्तुति से वातावरण को भक्तिमय बनाएं। रात्रि जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि जागरण से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
पूजा में किन बातों का रखें ध्यान?
- शिवलिंग पर तुलसी पत्र अर्पित न करें।
- केतकी का फूल चढ़ाना वर्जित माना गया है।
- बेलपत्र तीन पत्तों वाला और बिना टूटा हुआ होना चाहिए।
- पूजा करते समय मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।
- शिवजी को सादगी प्रिय है, इसलिए आडंबर की अपेक्षा सच्ची श्रद्धा अधिक महत्वपूर्ण है।
महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति और साधना का विशेष अवसर है। यदि इस दिन शास्त्रों में वर्णित विधि के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत किया जाए, तो व्यक्ति को आध्यात्मिक संतोष के साथ-साथ जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति हो सकती है। सच्ची भक्ति, संयमित आचरण और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप ही इस पावन व्रत की वास्तविक आत्मा है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है। Hari Bhoomi इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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