Royal Enfield ने पेश किया Classic 650 Hypershift एडिशन, 4.25 लाख रुपये है कीमत
रॉयल एनफील्ड ने अपनी 125वीं वर्षगांठ के मौके पर क्लासिक 650 का खास संस्करण पेश किया है। इसे हाइपरशिफ्ट नाम दिया गया है। कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को बेहद सीमित संख्या में तैयार किया है, जिससे यह बाइक के शौकीनों और पुराने मॉडल इकट्ठा करने वालों के लिए खास बन सकती है। इसकी शुरुआती कीमत 4,25,589 रुपये (एक्स-शोरूम) रखी गई है। दुनिया के हर प्रमुख क्षेत्र में इसकी केवल 125 इकाइयां उपलब्ध होंगी।
इस खास मोटरसाइकिल के लिए पंजीकरण 16 अक्टूबर को भारतीय समय के अनुसार दोपहर 2 बजे से शुरू हो गए हैं। यह प्रक्रिया 28 अक्टूबर को बिक्री के दिन तक जारी रहेगी। कंपनी के मुताबिक, मोटरसाइकिल की डिलीवरी नवंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। बता दें कि रॉयल एनफील्ड का इतिहास 1901 से जुड़ा है और कंपनी ने अपनी इस खास पेशकश में पुराने दौर की पहचान को नए अंदाज के साथ जोड़ने की कोशिश की है।
इस बाइक की सबसे बड़ी खासियत इसका हाइपरशिफ्ट रंग है। रोशनी के कोण के अनुसार इसका रंग लाल, हरे और सुनहरे रंगों के बीच बदलता हुआ दिखाई देता है। इसके रंग और डिजाइन में कंपनी की शुरुआती मोटरसाइकिलों से प्रेरणा ली गई है। पेट्रोल टैंक, दोनों तरफ के पैनल, मडगार्ड और हेडलाइट के आसपास के हिस्से पर सुनहरे रंग के साथ गहरे रंगों का मेल देखने को मिलता है। इंजन और निकास पाइप को काले रंग में रखा गया है, जिससे बाइक का लुक और उभरकर सामने आता है।
पेट्रोल टैंक के बीच बने काले हिस्से के किनारों पर हाथ से बनाई गई पतली धारियां दी गई हैं। टैंक के ऊपर खास तोप का निशान और साइड पैनल पर 125 साल पूरे होने का सुनहरा प्रतीक लगाया गया है। इसमें पुराने अंदाज वाली भूरे रंग की चमड़े की सीट भी मिलती है, जिस पर खास सिलाई की गई है। सीट और अन्य हिस्सों पर सुनहरे रंग की सजावट बाइक के खास रूप को और बेहतर बनाती है।
सुविधाओं की बात करें तो इसमें एलईडी हेडलाइट, एलईडी पीछे की लाइट और मोबाइल या दूसरे उपकरण चार्ज करने के लिए यूएसबी टाइप-सी पोर्ट दिया गया है। हालांकि, दिशा बताने वाली लाइटों में सामान्य बल्ब ही मिलते हैं। तारों वाले पहिये, गोल शीशे और काले रंग के दो निकास पाइप इसके पुराने अंदाज को बनाए रखते हैं।
इंजन और दूसरे तकनीकी हिस्सों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। क्लासिक 650 में 647.95 सीसी का दो सिलेंडर वाला पेट्रोल इंजन मिलता है, जो 7,250 आरपीएम पर 47 पीएस की ताकत और 5,650 आरपीएम पर 52.3 एनएम का टॉर्क देता है। इसके साथ 6 गियर वाला गियरबॉक्स और मल्टी-प्लेट क्लच दिया गया है।
सुरक्षा के लिए आगे 320 मिमी और पीछे 300 मिमी की डिस्क ब्रेक मिलती हैं। दोनों पहियों में दो पिस्टन वाले कैलिपर और दोहरे चैनल वाला एबीएस दिया गया है। बाइक में आगे 19 इंच और पीछे 18 इंच के पहिये हैं। इसकी सीट की ऊंचाई 800 मिमी, जमीन से दूरी 154 मिमी और दोनों पहियों के बीच की दूरी 1,475 मिमी है। पेट्रोल टैंक की क्षमता 14.7 लीटर है, जबकि तेल और ईंधन सहित इसका वजन 243 किलोग्राम है। गौरतलब है कि सीमित संख्या, अलग रंग और पुराने डिजाइन के कारण यह संस्करण सामान्य क्लासिक 650 से अलग पहचान रखता है और खास मोटरसाइकिल पसंद करने वाले ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है।
RBI के कदमों से मजबूत हुआ Rupee, कच्चे तेल के दबाव के बीच 94.92 पर बंद
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की मजबूती लगातार छठे कारोबारी सत्र में भी जारी रही। शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 94.92 के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर की मांग कम करने के लिए उठाए गए कदमों से रुपये को सहारा मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपया 94.75 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान इसने 94.71 का ऊंचा और 95.06 का निचला स्तर छुआ। अंत में यह पिछले कारोबारी सत्र के 94.99 के मुकाबले 7 पैसे की बढ़त के साथ 94.92 पर बंद हुआ। इससे एक दिन पहले, गुरुवार 15 अक्टूबर को भी रुपये में 18 पैसे की तेजी दर्ज की गई थी और यह 94.99 प्रति डॉलर पर पहुंच गया था।
बता दें कि रुपये की कीमत पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का असर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो तेल आयात करने वाली कंपनियों को भुगतान के लिए अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बन सकता है। इसी तरह, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वे अपनी रकम को डॉलर में बदलते हैं, जिससे रुपये की मजबूती पर असर पड़ता है।
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी तकनीकी विश्लेषक कावेरी मोरे के मुताबिक, रुपया अब 94 के आसपास के अहम स्तर की ओर बढ़ रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर बढ़ते प्रतिफल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक रुपये में ज्यादा गिरावट को रोकने और घरेलू महंगाई के असर को सीमित करने के लिए बाजार में सक्रिय कदम उठा रहा है।
कावेरी मोरे के अनुसार, 8 जून से विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने के लिए लागू किए गए विशेष उपायों के बाद रिजर्व बैंक ने बाजार में डॉलर बेचने और डॉलर-रुपये की अदला-बदली से जुड़े सौदों के जरिए करीब 75 से 80 अरब डॉलर लगाए हैं। डॉलर बेचने से बाजार में उसकी उपलब्धता बढ़ती है, जिससे रुपये पर पड़ने वाला दबाव कुछ कम हो सकता है। हालांकि, इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और निवेशकों के रुख पर भी निर्भर करता है।
आने वाले दिनों में रुपये की चाल पर रिजर्व बैंक के कदमों, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाले प्रतिफल और विदेशी निवेशकों के निवेश का असर रहेगा। यदि केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप प्रभावी रहता है, तो रुपये को स्थिरता मिल सकती है। लेकिन बाहरी दबाव लंबे समय तक बने रहने पर इसकी आगे की बढ़त सीमित हो सकती है।
इस बीच, डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.41 प्रतिशत गिरकर 101.445 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का प्रमुख मानक ब्रेंट वायदा भाव 0.34 प्रतिशत टूटकर 105.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 413.66 अंक चढ़कर 74,729.27 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 148.80 अंक की बढ़त के साथ 23,146.15 पर पहुंच गया। हालांकि, इससे एक दिन पहले विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध आधार पर 5,285.37 करोड़ रुपये की निकासी की थी। यह आंकड़ा 15 अक्टूबर का है और बाजार के आंकड़ों के मुताबिक जारी किया गया है। ऐसे में रुपये की आगे की चाल पर विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक हालात का असर बना रहने की संभावना है।
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