Delhi CEO Ashok Kumar का निर्देश, ड्राफ्ट रोल से बाहर 47 लाख वोटरों की जांच करेंगे BLO
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) अशोक कुमार ने शुक्रवार को बताया कि दिल्ली में बूथ-स्तरीय अधिकारियों (BLOs) को उन 47 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों का फिर से सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें मतदाता सूची के ड्राफ्ट से हटा दिया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। 31 अगस्त को जारी राष्ट्रीय राजधानी की मतदाता सूची के मसौदे में मतदाताओं की संख्या में एक तिहाई की कमी आई है। 30 जून की मतदाता सूची में 1.45 करोड़ (14.5 मिलियन) नाम थे, जो अब घटकर 97.5 लाख (9.75 मिलियन) रह गए हैं। छह महानगरों – मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद में से, ड्राफ्ट चरण में दिल्ली में 32.8% नाम हटाए गए, जो कि दूसरा सबसे कम आंकड़ा था।
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कुमार ने कहा गणना प्रक्रिया के दौरान, बूथ-स्तरीय अधिकारी हर मतदाता के घर कम से कम तीन बार गए थे। लेकिन अब हमने निर्देश दिया है कि इस प्रक्रिया को फिर से जांचा जाए, ताकि यह पता चल सके कि कहीं कोई गलती तो नहीं हुई है और कोई मतदाता छूट तो नहीं गया है। एक अधिकारी ने, जिन्होंने अपना नाम न बताने की शर्त रखी, कहा कि BLOs केवल अपने रिकॉर्ड में दर्ज पते पर ही जाएंगे और मतदाता को खोजने के लिए पूरे इलाके में नहीं घूमेंगे।
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अधिकारियों का कहना है कि यह सुनिश्चित करने के लिए दोबारा सत्यापन (री-वेरिफिकेशन) किया जा रहा है कि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। यदि ऐसा कोई मतदाता मिलता है, तो बीएलओ (BLO) मतदाता सूची में उसका नाम शामिल करने के लिए 'फॉर्म 6' भरने में उसकी मदद करेंगे। दिल्ली में मतदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए, सीईओ (CEO) कार्यालय के अलावा 14,947 बीएलओ, 902 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, 70 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और 13 जिला निर्वाचन अधिकारी तैनात हैं। कुमार ने बताया कि कुल 33.12 लाख मामलों में से लगभग 25 लाख मामलों का निपटारा कर दिया गया है। इन मामलों में वे मतदाता शामिल थे, जिन्हें मैपिंग न होने या जानकारी में विसंगतियां होने के कारण नोटिस जारी किए गए थे। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में छूट गया है, वे फॉर्म 6 भरकर अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। अंतिम सूची 4 दिसंबर को जारी की जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि BLOs को निर्देश दिए गए हैं कि जिन मतदाताओं के विवरण में छोटी-मोटी गलतियां हैं, उनके मामलों को सीधे तौर पर खारिज न किया जाए।
Farooq Abdullah ने IAS अफसर कुमार राजीव रंजन को Jammu Kashmir से बाहर भेजने की मांग उठाई
(फाइल फोटो सहित) श्रीनगर, 16 अक्टूबर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने एक महिला अधिकारी से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के लिए आईएएस अधिकारी कुमार राजीव रंजन को जम्मू-कश्मीर से निष्कासित करने की शुक्रवार को मांग करते हुए कहा कि उनके व्यवहार में शालीनता नहीं थी। पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि अगर उनके कार्यकाल में, जब जम्मू-कश्मीर एक राज्य था, ऐसी घटना हुई होती तो वह उस अधिकारी को वापस विमान में बिठाकर रवाना कर देते। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह पूरी तरह गलत थी।
उन्हें फटकार लगाई जानी चाहिए। इससे पता चलता है कि उनमें वह शालीनता और मर्यादा नहीं है, जो एक अधिकारी में होनी चाहिए। अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे लोगों की बात सुनें।
लोग केवल अपनी शिकायतें बताना चाहते हैं।’’ अब्दुल्ला ने कहा, “इसके बाद चिल्लाना और ‘बाहर निकलो, बाहर निकलो’ कहना पूरी तरह गलत है। उन्हें जम्मू-कश्मीर से निष्कासित कर देना चाहिए। वह उन अधिकारियों में से नहीं है, जिन्हें यहां होना चाहिए।
अगर वह यहां अधिकारी बने रहते हैं, तो उन्हें इसके बहुत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।’’ मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी के बारे में सवाल पर कि यदि जम्मू-कश्मीर राज्य होता तो अधिकारी के आचरण की जांच लंबित रहने तक उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग से संबद्ध कर दिया जाता, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वह अधिकारी को बाहर का रास्ता दिखा देते। फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के राज्य रहने के दौरान उनके कार्यकाल में ऐसी घटना होने का तो सवाल ही नहीं उठता। श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव कुमार राजीव रंजन इस सप्ताह की शुरुआत में एक समीक्षा बैठक के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की भूमिका को लेकर गांदरबल की सहायक निदेशक (रोजगार) बीनिश वानी के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के बाद विवादों में घिर गए।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी कुमार राजीव रंजन का एक महिला अधिकारी के साथ ‘अपमानजनक’ व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और मुख्यमंत्री से इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आग्रह किया। महबूबा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “इस तरह का अपमानजनक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को तत्काल यह मामला भारत सरकार के समक्ष उठाना चाहिए और उस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करनी चाहिए, जिस पर पहले से ही अवैध बंदूक लाइसेंस जारी करने के आरोप हैं।” जम्मू-कश्मीर सरकार ने कुमार राजीव रंजन द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) की एक महिला अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार की गहन जांच के आदेश दिए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, 2004 बैच की आईएएस अधिकारी और आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त-सचिव मंदीप कौर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें आदेश जारी होने की तारीख से 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष तारिक कर्रा ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मामले में तथ्यों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
कर्रा ने एक पत्र में उपराज्यपाल से यह भी आग्रह किया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी बीनिश वानी को किसी भी तरह से ‘प्रताड़ित’ न किया जाए और न ही उनके खिलाफ बदले की भावना से कोई कार्रवाई की जाए। सेंट्रल शाल्टेंग से विधायक कर्रा ने कहा कि इस मामले में उपराज्यपाल को व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “तथ्यों का पता लगाने, पूरी रिकॉर्डिंग की जांच करने और यह तय करने के लिए निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच के आदेश दिए जाने चाहिए कि क्या सेवा नियमों या आचरण के मानकों का उल्लंघन हुआ है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के पद की परवाह किए बिना उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।”
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