बांग्लादेश: तारिक रहमान ने कानून-व्यवस्था हर हाल में बनाए रखने की अपील की
ढाका, 14 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की 13वें संसदीय चुनाव में निर्णायक जीत के बाद पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान ने शनिवार को कहा कि देश में कानून-व्यवस्था “हर हाल में” बनाए रखना अनिवार्य है और सभी से सुरक्षित व मानवीय राष्ट्र निर्माण में सहयोग करने की अपील की।
ढाका में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए रहमान ने कहा कि देश के पुनर्निर्माण में इस बार सभी को जिम्मेदार भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा, “हमें सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश बनाने के लिए सभी का सहयोग चाहिए। किसी भी बहाने से किसी के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता। कानून-व्यवस्था हर हाल में बनाए रखनी होगी।”
रहमान, जो पूर्ण बहुमत मिलने के बाद बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसी भी तरह की हिंसा, प्रतिशोध या उकसावे की कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “मेरा रुख स्पष्ट है- शांति और व्यवस्था हर कीमत पर बनाए रखी जाएगी। किसी भी प्रकार का अन्याय या अवैध गतिविधि स्वीकार नहीं होगी। पार्टी, धर्म, रंग या अलग विचारधारा के आधार पर मजबूत द्वारा कमजोर पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।”
रहमान ने चुनाव परिणाम को “जनता की जीत” करार देते हुए कहा कि देश के स्वतंत्रता-प्रेमी लोगों ने बीएनपी को विजयी बनाया है।
12 फरवरी को हुए चुनाव में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतीं। चट्टोग्राम-2 और चट्टोग्राम-4 सहित दो निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम रोके गए हैं, जहां बीएनपी उम्मीदवार बढ़त पर बताए गए हैं। पार्टी के सहयोगियों ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की है।
दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने 68 सीटें हासिल कीं, जबकि जमात के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन के सहयोगियों को नौ सीटें मिलीं। इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (आईएबी) ने एक सीट जीती, जबकि सात निर्वाचन क्षेत्रों में निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे।
करीब 35 वर्षों बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के सामने अशांति और बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ जैसी चुनौतियों से निपटना बड़ी प्राथमिकता होगी।
पिछले 18 महीनों तक रहे मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान देश में अस्थिरता और उग्रवाद के मामलों में वृद्धि देखी गई थी।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बलूचिस्तान में एक और बलूच युवक की हत्या, मानवाधिकार संगठन का दावा
क्वेटा, 14 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा के बीच शनिवार को एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने एक और बलूच युवक की कथित हत्या का मामला सामने लाया है।
इन घटनाओं को प्रांत में बढ़ती लक्षित हत्याओं और जबरन गुमशुदगियों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
मानवाधिकार संगठन बलोच एकजुटता समिति ने खुलासा किया कि 25 वर्षीय कमाल दाद, जो पेशे से चालक था, की 12 फरवरी को बलूचिस्तान के ग्वादर जिले के कंटानी क्षेत्र में कथित रूप से पाकिस्तान समर्थित डेथ स्क्वॉड द्वारा हत्या कर दी गई।
संगठन के अनुसार, कमाल दाद को 2025 में पहले भी जबरन गायब कर दिया गया था और एक महीने की अवैध हिरासत के बाद रिहा किया गया था। रिहाई के बाद फकीर कॉलोनी में उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसमें वह घायल हो गए थे।
संगठन ने कहा कि पहले हुए हमले के बावजूद उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई और न ही जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
बलोच एकजुटता समिति ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि कमाल दाद की हत्या उन लोगों के खिलाफ जारी हिंसा का उदाहरण है, जो पहले जबरन गुमशुदगी का शिकार हो चुके हैं।
संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकार संधि (आईसीसीपीआर) के अनुच्छेद 6 का उल्लंघन बताया, जो जीवन के अधिकार की गारंटी देता है और मनमाने ढंग से जीवन से वंचित करने पर रोक लगाता है।
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र तंत्र, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक नागरिक समाज से अपील की है कि वे बलूचिस्तान में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों का संज्ञान लें और निर्दोष लोगों की जान बचाने के लिए हस्तक्षेप करें।
इस बीच, मानवाधिकार संगठन पांक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘ए ईयर ऑफ रिप्रेशन: बलूचिस्तान 2025’ में प्रांत में व्यापक मानवाधिकार उल्लंघनों का दस्तावेजीकरण किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जबरन गुमशुदगी के 1,355 मामले और 225 न्यायेतर हत्याएं दर्ज की गईं। इसके अलावा नागरिक इलाकों पर हवाई हमलों और शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाने के लिए कानूनी एवं प्रशासनिक उपायों के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जबरन गुमशुदगी बलूचिस्तान में राज्य प्रायोजित आतंक का प्रमुख माध्यम बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि 2025 में पहले लापता किए गए 225 लोगों के शव बरामद हुए, जिससे तथाकथित ‘किल एंड डंप’ नीति की पुष्टि होती है। इस नीति के तहत हिरासत में लिए गए लोगों की हत्या कर उनके शव सुनसान इलाकों में फेंक दिए जाते हैं और बाद में उन्हें ‘आतंकवादी’ या ‘उग्रवादी’ बताकर मौत को जायज ठहराने की कोशिश की जाती है।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया एजेंसियों तथा अर्धसैनिक बलों ने बलूच आबादी के खिलाफ जबरन गुमशुदगी, न्यायेतर हत्याओं और आधुनिक हवाई हमलों के जरिए कार्रवाई तेज कर दी है।
--आईएएनएस
डीएससी
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