विमानन नियमों को मिली मंजूरी, Supreme Court में केंद्र ने कहा 2 हफ्ते में होंगे प्रकाशित
केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि भारत के विमानन क्षेत्र को विनियमित और नियंत्रित करने संबंधी अधिनियम के तहत नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है, और दो सप्ताह के भीतर इनके प्रकाशित होने की संभावना है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत प्रकाशित नियमों को सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के समक्ष रखें। शुरुआत में, मेहता ने कहा, ‘‘नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और उन्हें प्रशासनिक मंजूरी भी मिल गई है।
इन्हें दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित कर दिया जाएगा।’’ पीठ ने मामले को 16 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अदालत सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक की मांग की है, जो नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
साथ ही, याचिकाकर्ता ने भारत में निजी विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराए और अन्य शुल्कों में होने वाले ‘‘अनिश्चित उतार-चढ़ाव’’ को नियंत्रित करने के लिए नियामक दिशानिर्देशों का भी अनुरोध किया है। केंद्र सरकार ने 17 अगस्त को शीर्ष अदालत को बताया था कि वह ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया में तेजी ला रहा है। इस अधिनियम का उद्देश्य भारत के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है और इसके नियमों को तीन सप्ताह के भीतर अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
सरकार ने नियमों का मसौदा एक सीलबंद लिफाफे में रखा और कहा कि कुछ अंतिम चर्चाएं जारी हैं। शीर्ष अदालत ने 13 जुलाई को केंद्र से कहा था कि वह ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ के तहत बनाए गए नियमों को उसके समक्ष रखे। इसने कहा था कि नियम एक सीलबंद लिफाफे में उसके सामने रखे जाएं, भले ही उन्हें संसद के समक्ष रखा गया हो या नहीं।
इससे पहले, शीर्ष अदालत ने कहा था कि हवाई किराए को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए और केंद्र यात्रियों को राहत प्रदान करे। केंद्र ने पीठ को बताया था कि 2024 का नया कानून जनवरी 2025 में लागू हो गया है और इससे जुड़े नियम तैयार किए जा रहे हैं।
Delhi CEO ने मसौदा सूची से हटाए 47 लाख से अधिक मतदाताओं का फिर से सत्यापन शुरू कराया
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अशोक कुमार ने शुक्रवार को बताया कि निर्वाचन अधिकारियों ने उन 47 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों का फिर से सत्यापन शुरू कर दिया है, जिन्हें मतदाता सूची के मसौदे से हटा दिया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए। यह कदम 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से कई ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतों के बीच उठाया गया है, जो अपने पंजीकृत पते पर ही रह रहे थे।
कुमार ने बताया कि जिन 33.12 लाख मामलों में मतदाताओं को तार्किक विसंगति के कारण नोटिस जारी किए गए थे, उनमें से लगभग 25 लाख मामलों का निपटारा कर दिया गया है। कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘बूथ-स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन मतदाताओं का फिर से सत्यापन करें, जिनके नाम गणना चरण के बाद जारी की गई मतदाता सूची के मसौदे में नहीं थे। हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि चार दिसंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम न छूटे।’’ उन्होंने कहा कि मसौदा मतदाता सूची में जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे चार दिसंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विवरण में मामूली गलतियां होने पर मतदाताओं के आवेदनों को सीधे खारिज नहीं किया जाए। एसआईआर के गणना चरण के बाद 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.56 लाख के नाम मसौदा मतदाता सूची से ‘एएसडीडी’ श्रेणी के तहत हटा दिए गए थे। इनमें अनुपस्थित, विस्थापित, मृत और नाम में दोहराव वाले मतदाता शामिल थे।
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