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Kanya Pujan Time: सप्तमी तिथि पर कन्या पूजन करना है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और कंजक विधि

Kanya Pujan Time: शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो चुकी है. इस दौरान नौ दिनों तक नवरात्रि व्रत रखा जाता है और माता के नौ स्वरूपों की पूजा होती है. अंत में शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन किया जाता है. हालांकि, सप्तमी तिथि पर भी कन्या पूजन किया जाता है. धार्मिक कथाओं के अनुसार, नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर माता मां कालरात्री की पूजा की जाती है. कालरात्री देवी को दुर्गा मां का सातवां स्वरूप कहा जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने के साथ-साथ कन्या पूजन करने का भी महत्व बताया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि अगर आप सप्तमी के दिन कन्या पूजा करना चाहते हैं तो शुभ मुहूर्त क्या होगा.

नवरात्रि की सप्तमी तिथि कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर 2026 को प्रात:काल 5 बजकर 54 मिनट पर लगेगी. वहीं, इस वर्ष सप्तमी तिथि की वृद्धि हो रही है तो आप लोगों के पास 18 अक्टूबर को सुबह तक भी सप्तमी तिथि रहने वाली है. सप्तमी तिथि सूर्योदय के साथ 17 अगस्त को भी उपलब्ध रहेगी. इसलिए, इस दिन सप्तमी का व्रत रखा जाएगा.

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सप्तमी तिथि पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

बता दें कि 17 अक्टूबर 2026 को कंजक पूजन के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. धार्मिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करने से जातक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है. इससे मनवांछित फल भी मिलता है.

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 49 मिनट से लेकर दोपहर 12:35 मिनट तक

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:52 बजे से लेकर सुबह 05:40 मिनट तक

कन्या पूजन करने के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त- सुबह 07:54 मिनट से लेकर सुबह 09:20 तक

कंजक पूजन करने की सरल विधि इस प्रकार है-

  • इस दिन सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए और फिर स्वच्छ वस्त्र धारण करने हैं. पूजा स्थल की सफाई करें.
  • अब दुर्गा मां के सामने दीया जलाएं और उन्हें रोली, अक्षत, फल, फूल तथा अन्य प्रसाद अर्पित करें.
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 2 से 10 साल की कन्याओं को श्रद्धापूर्वक आमंत्रित करें.
  • कई परिवारों में से एक बालक को भी भैरव का प्रतीक रूप में बैठाकर कन्या पूजन करें.
  • कन्याओं के पैर धोएं, उन्हें तिलक करें, फूल-अक्षत अर्पित करें. लाल चुनरी ओढ़ाएं.
  • इसके बाद कन्याओं को श्रद्धा से हलवा, पूरी, काले चने और सात्विक भोजन परोसें.
  • अंत में कन्याओं को फल, मिठाई और दक्षिणा देकर विदा करें.
  • कन्याओं का पूरा आदर-सम्मान करें.

नोट- कन्या पूजन करने से पहले एक बार राहुकाल का समय जरूर देख लें. इस समय को अशुभ काल माना जाता है. इसलिए, इस समय किए गए कर्मों का शुभ फल नहीं प्राप्त होता है. 

सप्तमी तिथि पर कन्या पूजन क्यों किया जाता है?

शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर दुर्गा मां के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि अपने भक्तों को भय और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने वाली देवी मानी जाती हैं. उनका स्वरूप भले ही उग्र माना जाता है, लेकिन वे अपने भक्तों पर करुणा बरसाती हैं. नवरात्रि के दौरान छोटी कन्याओं को देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने की परंपरा है. इसी मान्यता के चलते कुछ परिवार सप्तमी तिथि पर भी कन्या पूजन करते हैं. इस दौरान कन्याओं का तिलक करके, उनके पैर धोकर और उन्हें भोजन कराकर सम्मान दिया जाता है. पौराणिक ग्रंथों में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि नवरात्रि के बाद कन्या पूजन करने के लिए सप्तमी, अष्टमी और नवमी की तिथि को सबसे शुभ माना जाता है. कई घरों में परंपरा है कि इन तीनों तिथियों पर कन्या पूजन होता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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झारखंड के सरकारी स्कूलों की बदलेगी तस्वीर, तीन साल की विकास योजना बनाएगी एसएमसी

Jharkhand Govt: झारखंड के सरकारी स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने, उनकी देखभाल करने और जरूरत पड़ने पर मरम्मत कराने के लिए तीन साल की विकास योजना तैयार की जाएगी. इस योजना का उद्देश्य विद्यालयों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना और पहले से मौजूद सुविधाओं को बेहतर बनाए रखना है. इसके तहत वित्तीय वर्ष 2027-28 से अगले तीन वर्षों के लिए विद्यालय विकास योजना बनाई जाएगी. इसकी जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) को सौंपी गई है.

शिक्षा परियोजना परिषद ने जारी किया निर्देश

इस संबंध में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के परियोजना निदेशक शशि रंजन ने 25 सितंबर 2026 को निर्देश जारी किया है. यह निर्देश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों और जिला शिक्षा अधीक्षकों सह अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को दिया गया है. अधिकारियों को योजना तैयार करने और तय समय के भीतर इससे जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी करने को कहा गया है.

पंचायत की विकास योजना में भी शामिल होंगे स्कूल

निर्देश के अनुसार, विद्यालय विकास योजना को केवल स्कूल तक सीमित नहीं रखा जाएगा. इसे ग्राम पंचायत विकास योजना में भी शामिल कराया जाएगा. इसके लिए जिला स्तर के अधिकारियों को पंचायती राज विभाग के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया है. इस व्यवस्था से स्कूलों की जरूरतों को पंचायत की विकास योजनाओं में शामिल करने में मदद मिलेगी. इससे विद्यालयों में जरूरी निर्माण कार्य, सुविधाओं के रखरखाव और मरम्मत से जुड़े कामों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा सकेगा.

चार चरणों में पूरी होगी योजना बनाने की प्रक्रिया

विद्यालय विकास योजना तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने के लिए चार चरण निर्धारित किए गए हैं. सबसे पहले विद्यालय स्तर पर 1 से 10 अक्टूबर तक योजना तैयार की जाएगी. इसके बाद 11 से 17 अक्टूबर तक संकुल स्तर पर काम होगा. प्रखंड स्तर पर 21 से 26 अक्टूबर तक योजना से संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी. वहीं, जिला स्तर पर 27 से 31 अक्टूबर तक योजना तैयार करने और उसके समेकन का काम पूरा किया जाएगा. संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर सभी जरूरी जानकारियां दर्ज करने का निर्देश दिया गया है. संकुल, प्रखंड और जिला स्तर पर योजना से जुड़ी प्रविष्टियां निर्धारित लिंक के माध्यम से की जाएंगी.

मरम्मत और रखरखाव के लिए राशि का होगा उपयोग

विद्यालय विकास योजना के तहत स्कूलों की इमारतों और अन्य आधारभूत सुविधाओं के रखरखाव और मरम्मत को प्राथमिकता दी जा सकती है. इसके लिए 14वें और 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि का भी उपयोग किया जा सकता है. जिला शिक्षा अधीक्षक सह झारखंड शिक्षा परियोजना के अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रामजी प्रसाद ने बताया कि विकास योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस योजना से सरकारी स्कूलों की जरूरतों को व्यवस्थित तरीके से पहचानने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलने की उम्मीद है.

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