Batala के गांव में मोबाइल विवाद में युवक की जान गई, Police ने नशा एंगल नकारा
पंजाब में बटाला के एक गांव में मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हाथापाई के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि इस व्यक्ति को क्षेत्र में मादक पदार्थ की कथित तस्करी का विरोध करने की कीमत चुकानी पड़ी है।
हालांकि, पुलिस ने इस घटना में किसी मादक पदार्थ कोण से इनकार किया है। बटाला पुलिस द्वारा ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मेहताब सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात जिले के मारी पनवां गांव में हत्या की एक घटना सामने आई, जो एक मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुई हाथापाई का नतीजा थी। उन्होंने कहा, ‘‘बिक्रमजीत सिंह नामक व्यक्ति को धारदार हथियार से घायल कर दिया गया।
बाद में उसकी मौत हो गई। इस घटना में दो अन्य लोग भी घायल हुए।’’ एसएसपी ने स्पष्ट किया, ‘‘इस घटना में मादक पदार्थ वाला कोई कोण नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि पुलिस ने बीएनएस की धारा 103 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। उन्होंने कहा कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
हालांकि, सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के विरोधी दलों ने इस घटना को लेकर भगवंत मान सरकार की कड़ी आलोचना की है। यह घटना मानसा में एक दवा दुकानदार द्वारा नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या किए जाने के दो दिन बाद हुई है। झोटा की हत्या ने राज्य में राजनीतिक घमासान छेड़ दिया है।
अगले साल के आरंभ में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और लुधियाना के सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘श्री हरगोबिंदपुर में कथित तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध करने पर एक युवक की हत्या कर दी गई और दो अन्य लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब के बच्चों की रक्षा कौन करेगा? सरकार सिर्फ घोषणाएं करती रहेगी।
परिवार कब तक भुगतते रहेंगे? हमें जवाबदेही चाहिए, मादक पदार्थ नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहिए। एक ऐसा पंजाब चाहिए जहां मादक पदार्थ के खिलाफ आवाज़ उठाने पर किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े।’’ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि मानसा में नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को गोली मारे जाने के ठीक दो दिन बाद 40 वर्षीय बिक्रमजीत सिंह की हत्या, पंजाब में आप सरकार के तहत कानून-व्यवस्था के ध्वस्त होने के बारे में ‘गंभीर सवाल’ खड़े करती है।
नवीन की टिप्पणी पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मैं नितिन नवीन जी की बात से पूरी तरह सहमत हूं। जब नशीले पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दिन-दहाड़े गोली मार दी जाती है, तो यह सिर्फ पुलिस व्यवस्था की विफलता नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन के पूरी तरह ध्वस्त हो जाने का संकेत है।’’ ढिल्लों ने कहा, ‘‘मादक पदार्थ माफिया और अपराधियों को कुचलना होगा। उनके पीछे मौजूद हर तरह के राजनीतिक संरक्षण का पर्दाफाश करना होगा।
भाजपा पंजाब को नशा-मुक्त, गैंगस्टर-मुक्त और सुरक्षित बनाएगी।’’
ECI ने 17 राज्यों में शुरू किया SSR, दलों को मिलेगी वोटर लिस्ट की आसान PDF
अपनी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया को लेकर हो रहे भारी विरोध के बीच, चुनाव आयोग ने दो ऐसे मुद्दों पर अपना रुख बदल लिया है, जिन पर लंबे समय से विपक्ष के साथ उसका टकराव चल रहा था। पिछले 24 घंटों में, दबाव का सामना कर रहे चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) की घोषणा की है। इसके अलावा, चुनाव आयोग ने पहली बार राजनीतिक दलों को अंतिम मतदाता सूची की ऐसी PDF कॉपी देने का वादा किया है जिसे आसानी से पढ़ा जा सके - जो कि उसके अपने ही पुराने रुख से एक बड़ा बदलाव है।
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हाल के वर्षों में विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने इन दोनों मुद्दों को बार-बार उठाया है। दूसरे ऐलान ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, क्योंकि 2018 में जब कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, तब खुद चुनाव आयोग (ECI) ने निजता (प्राइवेसी) से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची जारी करने का विरोध किया था। यह समय काफी अहम है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग, खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और तेज हो गए हैं। आरोप है कि मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) में गड़बड़ियां की गई हैं। पूरे देश में मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया के चलते 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं, जिससे भारी अफरा-तफरी मच गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR के कारण, चुनाव आयोग ने विशेष SSR प्रक्रिया को रोक दिया था, जिसके जरिए नए पात्र मतदाताओं (जिनमें 18 वर्ष के होने वाले लोग भी शामिल हैं) का पंजीकरण किया जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि 'जेन Z' (Gen Z) मतदाता 2024-25 की SSR प्रक्रिया के तहत अपना पंजीकरण नहीं करा सके, जिससे काफी नाराजगी पैदा हुई। आगे बढ़ने से पहले, मैं संक्षेप में बता दूँ कि SSR, SIR से किस तरह अलग है।
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SIR एक अधिक विस्तृत प्रक्रिया है, जिसमें नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज़ देने पड़ते हैं या पिछली मतदाता सूचियों से मिलान (मैपिंग) करना पड़ता है। SSR मतदाता सूचियों को अपडेट करने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने की एक नियमित, वार्षिक प्रक्रिया है। इसलिए, मतदाताओं को खुद को पिछली विस्तृत पुनरीक्षण प्रक्रिया (intensive revision) से "मैप" करने की ज़रूरत नहीं होती। SIR के विपरीत, इसमें BLOs द्वारा घर-घर जाकर जाँच करने की प्रक्रिया शामिल नहीं होती है।
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