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Explainer: मेरठ कोर्ट ने पिछले 3 दिन में 4 दोषियों को सुनाई सजा-ए-मौत, जानें अब चारों का आगे क्या?

Meerut Court Death Penalty: मेरठ की जिला अदालत ने पिछले तीन दिनों में 4 दोषियों को मौत की सजा सुनाई है. इनमें पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए मुस्कान और साहिल के अलावा अमित कश्यप की हत्या के मामले में दोषी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप शामिल हैं. दोनों मामलों में हत्या की साजिश रचने और वारदात को छिपाने के आरोप सामने आए. अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए चारों को मृत्युदंड दिया है.

रविता और अमरदीप को 16 अक्टूबर को सजा सुनाई गई. इससे पहले 14 अक्टूबर को मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई गई थी. इन फैसलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चारों को अब फांसी दे दी जाएगी? क्या वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं? क्या राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाने का भी विकल्प है?

इस एक्सप्लेनर में जानिए चारों मामलों की पृष्ठभूमि, अदालत के फैसलों और मृत्युदंड के बाद की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी अहम बातें.

1. मेरठ कोर्ट ने किन चार दोषियों को सुनाई फांसी की सजा?

  • मुस्कान: पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई. इस मामले में मुस्कान के साथ साहिल को भी मृत्युदंड दिया गया.
  • साहिल: सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान के साथ दोषी ठहराया गया. दोनों को 14 अक्टूबर को सजा सुनाई गई.
  • रविता: पति अमित कश्यप की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, उसने अपने प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और मौत को सांप के काटने का मामला दिखाने की कोशिश की.
  • अमरदीप: अमित कश्यप की हत्या में रविता के साथ दोषी ठहराया गया. अदालत ने 16 अक्टूबर को उसे भी मृत्युदंड सुनाया.

इन दोनों मामलों में अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया है. हालांकि, सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि दोषियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी. इसके लिए कानून में तय कई चरणों को पूरा करना जरूरी है.

2. रविता और अमरदीप ने कैसे की थी अमित कश्यप की हत्या?

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अमित कश्यप मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का रहने वाला था. अमरदीप उसके साथ टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करता था. इस वजह से उसका अमित के घर आनाजाना था. इसी दौरान अमरदीप और रविता के बीच प्रेम संबंध बन गए. बताया गया कि अमित को इस संबंध की जानकारी हो गई थी. इसके बाद दोनों ने उसकी हत्या की साजिश रची.

इस मामले की कहानी के अहम बिंदु:

  • सांप खरीदना: अभियोजन पक्ष के मुताबिक, रविता और अमरदीप ने एक सपेरे से 1,000 रुपये में सांप खरीदा था.
  • 17 अप्रैल 2025 की रात: आरोपों के मुताबिक, अमित के सोने के बाद रविता ने अमरदीप को फोन कर घर बुलाया. दोनों ने अमित की गला दबाकर हत्या कर दी.
  • हत्या को दूसरा रूप देने की कोशिश: अमित की मौत सांप के काटने से हुई दिखाने के लिए बिस्तर पर सांप छोड़ दिया गया.
  • शव पर मिले निशान: अमित के शरीर पर सांप के काटने जैसे निशान मिले. शुरुआती तौर पर परिवार को लगा कि उसकी मौत सांप के डसने से हुई है.
  • पोस्टमॉर्टम से खुला मामला: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया. रिपोर्ट में सांप के जहर की पुष्टि नहीं हुई.
  • पुलिस की जांच: संदेह के आधार पर रविता से पूछताछ की गई. इसके बाद अमरदीप का नाम सामने आया और पुलिस ने दोनों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाई.

रविता और अमरदीप के खिलाफ कौन से सबूत अहम रहे?

अभियोजन पक्ष ने अदालत में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामला पेश किया. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस केस में 12 गवाहों के बयान अहम रहे.

  • सपेरे की गवाही: सपेरे ने बताया कि अमरदीप ने देवी जागरण में पूजा की बात कहकर सांप लिया था. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सांप ऐसा नहीं था जिसके काटने से मौत हो सकती थी.
  • पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि हुई और सांप के जहर का प्रमाण नहीं मिला.
  • मोबाइल कॉल डिटेल: जांच में सामने आया कि हत्या से पहले दोनों के बीच लगातार बातचीत होती थी. हत्या के बाद 24 घंटे के भीतर 65 बार फोन और वॉट्सऐप कॉल पर संपर्क होने की जानकारी भी सामने आई.

इन साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत ने 7 अक्टूबर को रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया. इसके बाद 16 अक्टूबर को दोनों को मौत की सजा सुनाई गई.

3. सजा सुनाते समय क्या बोले रविता और अमरदीप?

सजा सुनाने से पहले अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों का पक्ष सुना. रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों की देखभाल की गुहार लगाई. वहीं, अमरदीप ने अपने बूढ़े मातापिता का हवाला देते हुए कहा कि उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. इसके बाद दोनों भावुक होकर रोने लगे.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, अदालत ने सजा पर विचार करते हुए अपराध की गंभीरता और पतिपत्नी के रिश्ते का जिक्र किया. अदालत ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए मृत्युदंड दिया.

अमित के भाई सोनू ने फैसले पर संतोष जताया. उन्होंने कहा कि परिवार को न्याय मिला है और अगर दोषी ऊपरी अदालतों में अपील करते हैं, तो वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे. अमित की मां मुनेश ने भी कहा कि फैसले से उन्हें राहत मिली है. उन्होंने अपने पोतेपोतियों को पालने की जिम्मेदारी निभाने की बात कही.

4. मुस्कान और साहिल को किस मामले में फांसी की सजा मिली?

मेरठ की अदालत ने 14 अक्टूबर को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाया था. यह मामला भी हत्या की साजिश और वारदात को छिपाने के आरोपों के कारण चर्चा में रहा.

रविता और अमरदीप को सजा सुनाए जाने के दिन सौरभ राजपूत के भाई राहुल और उनकी मां रेनू देवी भी अदालत पहुंचीं. उनका कहना था कि अमित कश्यप की हत्या के मामले में भी गंभीर अपराध हुआ है और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

दोनों मामलों में मृत्युदंड के फैसले आने के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर है. हालांकि, दोनों मामलों के तथ्य और साक्ष्य अलगअलग हैं. इसलिए हर मामले में अपील और आगे की कार्यवाही उसके अपने रिकॉर्ड के आधार पर होगी.

5. अब चारों दोषियों का आगे क्या होगा?

फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषियों के पास कानून के तहत कई विकल्प होते हैं. अदालत का फैसला अंतिम रूप से लागू होने से पहले इन प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है.

पहला चरण: हाईकोर्ट में अपील और सजा की पुष्टि

  • सत्र अदालत से मृत्युदंड मिलने के बाद मामला संबंधित हाईकोर्ट के सामने पुष्टि के लिए जाता है. हाईकोर्ट को मृत्युदंड की पुष्टि करनी होती है.
  • दोषी हाईकोर्ट में अपील भी कर सकते हैं. वहां फैसले और साक्ष्यों की समीक्षा की जा सकती है.
  • हाईकोर्ट मृत्युदंड की पुष्टि कर सकता है, सजा बदल सकता है या कानून के अनुसार अन्य आदेश दे सकता है.
  • रविता, अमरदीप, मुस्कान और साहिल के मामलों में आगे की प्रक्रिया संबंधित अदालती रिकॉर्ड और आदेशों के मुताबिक चलेगी.

दूसरा चरण: सुप्रीम कोर्ट में अपील

  • अगर हाईकोर्ट मृत्युदंड की पुष्टि करता है, तो दोषी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं.
  • सुप्रीम कोर्ट मामले के तथ्यों, सबूतों, कानूनी पहलुओं और सजा की वैधता पर विचार कर सकता है.
  • अदालत के फैसले के अनुसार मृत्युदंड बरकरार रह सकता है या उसमें बदलाव हो सकता है.

तीसरा चरण: पुनर्विचार याचिका

सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर दोषी पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकते हैं. इसमें अदालत से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया जाता है. मृत्युदंड के मामलों में पुनर्विचार की प्रक्रिया के लिए विशेष न्यायिक नियम लागू होते हैं.

चौथा चरण: क्यूरेटिव याचिका

पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सीमित परिस्थितियों में क्यूरेटिव याचिका का विकल्प भी हो सकता है. इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में किसी गंभीर त्रुटि या अन्य मान्य आधार पर राहत मांगना है. यह सामान्य अपील की तरह मामले की पूरी सुनवाई दोबारा कराने का अधिकार नहीं है.

पांचवां चरण: राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास दया याचिका

दोषी संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति और अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के समक्ष दया याचिका का विकल्प भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इन प्रावधानों के तहत सजा में राहत देने, उसे कम करने या कानून के अनुसार अन्य राहत पर विचार किया जा सकता है.

दया याचिका खारिज होने के बाद भी कानून के तहत उपलब्ध न्यायिक उपाय और निर्धारित प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण रहती हैं. जब तक जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक मृत्युदंड को लागू नहीं किया जा सकता.

6. क्या चारों को तुरंत फांसी हो जाएगी?

 केवल निचली अदालत से मृत्युदंड सुनाए जाने के आधार पर फांसी तुरंत नहीं दी जा सकती. मृत्युदंड की हाईकोर्ट से पुष्टि और कानून के मुताबिक आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है.

  • हाईकोर्ट में मृत्युदंड की पुष्टि की प्रक्रिया होगी.
  • दोषी ऊपरी अदालतों में उपलब्ध कानूनी विकल्प अपना सकते हैं.
  • पुनर्विचार, क्यूरेटिव और दया याचिका जैसी प्रक्रियाएं मामले के अनुसार सामने आ सकती हैं.
  • सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने और कानूनी शर्तें पूरी होने के बाद ही सजा लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है.

इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि चारों को कब फांसी दी जाएगी. इसकी कोई निश्चित तारीख केवल निचली अदालत के फैसले से तय नहीं होती.

7. इन फैसलों से जुड़ी सबसे अहम बातें

  • मेरठ की अदालत ने 14 और 16 अक्टूबर को दो अलगअलग मामलों में कुल चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया.
  • मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में सजा मिली.
  • रविता और अमरदीप को अमित कश्यप की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मृत्युदंड दिया गया.
  • रविताअमरदीप मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, सपेरे की गवाही और मोबाइल कॉल डिटेल अहम साक्ष्यों में शामिल रहे.
  • मृत्युदंड के बाद हाईकोर्ट से पुष्टि और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जरूरी हैं.
  • चारों दोषियों को तुरंत फांसी नहीं दी जाएगी. आगे का फैसला संबंधित अदालतों और कानून के तहत उपलब्ध विकल्पों पर निर्भर करेगा.

मेरठ में तीन दिनों के भीतर चार दोषियों को मृत्युदंड सुनाया जाना चर्चा का विषय है, लेकिन अदालत का फैसला और उसे लागू करना दो अलग चरण हैं. चारों दोषियों के मामलों में अब हाईकोर्ट की कार्यवाही, संभावित अपील और कानून के तहत उपलब्ध अन्य विकल्प अहम होंगे. अंतिम परिणाम इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा.

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भविष्यवाणी! पांचवें टी20 मैच में खेलेंगे वैभव सूर्यवंशी, टीम इंडिया की प्लेइंग-11 पर पूर्व कोच का आया बड़ा बयान

Vaibhav Sooryavanshi : भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला और आखिरी मुकाबला 17 अक्टूबर यानी शनिवार को खेला जाने वाला है. इस मुकाबला फैसला करेगा कि इस सीरीज को कौन जीतेगा क्योंकि सीरीज अभी तक सिर्फ 2-2 की बराबरी पर है. इस सीरीज का पहला और दूसरा मुकाबला भारत ने जीता तो वहीं, दूसरे और चौथे मैच में वेस्टइंडीज को जीत मिली. इस पांच मैचों की सीरीज में अब तक भारत के सबसे छोटे बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका नहीं मिला है. अब पांचवें टी20 में क्या उन्हें मौका मिलेगा. इस पर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने वैभव को प्लेइंग-11 में शामिल करने पर क्या कहा है, आइए जानते हैं.

इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने 15 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ पांचवें टी20 में वैभव को मौका देने की वकालत की है. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक ऐसी शर्त भी रख दी है, जिससे उन्हें एक अजीब हालत को जन्म दे दिया है. उन्होंने टॉप ऑर्डर में किसी तरह का बदलाव नहीं किए बगैर वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग-11 में मौका देने की बात की है. 

मैं वैभव खेलते हुए देखना चाहता हूं - अभिषेक नायर

अभिषेक नायर ने कहा कि, 'सूर्यवंशी के बारे में तभी सोचा जाना चाहिए जब भारत उन्हें ओपनर के तौर पर उनकी नैचुरल पोजीशन पर इस्तेमाल करने के लिए तैयार हो. अगर वैभव सूर्यवंशी खेलते हैं, तो उन्हें उनकी सबसे मजबूत पोजीशन पर खेलना चाहिए, जो कि ओपनिंग है. अगर वह ओपनिंग करते हैं, तो जो नंबर 3 पर खेल रहा है, उसे अपनी सबसे मजबूत पोजीशन पर खेलना चाहिए. मैं वैभव सूर्यवंशी को बेंगलुरु में देखना चाहता हूं, लेकिन मैं बॉलिंग में बदलाव करूंगा, बैटिंग में नहीं'.

 

आपको बता दें कि, वैभव सूर्यवंशी ने 4 जुलाई को मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया था. इस सीरीज के तीन मैचों में उनका बल्ला नहीं चला लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में वैभव का प्रदर्शन अच्छा रहा था. तीन मैचों में 2 अर्धशतक के साथ 151 रन बनाकर वो प्लेयर ऑफ द मैच रहे थे. इसके बाद अफगानिस्तान सीरीज में उन्हें मौका नहीं मिला था. एशियन गेम्स में श्रीलंका के खिलाफ 21 गेंदों पर 38 और फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ नौ गेंदों पर 15 रन उनके बल्ले से निकले. अब फिर वैभव सूर्यवंशी वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

वैभव सूर्यवंशी का करियर 

वैभव ने अब तक कुल 8 टी20 मैच टीम इंडिया के लिए खेल पाए हैं. उन्होंने 8 मैचों की 8 पारियों में 2 हाफ सेंचुरी की मदद से 246 रन बनाए हैं. इस दौरान उनके बल्ले से 22 चौके और 18 छ्कके निकले हैं. उनका औसत 30.75 का है, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 186.32 का है.

वेस्टइंडीज सीरीज में अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है. अभिषेक ने 4 पारियों में 139 रन बनाए हैं. इसमें 30 गेंदों पर खेली गई एक 69 रन की पारी शामिल है, जबकि सैमसन ने 152 रन बनाए हैं, जिसमें रांची में 41 गेंदों पर 82 और हैदराबाद में 23 गेंदों पर 56 रन शामिल हैं. ऐसे में वैभव को प्लेइंग इलेवन में जगह देना कोच गंभीर और कप्तान अय्यर के लिए मुश्किल हो गया है. क्योंकि इन दोनों बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है.

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