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खतरे में ईशान किशन की जगह, न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के लिए इस इंडियन प्लेयर का सिलेक्ट होना पक्का, जानें कैसा होगा स्क्वाड

IND vs NZ ODI : भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज 4 नवंबर से लेकर 15 नवंबर तक खेली जाने वाली है. इस सीरीज के लिए इंडियन क्रिकेट टीम के स्क्वाड का ऐलान जल्द ही होने वाला है. कुछ खिलाड़ियों की फिटनेस रिपोर्ट चयनकर्ताओं को नहीं मिल पाने के चलते अभी तक इंडियन क्रिकेट टीम का ऐलान नहीं हुआ है. इस सीरीज के लिए इंडियन क्रिकेट टीम 28 अक्टूबर को न्यूजीलैंड के उड़ान भरने वाली है. उससे पहले भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी समाने आ गई है. इसकी मानें तो, ईशान किशन की जगह पर खतरा मंडरा रहा है. वहीं एक बाएं हाथ के बल्लेबाजी की जगह लगभग पक्की हो चुकी है. ये कौन है, आइए इसके बारे में जानते हैं.

ईशान किशन की जगह पर मडंराया खतरा

दरअसल, भारतीय के वनडे स्क्वाड में ईशान किशन को अफगानिस्तान सीरीज के लिए मौका मिला था. उन्होंने बल्ले के साथ मीडिल ऑर्डर में अच्छा प्रदर्शन किया. इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ हुई वनडे सीरीज में उन्हें मौका नहीं मिला क्योंकि वो उन्हीं दिनों जापान में एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा ले रहे थे. अब न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्हें मौका मिलेगा या नहीं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन अभी उनकी जगह पर खतरा नजर आ रहा है. 

यशस्वी जायसवाल को मिलेगा वनडे स्क्वाड में मौका

इंडियन क्रिकेट टीम के वनडे स्क्वाड में यशस्वी जायसवाल का सिलेक्ट होना लगभग पक्का हो चुका है. क्योंकि यशस्वी को रणजी ट्रॉफी 2026-27 के आगामी मुकाबले के स्क्वाड से बाहर कर दिया गया है. उन्हें इस लिए बाहर किया गया है कि, वो न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज में इंडियन क्रिकेट टीम के स्क्वाड का हिस्सा होंगे. यशस्वी वेस्टइंडीज वनडे सीरीज में भी टीम के साथ थे लेकिन उनको खेलने का मौका नहीं मिला था. अब उनको न्यूजीलैंड सीरीज में मौका मिलने वाला है. ईशान की जगह पर खतरा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि यशस्वी जायसवाल ने विकेटकीपिंग भी शुरू कर दी है.

मुंबई ने यशस्वी जायसवाल को किया बाहर

मुंबई ने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ होने वाले दूसरे मुकाबले के लिए अपनी टीम का ऐलान कर दिया है. मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ बिलासपुर में 18 से 21 अक्टूबर तक होने वाले मैच के लिए अपनी टीम की घोषणा कर दी है. यशस्वी जायसवाल इस मैच का हिस्सा नहीं होंगे. दरअसल, यशस्वी को न्यूजीलैंड दौरे पर जाना है और भारत ए की तरफ से न्यूजीलैंड ए के खिलाफ खेलना है. न्यूजीलैंड में 24 अक्टूबर से इंडिया ए और न्यूजीलैंड ए के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू होने वाली है और यशस्वी तीन मैचों के लिए टीम इंडिया का हिस्सा हैं. यही वजह है कि वह रणजी ट्रॉफी के पहले मैच के बाद टीम से अलग हो गए.

आपको बता दें कि, शुभमन गिल और रोहित शर्मा टीम इंडिया के लिए वनडे में ओपनिंग करते हैं. ऐसे में ईशान किशन को बतौर तीसरे ओपनर और विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर रखा जाता है. लेकिन जब ईशान नहीं थे तो, यशस्वी जायसवाल को चुना गया था. अब न्यूजीलैंड दौरे पर भारतीय सिलेक्टर 2 अलग-अलग वनडे स्क्वाड चुन सकते हैं. ऐसे में यशस्वी को मौका मिलना लगभग तय है. क्योंकि वनडे सीरीज के अंत के सिर्फ 3 तीन बाद टेस्ट सीरीज शुरू हो जाएगी. 

न्यूजीलैंड के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों की सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने के लिहाज काफी अहम है. ऐसे में टीम इंडिया उसकी तैयारी के लिए पहले से ही अभ्यास शुरू कर देगी. रेड बॉल क्रिकेट में ढलने के लिए शुभमन गिल के अलावा अन्य खिलाड़ी जो सिर्फ टेस्ट क्रिकेट का ही हिस्सा हैं, वो अपने तैयारियों को पुख्ता करते हुए नजर आ सकते हैं.  

कैसा हो सकता है भारत का वनडे स्क्वाड 

शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), यशस्वी जायसवाल, रुतुराज गायकवाड़, नीतीश कुमार रेड्डी, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, भुवनेश्वर कुमार, मोहम्मद सिराज, गुरनूर बराड़, प्रसिद्ध कृष्णा. 

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Explainer: कनॉट प्लेस में धारा 163 और 21 रास्तों पर ट्रैफिक की मार! CJP के तिरंगा मार्च पर पुलिस क्या कर सकती है और प्रदर्शनकारियों के पास क्या हैं अधिकार?

CJP Tiranga March Delhi: राजधानी के दिल कनॉट प्लेस में आज शाम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का 'लहरा दो तिरंगा' मार्च प्रस्तावित है. पुलिस ने इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी है, सेंट्रल पार्क दो दिन के लिए बंद है और कई सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका जताई गई है. ऐसे में आम लोगों के मन में सवाल है कि पुलिस इस स्थिति में क्या कर सकती है और प्रदर्शन करने वालों के पास कानूनी तौर पर कौन-से अधिकार हैं?

CJP का यह प्रदर्शन आखिर क्यों हो रहा है?

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में यह मार्च बुलाया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. पुलिस ने अतिक्रमण, निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी कामकाज में बाधा जैसे आरोप गिनाए हैं. CJP का कहना है कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं है. बता दें यह पार्टी 16 मई 2026 को ऑनलाइन व्यंग्यात्मक मंच के रूप में शुरू हुई थी.

पुलिस और प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?

दिल्ली पुलिस का कहना है कि कनॉट प्लेस कोई तय प्रदर्शन स्थल नहीं है और वहां इस समय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है. पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी है. मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि पुलिस ने सीमित संख्या में लोगों को तय जगह पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने का प्रस्ताव दिया था लेकिन दिपके ने इसे ठुकरा दिया. इसके बाद एनडीएमसी ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है.

ट्रैफिक पर क्या असर पड़ेगा?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक आज दोपहर तीन बजे से कनॉट प्लेस और नई दिल्ली के आसपास करीब 21 रास्तों पर यातायात प्रभावित हो सकता है. इनमें संसद मार्ग, बाबा खड़क सिंह मार्ग और बाराखंभा रोड जैसे व्यस्त रास्ते शामिल बताए गए हैं. मौके की स्थिति देखकर डायवर्जन किया जा सकता है. 

धारा 163 और निषेधाज्ञा का मतलब क्या है?

धारा 163 वही प्रावधान है, जिसे पहले सीआरपीसी की धारा 144 के नाम से जाना जाता था. नए कानून BNSS में यह उसकी जगह आई है. इसके तहत अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी किसी इलाके में खतरे, उपद्रव या शांति भंग की आशंका होने पर लोगों के इकट्ठा होने जैसी गतिविधियों पर रोक लगा सकता है. ऐसा आदेश आमतौर पर सीमित समय के लिए होता है और जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है.

क्या निषेधाज्ञा का मतलब हर प्रदर्शन पर पूरा प्रतिबंध है?

कानून के जानकारों के मुताबिक निषेधाज्ञा आम तौर पर तय संख्या से ज्यादा लोगों के जमा होने, रैली या जुलूस निकालने जैसी चीजों को रोकती है. लेकिन यह आदेश मनमाने तरीके से नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की ठोस आशंका के आधार पर ही लगना चाहिए. अगर किसी को लगे कि आदेश अनुचित है तो वह अदालत में इसे चुनौती दे सकता है.

पुलिस कब रोक सकती है या हिरासत में ले सकती है?

जानकारी के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति निषेधाज्ञा के बावजूद इकट्ठा होता है या आदेश का उल्लंघन करता है तो पुलिस उसे रोक सकती है और भीड़ को हटाने के लिए नागरिक बल का इस्तेमाल कर सकती है. नए कानूनों में अपराध रोकने के लिए एहतियातन हिरासत में लेने का प्रावधान भी है. ऐसे मामलों में आम तौर पर हिरासत में लिए गए लोगों को कुछ घंटे बाद छोड़ दिया जाता है और बिना किसी दूसरे कानूनी आधार के उन्हें 24 घंटे से ज्यादा रोका नहीं जा सकता है. 

शांतिपूर्ण प्रदर्शन और गैरकानूनी जमावड़े में अंतर क्या है?

संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) हर नागरिक को बिना हथियार के शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का अधिकार देता है. लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था या देश की सुरक्षा जैसे आधार पर इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. भारतीय न्याय संहिता में पांच या उससे ज्यादा लोगों का ऐसा समूह गैरकानूनी जमावड़ा माना जाता है जो किसी गैरकानूनी साझा मकसद से इकट्ठा हुआ हो या जिसका इरादा हिंसा या जबरदस्ती का हो. 

अगर निषेधाज्ञा के बावजूद कोई शांतिपूर्वक झंडा लेकर खड़ा हो जाए तो?

कानून के जानकारों के मुताबिक ऐसी स्थिति में भी पुलिस निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई कर सकती है, क्योंकि आदेश जारी होने के बाद उसे मानना बाध्यकारी होता है. यही वजह है कि अदालतें अक्सर कहती हैं कि विरोध का अधिकार है लेकिन उसे निर्धारित तरीके और जगह पर ही इस्तेमाल करना चाहिए. 

सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या कह चुका है?

रामलीला मैदान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्वक इकट्ठा होने और प्रदर्शन के अधिकार को मौलिक अधिकार माना था. वहीं, मजदूर किसान शक्ति संगठन मामले में अदालत ने कहा कि प्रदर्शन का अधिकार नियमन के दायरे में रहेगा यानी जगह और समय को लेकर पुलिस नियम बना सकती है. इसी तरह शाहीन बाग मामले में अदालत ने साफ कहा था कि सार्वजनिक रास्ते पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता. इन फैसलों का सार यही है कि अधिकार भी है और उस पर सीमाएं भी हैं.

हिरासत में लिए जाने पर क्या अधिकार हैं?

हिरासत या गिरफ्तारी के वक्त व्यक्ति को उसका कारण बताया जाना चाहिए. उसे परिवार या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को सूचना देने और वकील से मिलने का अधिकार होता है. गिरफ्तार होने की स्थिति में 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी होता है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु दिशा-निर्देश गिरफ्तारी के दौरान मेमो बनाने और मेडिकल जांच जैसी प्रक्रियाओं पर जोर देते हैं. 

व्यापारियों और आम लोगों की क्या शिकायत है?

कनॉट प्लेस के कुछ व्यापारियों ने सवाल उठाया है कि त्योहारी सीजन में ऐसे प्रदर्शन से उनका कारोबार प्रभावित होता है और विरोध के लिए यही जगह क्यों चुनी गई. पुलिस ने भी अपनी अपील में आम लोगों से इलाके से दूर रहने को कहा है.

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