अभिजीत दीपके बोले, सरकारी पाबंदियों से होता है व्यापार को नुकसान, प्रदर्शन से नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से व्यापार को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि नुकसान तब होता है जब सरकार पूरा शहर बंद कर देती है, इंटरनेट निलंबित कर देती है और नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाती है। दीपके ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शांति और अहिंसा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि कॉजपा ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे और वे सभी पूरी तरह शांतिपूर्ण थे।
दीपके ने कहा कि जयपुर में उन पर हमला किया गया था, लेकिन उन्होंने जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया, क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देना आंदोलन के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम शारीरिक बल का सहारा लेने के बजाय डॉ. बी.आर. आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान द्वारा हमें दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल करना पसंद करेंगे।’’ दीपके ने कॉजपा के सदस्यों को ‘‘अराजक तत्व’’ साबित करने की कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि सरकार से जवाब मांगना, अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन करना और सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से सवाल करना लोकतंत्र की मौलिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह विपक्ष में था, तब उसने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे और सरकारों से सवाल पूछे थे, लेकिन अब वह इसी तरह के प्रदर्शनों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बता रहा है।
दीपके ने कहा, ‘‘सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है, सड़कों पर अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना अराजकता नहीं है और सार्वजनिक पद संभालने वालों से सवाल पूछना निश्चित रूप से अराजकता नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि यदि यही प्रतिबंध, डराने-धमकाने के तरीके और पुलिस की सख्ती सत्तारूढ़ दल पर उस समय लागू की जाती जब वह विपक्ष में था, तो उसके कई नेता कभी सत्ता के पदों तक नहीं पहुंच पाते। दीपके ने कहा, ‘‘इसलिए, आइए हम अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से सवाल पूछकर, जवाबदेही की मांग करके और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर इस देश के नागरिकों के रूप में अपने कर्तव्य को पूरा करें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी विशेषाधिकार या विशेष व्यवहार की मांग नहीं कर रहे हैं। हम केवल उन अधिकारों का प्रयोग करने के लिए कह रहे हैं जो इस गणराज्य के प्रत्येक नागरिक के हैं, चाहे सत्ता में कोई भी दल हो।’’ दीपके ने कहा, ‘‘जनता द्वारा चुनी गई सरकार जनता की बात सुनने के लिए बाध्य है, उन्हें चुप कराने के लिए नहीं।
वोट गिने जाने के बाद लोकतंत्र खत्म नहीं हो जाता।’’ दीपके की यह टिप्पणी कॉजपा और दिल्ली पुलिस के बीच चल रहे गतिरोध के बीच आई है। पार्टी ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रवेश करने के बाद कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने का आह्वान किया है। बता दें कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया है।
हालांकि, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने घोषणा की है कि प्रशासनिक कारणों से शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क आम जनता के लिए बंद रहेगा। दास, रांका और अन्य लोगों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने व्यापक आंदोलन के तहत पुलिस अवरोधक लांघकर जंतर-मंतर में प्रवेश किया था। कॉजपा के प्रस्तावित मार्च के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने नयी दिल्ली क्षेत्र में 6,000 से अधिक कर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 220 कंपनियों को तैनात किया है।
Navratri में सपा नेताओं का Chicken Party Video वायरल, BJP बोली- सनातन का अपमान हुआ
समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन, पीलीभीत जिला अध्यक्ष धर्मेश गंगवार और पार्टी के अन्य नेताओं का नवरात्रि के दौरान चिकन खाते हुए एक वीडियो वायरल हो गया है, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक दिन पहले का है, जिसमें ये नेता पीलीभीत में SP नेता मोहम्मद आरिफ के घर पर फ्राइड चिकन और चटनी का आनंद लेते दिख रहे हैं। यह घटनाक्रम तब हुआ जब सुमन पार्टी कार्यालय में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन में शामिल होने गए थे।
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भाजपा ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि नकली समाजवाद का दोहरा चरित्र बेनकाब! नवरात्रि में जब सनातनी व्रत रख रहे हैं, तब सपा के PDA सम्मेलन में मुर्गे की दावत उड़ रही है। एक तरफ चुनावी हिंदू बनने का नाटक, दूसरी तरफ सनातन का अपमान। यही है सपा का असली PDA - Pरिवारवाद, Dगा और Aपमान। नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक मनाई जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार के दौरान, कई श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं के चलते मांस, अंडे, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करते हैं।
वायरल हुए एक वीडियो ने त्योहार के दौरान नेताओं के मांसाहारी भोजन करने के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीलीभीत के जिला अध्यक्ष ने फोन का कोई जवाब नहीं दिया, जबकि अन्य नेताओं ने भी सवालों से किनारा कर लिया। खबरों के अनुसार, राज्य के गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार ने सवाल उठाया है कि जब मांस की दुकानें बंद थीं, तो यह खाना कहाँ से आया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच की मांग करते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखेंगे।
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इस विवाद ने भाजपा सरकार के खिलाफ सुमन की पिछली टिप्पणियों की ओर भी ध्यान खींचा है। एक जनसभा में, सपा सांसद ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों में "रोटी, पेट और भूख" जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। खबरों के अनुसार, उन्होंने मंदिरों पर दिए जा रहे जोर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंदिरों से मूर्तियां चोरी होने की घटनाओं और राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का जिक्र किया। इसके अलावा, सुमन ने सामाजिक भेदभाव का भी हवाला दिया; इसमें एक ऐसी घटना शामिल है, जिसमें कथित तौर पर राष्ट्रपति को एक मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया था। साथ ही, उन्होंने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री आवास को गंगाजल से धोए जाने की घटना का भी जिक्र किया।
नकली समाजवाद का दोहरा चरित्र बेनकाब ! नवरात्रि में जब सनातनी व्रत रख रहे हैं, तब सपा के PDA सम्मेलन में मुर्गे की दावत उड़ रही है। एक तरफ चुनावी हिंदू बनने का नाटक, दूसरी तरफ सनातन का अपमान। यही है सपा का असली PDA - Pरिवारवाद, Dगा और Aपमान https://t.co/Ti0HyrugH3
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 15, 2026
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