Navratri में सपा नेताओं का Chicken Party Video वायरल, BJP बोली- सनातन का अपमान हुआ
समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन, पीलीभीत जिला अध्यक्ष धर्मेश गंगवार और पार्टी के अन्य नेताओं का नवरात्रि के दौरान चिकन खाते हुए एक वीडियो वायरल हो गया है, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक दिन पहले का है, जिसमें ये नेता पीलीभीत में SP नेता मोहम्मद आरिफ के घर पर फ्राइड चिकन और चटनी का आनंद लेते दिख रहे हैं। यह घटनाक्रम तब हुआ जब सुमन पार्टी कार्यालय में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन में शामिल होने गए थे।
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भाजपा ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि नकली समाजवाद का दोहरा चरित्र बेनकाब! नवरात्रि में जब सनातनी व्रत रख रहे हैं, तब सपा के PDA सम्मेलन में मुर्गे की दावत उड़ रही है। एक तरफ चुनावी हिंदू बनने का नाटक, दूसरी तरफ सनातन का अपमान। यही है सपा का असली PDA - Pरिवारवाद, Dगा और Aपमान। नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक मनाई जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस त्योहार के दौरान, कई श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं के चलते मांस, अंडे, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करते हैं।
वायरल हुए एक वीडियो ने त्योहार के दौरान नेताओं के मांसाहारी भोजन करने के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीलीभीत के जिला अध्यक्ष ने फोन का कोई जवाब नहीं दिया, जबकि अन्य नेताओं ने भी सवालों से किनारा कर लिया। खबरों के अनुसार, राज्य के गन्ना मंत्री संजय सिंह गंगवार ने सवाल उठाया है कि जब मांस की दुकानें बंद थीं, तो यह खाना कहाँ से आया। उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच की मांग करते हुए जिलाधिकारी को पत्र लिखेंगे।
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इस विवाद ने भाजपा सरकार के खिलाफ सुमन की पिछली टिप्पणियों की ओर भी ध्यान खींचा है। एक जनसभा में, सपा सांसद ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों में "रोटी, पेट और भूख" जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। खबरों के अनुसार, उन्होंने मंदिरों पर दिए जा रहे जोर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंदिरों से मूर्तियां चोरी होने की घटनाओं और राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का जिक्र किया। इसके अलावा, सुमन ने सामाजिक भेदभाव का भी हवाला दिया; इसमें एक ऐसी घटना शामिल है, जिसमें कथित तौर पर राष्ट्रपति को एक मंदिर में प्रवेश करने से रोका गया था। साथ ही, उन्होंने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री आवास को गंगाजल से धोए जाने की घटना का भी जिक्र किया।
नकली समाजवाद का दोहरा चरित्र बेनकाब ! नवरात्रि में जब सनातनी व्रत रख रहे हैं, तब सपा के PDA सम्मेलन में मुर्गे की दावत उड़ रही है। एक तरफ चुनावी हिंदू बनने का नाटक, दूसरी तरफ सनातन का अपमान। यही है सपा का असली PDA - Pरिवारवाद, Dगा और Aपमान https://t.co/Ti0HyrugH3
— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) October 15, 2026
Delhi Riots साजिश केस: आरोपी अतहर खान की UAPA मामले में Supreme Court में सुनवाई चार हफ्ते टली
उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे की ‘‘बड़ी साजिश’’ से जुड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में आरोपी अतहर खान की जमानत याचिका पर सुनवाई शुक्रवार को चार सप्ताह के लिए टाल दी। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू के यह बताने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी कि मामले में जवाब दाखिल कर दिया गया है।
शीर्ष अदालत ने खान को दिल्ली पुलिस के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी। उच्चतम न्यायालय ने इससे पहले खान की अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। खान ने सात जुलाई के दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत के 29 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली खान की अपील खारिज कर दी थी। कॉल सेंटर के पूर्व कर्मचारी अतहर पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग में प्रदर्शन की साजिश रचने और उसका आयोजन करने वाले मुख्य आरोपियों में शामिल होने का आरोप है। उस पर हिंसा भड़काने के लिए वहां भड़काऊ भाषण देने का भी आरोप है।
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के अनुसार, अतहर कथित तौर पर गुप्त बैठकों में शामिल हुआ था जिनमें उसने कहा था कि ‘‘दिल्ली को जलाने का समय आ गया है।’’ उस पर सीसीटीवी कैमरों को नष्ट करने में भी शामिल होने का आरोप है। अतहर को जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उस पर दंगों के ‘‘मुख्य साजिशकर्ताओं’’ में से एक होने के आरोप में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इस बड़ी साजिश से जुड़े मामले में कथित संलिप्तता को लेकर कार्यकर्ता शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद सहित अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ कर रहा है।
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