Uttarakhand की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री Rekha Arya को उनके पति ने पीटा! FIR में लगाये गये आरोपों से आया सियासी भूचाल
उत्तराखंड की राजनीति में उस वक्त भूचाल आ गया, जब प्रदेश सरकार में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ मारपीट, धोखाधड़ी, जालसाजी और हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोपों में पुलिस से शिकायत दर्ज कराई। गुरुवार शाम करीब 7:25 बजे देहरादून के गढ़ी कैंट थाने में इस मामले में FIR दर्ज की गई। प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की 13 धाराएं और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तीन प्रावधान शामिल किए गए हैं।
रेखा आर्य ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस तक पहुंचने की वजह बताई। उन्होंने दावा किया कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में उनके पति कथित तौर पर उनकी हत्या की साजिश से जुड़ी बातचीत करते सुनाई देते हैं। मंत्री के मुताबिक, इस रिकॉर्डिंग ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और उनके रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “क्या सच और ईमानदारी के साथ जीवन जीने का यही परिणाम मिलता है?” रेखा आर्य ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। उन्हें आशंका है कि उनके पति उनके या उनके नाबालिग बच्चों के खिलाफ कोई गंभीर अपराध कर सकते हैं। हम आपको यह भी बता दें कि शिकायत दर्ज कराने के बाद तबीयत खराब होने की सूचना पर उन्हें अस्पताल भी ले जाया गया।
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हम आपको बता दें कि मंत्री द्वारा साझा की गई 8 मिनट 27 सेकंड की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में गिरधारी लाल साहू एक महिला से जमानत और जेल जाने की आशंका पर बातचीत करते सुनाई देने का दावा किया गया है। रिकॉर्डिंग के मुताबिक, वह महिला को “मेरे बाबू” कहकर भरोसा दिलाते हैं कि वह उसके साथ रहेंगे और उसे जमानत मिल जाएगी। बातचीत में महिला कथित तौर पर जेल जाने और खबर सार्वजनिक होने से अपनी छवि खराब होने की चिंता जताती है। जवाब में उसे आश्वस्त किया जाता है कि कुछ बाहर नहीं आएगा। इसी बातचीत में रेखा आर्य की मौत का कथित जिक्र और आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल किए जाने का दावा भी है। ऑडियो लग जायेगा।
हम आपको बता दें कि रेखा आर्य ने शिकायत में बताया कि उन्होंने 6 जुलाई 2004 को उत्तर प्रदेश के बरेली में गिरधारी लाल साहू से शादी की थी। उनका आरोप है कि साहू ने खुद को अविवाहित बताया था, जबकि उनकी पहले से पत्नी और बच्चे थे। मंत्री के मुताबिक, उन्हें इस कथित धोखे का पता कई साल बाद चला, लेकिन बच्चों की खातिर उन्होंने चुप्पी बनाए रखी। रेखा आर्य ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति दूसरी महिलाओं के संपर्क में रहे। विरोध करने पर कथित तौर पर लिखित और मौखिक माफी मांगी गई, लेकिन व्यवहार में बदलाव नहीं आया। शिकायत के अनुसार, आपत्ति जताने पर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि उनके आधिकारिक आवास पर कर्मचारियों के सामने जातिसूचक अपशब्द कहे गए।
हम आपको बता दें कि इस मामले में एक और गंभीर आरोप कथित दस्तावेजी जालसाजी का है। रेखा आर्य का दावा है कि उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से कर ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए, जिनसे यह दिखाया जा सके कि उन्होंने उन कंपनियों के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया है, जिनसे वह जुड़ी थीं। उनका कहना है कि उन्होंने न तो ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और न ही इस्तीफा दिया। FIR में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 420 (धोखाधड़ी) समेत अन्य धाराएं शामिल हैं। साथ ही SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तीन प्रावधान भी लगाए गए हैं।
साथ ही रेखा आर्य ने अपने संदेश में महिलाओं से घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिला सामान्य हो या प्रभावशाली, उसे घरेलू अत्याचार सहकर चुप नहीं रहना चाहिए। मंत्री ने संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके मायके पक्ष ने हमेशा उनका साथ दिया है।
अब इस मामले में पुलिस जांच की भूमिका अहम होगी। आरोपों की सच्चाई, कथित ऑडियो की प्रामाणिकता और दस्तावेजों से जुड़े दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन इतना साफ है कि इस प्रकरण ने उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और तथ्यों से ही मिल सकता है।
अभिजीत दीपके बोले, सरकारी पाबंदियों से होता है व्यापार को नुकसान, प्रदर्शन से नहीं
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से व्यापार को नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि नुकसान तब होता है जब सरकार पूरा शहर बंद कर देती है, इंटरनेट निलंबित कर देती है और नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाती है। दीपके ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में शांति और अहिंसा के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि कॉजपा ने मुंबई, पुणे, जयपुर, लखनऊ, बेंगलुरु और नागपुर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे और वे सभी पूरी तरह शांतिपूर्ण थे।
दीपके ने कहा कि जयपुर में उन पर हमला किया गया था, लेकिन उन्होंने जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया, क्योंकि हिंसा का जवाब हिंसा से देना आंदोलन के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम शारीरिक बल का सहारा लेने के बजाय डॉ. बी.आर. आंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किए गए संविधान द्वारा हमें दिए गए अधिकारों का इस्तेमाल करना पसंद करेंगे।’’ दीपके ने कॉजपा के सदस्यों को ‘‘अराजक तत्व’’ साबित करने की कोशिश को खारिज करते हुए कहा कि सरकार से जवाब मांगना, अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन करना और सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों से सवाल करना लोकतंत्र की मौलिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर पाखंड का आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह विपक्ष में था, तब उसने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे और सरकारों से सवाल पूछे थे, लेकिन अब वह इसी तरह के प्रदर्शनों को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बता रहा है।
दीपके ने कहा, ‘‘सरकार से जवाब मांगना अराजकता नहीं है, सड़कों पर अन्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना अराजकता नहीं है और सार्वजनिक पद संभालने वालों से सवाल पूछना निश्चित रूप से अराजकता नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि यदि यही प्रतिबंध, डराने-धमकाने के तरीके और पुलिस की सख्ती सत्तारूढ़ दल पर उस समय लागू की जाती जब वह विपक्ष में था, तो उसके कई नेता कभी सत्ता के पदों तक नहीं पहुंच पाते। दीपके ने कहा, ‘‘इसलिए, आइए हम अपने चुने हुए प्रतिनिधियों से सवाल पूछकर, जवाबदेही की मांग करके और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर इस देश के नागरिकों के रूप में अपने कर्तव्य को पूरा करें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी विशेषाधिकार या विशेष व्यवहार की मांग नहीं कर रहे हैं। हम केवल उन अधिकारों का प्रयोग करने के लिए कह रहे हैं जो इस गणराज्य के प्रत्येक नागरिक के हैं, चाहे सत्ता में कोई भी दल हो।’’ दीपके ने कहा, ‘‘जनता द्वारा चुनी गई सरकार जनता की बात सुनने के लिए बाध्य है, उन्हें चुप कराने के लिए नहीं।
वोट गिने जाने के बाद लोकतंत्र खत्म नहीं हो जाता।’’ दीपके की यह टिप्पणी कॉजपा और दिल्ली पुलिस के बीच चल रहे गतिरोध के बीच आई है। पार्टी ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रवेश करने के बाद कॉजपा नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद शुक्रवार शाम पांच बजे सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च निकालने का आह्वान किया है। बता दें कि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से बाहर कर दिया है।
हालांकि, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने घोषणा की है कि प्रशासनिक कारणों से शुक्रवार और शनिवार को सेंट्रल पार्क आम जनता के लिए बंद रहेगा। दास, रांका और अन्य लोगों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने व्यापक आंदोलन के तहत पुलिस अवरोधक लांघकर जंतर-मंतर में प्रवेश किया था। कॉजपा के प्रस्तावित मार्च के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने नयी दिल्ली क्षेत्र में 6,000 से अधिक कर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की 220 कंपनियों को तैनात किया है।
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