मणिपुर में नहीं थम रही हिंसा! कामजोंग में महिला की हत्या, हमले में पति भी गंभीर रूप से घायल
मणिपुर में जारी जातीय तनाव के बीच हिंसा की एक और घटना सामने आई है. कामजोंग जिले में गुरुवार को हुए कथित हमले में एक कुकी महिला की मौत हो गई, जबकि उसके पति के घायल होने की खबर है. महिला के साथ मौजूद दो अन्य लोग भी लापता बताए जा रहे हैं. इस घटना के बाद इलाके में तनाव और बढ़ने की आशंका है. वहीं, राज्य सरकार ने हिंसा रोकने के लिए बातचीत और आपसी सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है.
जरूरी सामान खरीदने जा रहे लोगों पर हमला
जानकारी के मुताबिक, मृतक महिला की पहचान हतनेइकिम के रूप में हुई है, जो मोलनोई गांव की रहने वाली थी. शुरुआती जानकारी के अनुसार, वह अपने पति और कुछ अन्य लोगों के साथ जरूरी सामान खरीदने के लिए फाईकोह जा रही थी. इसी दौरान फाईकोह और ऐशु के बीच सड़क पर उन पर कथित तौर पर हमला किया गया. इस हमले में हतनेइकिम की मौत हो गई, जबकि उनके पति घायल हो गए. उनके साथ मौजूद दो अन्य नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है. हमले के पीछे संदिग्ध नगा उग्रवादियों का हाथ होने की बात कही जा रही है. यह घटना ऐसे समय हुई है, जब राज्य में कुकी और नगा समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है. इससे पहले भी अलग-अलग घटनाओं में दोनों समुदायों के लोगों की जान जा चुकी है.
कुकी-नगा संघर्ष में अब तक कई लोगों की मौत
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल फरवरी में कुकी-नगा संघर्ष शुरू होने के बाद से कम से कम 22 नगा और 32 कुकी लोगों की मौत हो चुकी है. संघर्ष में जान गंवाने वाली कुकी महिलाओं की संख्या बढ़कर 10 हो गई है. इनमें दो गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. यह तनाव मणिपुर में 2023 से 2025 के बीच चले कुकी-मैतेई संघर्ष के बाद सामने आया है. ताजा हमले से पांच दिन पहले तीन जिलों में हुई घटनाओं में नौ लोगों की मौत की खबर आई थी. मृतकों में दो कुकी, एक गोरखा और छह नगा पुरुष शामिल थे..
नगा व्यक्ति का सिर मिलने के बाद बढ़ा तनाव
इस बीच, सुरक्षा बलों को बुधवार देर रात कांगपोकपी जिले में नगा व्यक्ति अजिनबोउ रिंगकामाई का सिर मिला. वह उन चार नगा पुरुषों में शामिल थे, जिनकी 10 अक्टूबर को मकुई अशांग गांव पर हुए हमले में मौत हो गई थी. इस घटना में उनका सिर नहीं मिल पाया था. 11 अक्टूबर को उनका शव इंफाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) लाया गया था. एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बुधवार देर रात घटनास्थल के पास एक सुनसान जगह से सिर बरामद किया गया. इसके बाद गुरुवार सुबह उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया. इससे पहले नगा संगठन जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर ने अधिकारियों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. संगठन ने मांग की थी कि लापता सिर का पता लगाकर उचित अंतिम संस्कार की व्यवस्था की जाए.
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गृह मंत्री ने की बातचीत से विवाद सुलझाने की अपील
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदस कोंथौजम ने गुरुवार को इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती 84 बीएसएफ जवानों से मुलाकात की. इन जवानों को फूड पॉइजनिंग की आशंका के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इस दौरान गृह मंत्री ने कहा कि केवल सरकार के प्रयासों और सुरक्षा व्यवस्था के सहारे हिंसा को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है. इसके लिए समाज के लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. उन्होंने कहा कि हत्या करने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलता. लोगों को आपस में बातचीत करनी चाहिए और अपने मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन शांति स्थापित करने में समाज की भूमिका भी अहम है.
सेना ने सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
इधर, स्पीयर कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने गुरुवार को मणिपुर में असम राइफल्स की एक अग्रिम चौकी का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने सुरक्षा हालात की समीक्षा की और भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात जवानों की तैयारियों की जानकारी ली. भारत और म्यांमार के बीच करीब 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है. इसमें से लगभग 398 किलोमीटर हिस्सा मणिपुर में आता है. सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम जारी
भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी शुरू हो चुका है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अब तक करीब 55 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने का काम पूरा किया जा चुका है. सरकार की योजना वर्ष 2028 तक इस काम को पूरा करने की है. हालांकि, पहाड़ी और जंगली इलाके इस परियोजना में मुश्किलें पैदा कर रहे हैं. इसके अलावा, सीमा के दोनों ओर आने-जाने के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले कुछ उग्रवादी समूहों का विरोध भी काम की रफ्तार को प्रभावित कर रहा है.
मणिपुर में लगातार सामने आ रही हिंसा की घटनाओं के बीच शांति बहाल करना सरकार और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. ऐसे में सुरक्षा उपायों के साथ-साथ समुदायों के बीच बातचीत और विश्वास बहाली को भी अहम माना जा रहा है.
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