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चीन ने सौंपी हूतियों को खैबर मिसाइल, सऊदी-इजरायल में बजा तबाही का सायरन!

 मिडिल ईस्ट में पहले से ही बारूद की गंध फैली हुई है, लेकिन अब इस संकट की आंच सऊदी अरब और चीन के रिश्तों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। जिस चीन ने सऊदी अरब और ईरान के बीच दोस्ती का रास्ता खोलने में अहम भूमिका निभाई थी, अब उसी चीन की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। सऊदी अरब की नाराजगी इतनी बढ़ चुकी है कि उसके पूर्व खुफिया प्रमुख ने बीजिंग को साफ संदेश दे दिया है कि अगर चीन खुद को निष्पक्ष मध्यस्थ मानता है, तो उसे अपने काम से यह साबित करना होगा। मामला सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी का नहीं है। इसके पीछे हूती विद्रोहियों के हमले, लाल सागर में बढ़ता खतरा और उनकी इन मिसाइलों में कथित चीनी पुर्जों के इस्तेमाल से जुड़े दावे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सऊदी अरब अब चीन से जवाब मांग रहा है? दरअसल, सऊदी अरब के पूर्व खुफिया प्रमुख और किंग फैसल सेंटर ऑफ रिसर्च एंड इस्लामिक स्टडीज के चेयरमैन प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने चीन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि चीन को कुछ ऐसा करके दिखाना होगा जिससे साबित हो सके कि वह सऊदी अरब और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ है। गौर करने वाली बात यह है कि मार्च 2023 में चीन की मध्यस्थता से सऊदी अरब और ईरान ने अपने राजनयिक संबंध बहाल करने पर सहमति जताई थी। उस वक्त इसे मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की दिशा में बड़ी कामयाबी माना गया था, लेकिन अब सऊदी अरब चाहता है कि इस समझौते का असर जमीन पर भी दिखाई दे।

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रियाद की उम्मीद है कि चीन ईरान पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके हूती विद्रोहियों के हमलों को रोकने में मदद करे। सऊदी अरब की चिंता की बड़ी वजह यमन में सक्रिय हूती विद्रोही हैं, जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है। सऊदी अधिकारियों को आशंका है कि लगातार हमलों से देश के अहम बुनियादी ढांचे और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में अस्थिरता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल परिवहन पर भी असर पड़ सकता है। इसी बीच हूती विद्रोहियों की मिसाइलों में चीनी तकनीक और पुर्जों के इस्तेमाल को लेकर भी दावे सामने आए हैं। इन रिपोर्टों ने सऊदी अरब की चिंताओं को और बढ़ाया है। हालांकि, चीनी पुर्जों के कथित इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि चीन की सरकार सीधे हूतियों को हथियार दे रही है; इसके लिए ठोस सबूत और स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। दूसरी तरफ चीन ने सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे पर हूती हमलों की निंदा की है और सभी पक्षों से तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाई से बचने की अपील भी की है। लेकिन सऊदी अरब अब सिर्फ बयान नहीं बल्कि ठोस कदम चाहता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चीन ईरान पर दबाव डालकर हूती हमलों को रोकने में मदद करेगा या फिर इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तल्खी और बढ़ेगी। फिलहाल प्रिंस तुर्की अल-फैसल के बयान ने साफ कर दिया है कि सऊदी अरब अब चीन की मध्यस्थता को उसके नतीजों के आधार पर परखना चाहता है।

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दूसरी ओर, चप्पल और लुंगी में रहने वाले यमन के हूती लड़ाकों ने आसमान में वो सनसनीखेज कारनामा कर दिखाया जिसने पेंटागन से लेकर रियाद तक तमाम रक्षा एक्सपर्टों के होश उड़ाकर रख दिए हैं। यमन के सादा गवर्नरेट के आसमान में सऊदी अरब का मल्टी-मिलियन डॉलर का अत्याधुनिक टाइफून फाइटर जेट यमन की सीमा पर हमले कर रहा था, तभी यमन की सरजमीं से उठे एक बारूदी शोले ने उस सुपरसोनिक लड़ाकू विमान के चीथड़े उड़ा दिए। 15 अक्टूबर 2026 की इस खौफनाक वारदात का वीडियो फुटेज सामने आते ही पूरी दुनिया में सन्नाटा छा चुका है। सवाल उठने लगे कि क्या कबीलों में रहने वाले अंसारुल्लाह के ये लड़ाके आज इतने एडवांस्ड हो चुके हैं? सऊदी अरब का जो टाइफून फाइटर जेट अपने स्टील्थ और एयर डिफेंस डॉज करने की तकनीक पर इतना इतराया करता था, वह सादा के आसमान में आग का गोला बनकर सीधे क्रैश होने की कगार पर आ पहुंचा। हूतियों की तरफ से बकायदा इसका एक वीडियो भी जारी किया गया है जो रडार पर साफ तौर पर देखा जा सकता है। सबसे हैरान और चौंकाने वाली बात यह है कि हूतियों ने अरबों रुपये के इस पश्चिमी फाइटर जेट को गिराने के लिए किसी अमेरिकी या रूसी मिसाइल का नहीं, बल्कि यमन में खुद निर्मित सरफेस-टू-एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया है। एक्सपर्ट और दुनियाभर के मिलिट्री एनालिस्ट यह देखकर दांतों तले उंगलियां दबा रहे हैं कि जो हूती लड़ाके कभी साधारण कबीले वाले माने जाते थे, जिन्हें दुनिया पैरों में चप्पल और हाथ में पुरानी बंदूकों के लिए जाना करती थी—आज उनकी मिसाइल निर्माण और डिफेंस टेक्नोलॉजी का स्तर इस खौफनाक मुकाम पर आखिर कैसे पहुंच गया। पश्चिमी एक्सपर्ट्स का दावा है कि हूतियों ने अब अपने घर में बनी मिसाइलों के रडार, गाइडेंस सिस्टम और वॉरहेड को इतना एडवांस कर लिया है कि वे आधुनिक 4.5 और फिफ्थ-जनरेशन के टाइफून जैसे घातक जेट्स को भी हवा में ढूंढ-ढूंढकर उनका शिकार कर ले रहे हैं।

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आसमान में जलता हुआ सऊदी टाइफून सिर्फ एक जेट की तबाही नहीं, बल्कि यह रियाद की वायुसेना की ताकत का वो खोखला सच दिखाता है जिसे यमन के लड़ाकों ने अपनी ही बनी मिसाइल से बेनकाब करके रख दिया। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये मिसाइलें सिर्फ यमन की अपनी टेक्नोलॉजी नहीं हैं, बल्कि इन्हें ईरान की टेक्नोलॉजी कहा जा सकता है। ईरान पर्दे के पीछे से लगातार अंसारुल्लाह को खुलकर सपोर्ट करता रहा है। भले ही ईरान सबके सामने यह कहता फिरता हो कि अंसारुल्लाह उसकी नहीं सुनते या वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं, लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि अंसारुल्लाह को ईरान के एक प्रॉक्सी गुट के रूप में देखा जाता रहा है, हालांकि ईरान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हमेशा इससे इनकार किया है। इसके साथ ही, सऊदी अरब के शाही घराने और उसके अरबों-खरबों डॉलर के अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के ताबूत में आखिरी कील ठोक दी गई। इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की सनसनीखेज रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर रियाद तक हड़कंप मचा दिया, क्योंकि अंसारुल्लाह हूती लड़ाकों ने राजधानी रियाद के सबसे सुरक्षित किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की चौखट तक भारी मिसाइलें और ड्रोन दाग कर तबाही मचा दी है। इस बार हूतियों ने जिस शैतानी और हाई-टेक रणनीति का इस्तेमाल किया, उसने पेंटागन के एक्सपर्ट्स के भी पसीने छुड़ा दिए। क्षेत्रीय अधिकारियों और सुरक्षा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हूतियों ने सबसे पहले हवा में ड्रोनों की एक विशाल लहर (स्वार्म) दागी। जब सऊदी अरब का सबसे महंगा पैट्रियट और थाड (THAAD) एयर डिफेंस सिस्टम उन दर्जनों ड्रोनों को ट्रैक करने और उन्हें हवा में रोकने के लिए पूरी तरह उलझ गया, तो उनकी पूरी रडार फ्रीक्वेंसी व्यस्त हो गई। ठीक उसी पल हूतियों ने अपने असली और सबसे घातक हथियार से हमला बोल दिया। जैसे ही सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ड्रोनों को गिराने में उलझे, पीछे से एक साथ क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों की भयंकर बौछार शुरू हो गई।

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अमेरिका में सरकारी धोखाधड़ी का आरोपी Manjeet Singh Bedi भारत से प्रत्यर्पित

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 16 अक्टूबर अमेरिका की सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं के सर्वाधिक वांछित आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति को भारत से प्रत्यर्पित किया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने यह जानकारी दी। अमेरिका के कार्यवाहक अटॉर्नी चार्ल्स नील फ्लॉयड ने बताया कि पिछले महीने भारत में गिरफ्तार किए गए मनजीत सिंह बेदी को बुधवार रात अमेरिका वापस लाया गया।

बेदी को शुक्रवार को वाशिंगटन की ‘वेस्टर्न डिस्ट्रिक कोर्ट’ में पेश किया जाएगा। एफबीआई के निदेशक काश पटेल ने कहा, “मनजीत सिंह बेदी की गिरफ्तारी और उसे वापस लाया जाना एफबीआई के ऐतिहासिक ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ कार्यक्रम की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।” पटेल ने कहा, “बेदी को वापस लाने में मदद करने के लिए एफबीआई सिएटल के साथ-साथ अमेरिका और भारत में हमारे कुशल कानून प्रवर्तन सहयोगियों का धन्यवाद।” नील फ्लॉयड ने कहा कि एफबीआई मुकदमे की सुनवाई तक बेदी को हिरासत में रखने का अदालत से अनुरोध करेगा, क्योंकि वह देश से फरार हो गया था। बेदी की वाशिंगटन के टैकोमा शहर में ‘एशियन ग्रोसरी स्टोर’ नाम से किराने की एक छोटी दुकान थी।

आरोप है कि वह पूरक पोषण सहायता कार्यक्रम (एसएनएपी) के लाभार्थियों को उनके इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर (ईबीटी) कार्ड के जरिये खाद्य पदार्थ बेचता था। धोखाधड़ी और एसएनएपी लाभों में धोखाधड़ी के आरोपों में अभियोग दायर होने के बाद बेदी को बिना गिरफ्तारी के अदालत में पेश होने की अनुमति दी गई थी। उसे अपना पासपोर्ट जमा कराने और वाशिंगटन में ही रहने का आदेश दिया गया था।

एफबीआई के अनुसार अदालत के आदेश के बाद बेदी जल्द ही गाड़ी से सीमा पार कर कनाडा पहुंचा और फिर भारत फरार हो गया। एफबीआई के सिएटल कार्यालय के प्रभारी विशेष एजेंट डब्ल्यू. माइक हेरिंगटन ने कहा, ‘‘एफबीआई की सिएटल इकाई के जांचकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के हमारे सहयोगियों की कड़ी मेहनत तथा आरोपी के ठिकाने के बारे में आम लोगों से मिली जानकारी की मदद से बेदी को अमेरिका वापस लाया जा सका है। अब उसे टैकोमा की अदालत में मुकदमे का सामना करना होगा।’’ पटेल ने कहा कि बेदी पर 2024 से 2025 के बीच एसएनएपी के तहत अमेरिका सरकार से कम से कम छह लाख अमेरिकी डॉलर की धोखाधड़ी करने का आरोप है और अब उसे अपने कथित अपराधों के लिए न्याय का सामना करना होगा।

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  Sports

गेंदबाजी में रणनीतियां लागू नहीं कर पाए, चौथे T20I में हार पर बोले कप्तान Shreyas Iyer

टीम इंडिया और वेस्टइंडीज के बीच चल रही T20I सीरीज का चौथा मुकाबला खेला गया। 15 अक्टूबर को हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में दोनों टीमें आमने-सामने थीं, जहाँ वेस्टइंडीज ने शानदार खेल दिखाते हुए जीत हासिल की। मैच की शुरुआत विंडीज़ की बल्लेबाज़ी से हुई। शानदार फॉर्म में चल रहे शाई होप ने पारी की शुरुआत की और 102 रन बनाए। शेरफेन रदरफोर्ड 49 रन बनाकर नाबाद रहे, जिससे मेहमान टीम ने पहली पारी में कुल 247 रन बनाए।

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लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 223 रनों पर ही सिमट गई। कीमो पॉल ने 5 विकेट लिए, जिससे भारतीय टीम लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी और अंततः मेज़बान टीम को हार का सामना करना पड़ा। मैच के बाद, भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टीम की कमियों पर बात की। पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में अय्यर ने कहा, "सब कुछ गेंदबाजी से शुरू हुआ। मुझे लगता है कि हम अपनी लाइन और लेंथ को सही से लागू नहीं कर पाए। 250 रन का पीछा करते समय आपको एक खास रणनीति के साथ आगे बढ़ना होता है। मुझे हमारी चेज़िंग अप्रोच अच्छी लगी, लेकिन बदकिस्मती से हम गेंदबाजी में अपनी योजनाओं को सही से लागू नहीं कर सके, और यहीं हम थोड़े पीछे रह गए।"

इस सवाल पर कि क्या शुरुआत में अभिषेक शर्मा के स्ट्राइक पर न होने से भारत की शुरुआत पर असर पड़ा, उन्होंने आगे कहा कि ऐसा नहीं है, उस समय भी हमारा रन रेट 12 प्रति ओवर चल रहा था। बात बस इतनी है कि उन्होंने अपनी योजनाओं को बहुत अच्छे से लागू किया, और विकेट का बर्ताव भी थोड़ा अलग था। गेंद थोड़ी उछल रही थी और उन्होंने फील्डिंग का भी बहुत अच्छा इस्तेमाल किया। इसलिए उन्हें पूरा श्रेय मिलना चाहिए; उनका काम एकदम सटीक था।

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यह ध्यान देने वाली बात है कि भारत और वेस्टइंडीज अब इस सीरीज के पांचवें और आखिरी T20I मैच की तैयारी कर रहे हैं। सीरीज 2-2 से बराबर है, इसलिए आने वाला मुकाबला दोनों टीमों के लिए बहुत अहम होगा। इस मुकाबले के लिए दोनों टीमें 17 अक्टूबर को बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में आमने-सामने होंगी, और यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों टीमें कैसा प्रदर्शन करती हैं।
 

Fri, 16 Oct 2026 12:19:00 +0530

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