संविधान की प्रति रखने वाले Rahul Gandhi फैला रहे अराजकता, Lucknow में बरसे Rajnath Singh
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को देशव्यापी 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान को लेकर लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर आरोप लगाया कि वे भारत में भी सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहे हैं—ठीक उसी तरह, जैसे जुलाई 2024 में पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुए जन-उभार ने शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया था।
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लखनऊ में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनकारियों को बांग्लादेश के विरोध-प्रदर्शनों से प्रेरणा मिली है। भाजपा नेता ने कहा कि इससे यह साफ हो जाता है कि विपक्षी गठबंधन लोकतांत्रिक संस्थानों को खत्म करना और देश में आग लगाना चाहता है।
SIR और कुमार को लेकर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए, राजनाथ ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल भारत के युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल अराजकता फैलाने के लिए करना चाहते हैं - चाहे सीधे तौर पर हो या किसी और तरीके से। राजनाथ ने कहा कि मैं राहुल गांधी और उनके साथियों से कहना चाहता हूं कि उन्हें यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र का मतलब अराजकता फैलाना, संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कम करना या भारत की विकास यात्रा में बाधा डालना नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि कल सुप्रीम कोर्ट ने जो टिप्पणी की, वह भी इसी ओर इशारा करती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानून का सम्मान करना बहुत जरूरी है। भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को राजनीतिक स्वार्थ की भेंट नहीं चढ़ाया जा सकता। इस सच्चाई को समझना होगा। उन्होंने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल (इमरजेंसी) को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा और इसे एक "अक्षम्य अपराध" बताया। इसके अलावा, उन्होंने 1984 के दंगों को भी कांग्रेस का एक और अक्षम्य अपराध करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने एक और अक्षम्य अपराध तब किया, जब 1990 में उन्होंने उन लोगों का समर्थन करके अपनी सरकार बचाई, जो राम भक्तों और कार सेवकों के खून-खराबे के लिए जिम्मेदार थे।
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केंद्रीय मंत्री ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी अब भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे हमेशा अपने पास संविधान की एक प्रति रखते हैं। "यह एक बहुत गंभीर आरोप था," राजनाथ ने कहा, "लेकिन कांग्रेस ने न केवल नवीन चावला को बचाया, बल्कि उनके मुख्य चुनाव आयुक्त बनने का रास्ता भी साफ किया, क्योंकि वे नेहरू-गांधी परिवार के करीबी थे। और अब, कांग्रेस दावा कर रही है कि उसके वोट चुरा लिए गए हैं?" राजनाथ ने यह भी बताया कि 1993 में कांग्रेस ने चुनाव आयोग का पुनर्गठन किया था और रातों-रात दो नए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कर दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एन. गोपालस्वामी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश की थी, क्योंकि उन्होंने कांग्रेस नेताओं के साथ "संवेदनशील जानकारी" साझा की थी।
दतिया पीतांबरा पीठ में VIP प्रवेश को लेकर विवाद, महंत राजकुमार दास से कहासुनी के बाद एक गिरफ्तार
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक शहर दतिया स्थित मां पीतांबरा पीठ मंदिर से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। यहां बीते मंगलवार को वीआईपी दर्शन के दौरान अयोध्या श्रीराम मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य महंत राजकुमार दास के साथ कुछ लोगों की तीखी बहस हो गई। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और मामला तूल पकड़ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शांति भंग करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ, मंदिर ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख जताते हुए महंत से क्षमा मांगी है। इस घटना के बाद से मंदिर में आने वाले वीआईपी मेहमानों की सुरक्षा और प्रवेश व्यवस्था को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
परिचय देते ही शुरू हुई बहस, राम मंदिर के चंदे का हुआ जिक्र
जब महंत राजकुमार दास मां धूमावती के मंदिर में दर्शन करने पहुंचे, तो उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अपना परिचय अयोध्या श्रीराम मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य के रूप में दिया। उनके परिचय देते ही वहां खड़े कुछ श्रद्धालुओं ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदे के पैसों को लेकर आपस में चर्चा और तीखी टिप्पणी शुरू कर दी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस छिड़ गई, जिसे देखकर महंत ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे अपना अपमान बताया।
पुलिस ने खंगाले सीसीटीवी फुटेज
विवाद बढ़ने की सूचना मिलते ही पुलिस और मंदिर के कर्मचारी फौरन मौके पर पहुंच गए। स्थिति को संभालते हुए पुलिस ने मंदिर परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच शुरू कर दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शांति भंग करने के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़कर जेल भेज दिया है और बाकी लोगों की पहचान की जा रही है।
बिना लिखित सूचना के वीआईपी प्रवेश पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीतांबरा पीठ ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक डॉ. चंद्र मोहन मिश्रा ने बताया कि महंत राजकुमार दास के आने की कोई भी पूर्व लिखित सूचना मंदिर कार्यालय को नहीं दी गई थी। इस तरह की घटनाओं से यह बात सामने आ रही है कि वीआईपी अतिथियों के आने पर सुरक्षा और सूचना के नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
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