Ranabaali X Review: लोगों को 'टॉर्चर' लगी राणाबली, लेकिन विजय-रश्मिका की कैमिस्ट्री ने जीता दिल
Ranabaali X Review: रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) और विजय देवरकोंडा (Vijay Deverakonda) की मचअवेटेड फिल्म 'राणाबाली' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. वहीं, इसके साथ ही सोशल मीडिया पर दर्शकों ने फिल्म का रिव्यू भी शेयर करना शुरू कर दिया है, जो कुछ खास नजर नहीं आ रहा है. सोशल मीडिया पर लोग फिल्म की टॉचर बता रहे हैं. हालांकि रश्मिका और विजय की जोड़ी लोगों को पसंद आई है.
'राणाबाली' का एक्स रिव्यू
सोशल मीडिया 'राणाबाली' को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. लोग फिल्म की कहानी, कलाकारों की एक्टिंग, रोमांटिक सीन और पूरी फिल्म के बारे में बात कर रहे हैं. एक यूजर ने फिल्म की तारीफ करते हुए लिखा- 'रणबाली, ब्लॉकबस्टर फर्स्ट हाफ, हमेशा की तरह, सेकेंड हाफ में तहलका मचने वाला है.' कुछ लोगों ने फिल्म के दूसरे हाफ को काफी बोरिंग बताया. एक यूजर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि फिल्म का दूसरा हाफ थका देने वाला है. विजय की मेहनत बेकार चली गई, जबकि रश्मिका जब-जब स्क्रीन पर आईं, तभी फिल्म में कुछ अच्छा देखने को मिला.'
#Ranabaali BLOCKBUSTER 1stHalf ASUSUAL SECOND HALF RAMPAGE LOADING ???????????????????????????????? https://t.co/FzCsG3NHNo
— . (@PokiriArjun) October 15, 2026
Done with my show, Tiresome 2nd half follows..Vijay's efforts wasted..Only Postive when Rashmika on screen..!!Ajay-Atul’s music is a big letdown, and there’s too much senseless violence & scenes. Overall, a forgettable film 1.5/5 #Ranabaali
— Peter Reviews (@urstrulyPeter) October 15, 2026
लोगों को 'टॉर्चर' लगी राणाबली
एक यूजर ने फिल्म को टॉर्चर बताते हुए लिखा- 'रणबाली हाल के समय की सबसे खराब फिल्मों में से एक है. ये सिनेमा के नाम पर परोसी गई एक ऐसी फिल्म है जिसे देखना किसी टॉर्चर से कम नहीं है. इसमें महिलाओं, बच्चों और गरीबों के खिलाफ बेहिसाब खून-खराबा और हिंसा दिखाई गई है, और पीड़ितों के प्रति इसमें रत्ती भर भी संवेदना नहीं है. फिल्म में बेवकूफ विलेन हैं, बिना किसी सोच-समझ के दिखाई गई वीरता है, और विजय देवरकोंडा का किरदार भी बिल्कुल बनावटी और अजीब लगता है.'
#Ranabaali One of the worst films in recent times. Absolute torture porn masquerading as cinema. Endless blood, gore and violence against women, children and the poor, with zero empathy for the victims. Dumb villains, mindless heroism and a caricaturish Vijay Deverakonda. 1/5
— HitWicket! (@WalkingXception) October 16, 2026
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विजय -रश्मिका की जोड़ी ने जीता दिल
राणाबाली में दर्शकों को विजय-रश्मिका की जोड़ी काफी पसंद आई. एक यूजर ने लिखा- 'क्या शानदार फिल्म है. कहानी से लेकर स्क्रीनप्ले तक, राहुल सांकृत्यायन ने कमाल कर दिया है. मुख्य जोड़ी बहुत खूबसूरत है, स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री बहुत ही शानदार लग रही है. संगीत शानदार, जयम्मा ने हमेशा की तरह कमाल कर दिया और विजय देवरकोंडा, यहां से आपको ढेर सारा प्यार. आप इसके हकदार हैं.' वहीं, दूसरे ने लिखा- 'विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना स्क्रीन पर शानदार थे, कैमिस्ट्री बहुत अच्छी लगी.'
What a movie!!!! Right from the story, screenplay @Rahul_Sankrityn nailed it. The lead pair is so beautiful, on screen chemistry looks so elegant. Music ???????????? Jayamma rocked it as usual! And #VijayDeverakonda a big hug to you from here. You deserve this ❤️❤️ #Ranabaali
— #269 Signing off (@aka_akshayy) October 15, 2026
What a movie!!!! Right from the story, screenplay @Rahul_Sankrityn nailed it. The lead pair is so beautiful, on screen chemistry looks so elegant. Music ???????????? Jayamma rocked it as usual! And #VijayDeverakonda a big hug to you from here. You deserve this ❤️❤️ #Ranabaali
— #269 Signing off (@aka_akshayy) October 15, 2026
बता दें, 'राणबाली' का निर्देशन राहुल सांकृत्यायन ने किया है और प्रमोद तम्मीनेनी इसके को-राइटर है. फिल्म में विजय देवरकोंडा ने एक सिंगनमाला बोब्बिली राणाबली का रोल प्ले किया है. वहीं रश्मिका मंदाना जयम्मा, उनकी पत्नी के रोल में नजर आई है. जबकि अर्नोल्ड वोस्लू एक ब्रिटिश कमिश्नर सर थियोडोर हेक्टर के रूप में दिखाई दिए हैं.
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करोड़ों लोगों की थाली तक क्यों नहीं पहुंच रहा पौष्टिक भोजन? विश्व खाद्य दिवस पर एफएओ ने बताया समाधान
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुनिया में इतना अनाज पैदा होता है कि हर इंसान का पेट भरा जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद करोड़ों लोग आज भी भूख का सामना कर रहे हैं। वहीं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं, जो चाहकर भी पौष्टिक भोजन नहीं खरीद पाते। ऐसे में सवाल उठता है कि जब दुनिया में अनाज और खाद्य पदार्थों की कमी नहीं है, तो आखिर हर व्यक्ति की थाली तक पौष्टिक भोजन क्यों नहीं पहुंच पा रहा है?
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने विश्व खाद्य दिवस के मौके पर नवाचार को बढ़ावा देने और खाद्य व्यवस्था को मजबूत बनाने का संदेश दिया है।
विश्व खाद्य दिवस का संदेश है, आज नवाचार करें, कल को समृद्ध बनाएं। इसका उद्देश्य ऐसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देना है, जो आज लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को भी सुरक्षित रखें।
एफएओ के मुताबिक, दुनिया में लगभग 64 करोड़ लोग भूख का सामना कर रहे हैं, जबकि 2.69 अरब लोग पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं। संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन के कारण यह चुनौती और गंभीर हो रही है। ऐसे में केवल अधिक भोजन पैदा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है।
खाद्य व्यवस्था को बेहतर बनाने में नवाचार की अहम भूमिका है। आज तकनीक की मदद से खेती, खाद्य पदार्थों के भंडारण, परिवहन और बाजार तक पहुंचने के तरीकों में बदलाव लाया जा सकता है। किसानों को डिजिटल माध्यम से मौसम, फसलों और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जा सकती है। बेहतर बीज, नई कृषि तकनीक और पानी व जमीन का सही इस्तेमाल भी उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
इसके साथ ही पारंपरिक खेती के अनुभवों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ना भी जरूरी है। किसान, मछुआरे, पशुपालक और वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय अपने अनुभवों से खाद्य व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने में योगदान दे सकते हैं। खासतौर पर महिलाओं और युवाओं की भागीदारी इस दिशा में नए अवसर पैदा कर सकती है।
भूख और कुपोषण से निपटना किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए सरकारों, निजी कंपनियों, किसानों, वैज्ञानिकों और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा।
सरकारें कृषि अनुसंधान में निवेश करके, ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाकर और किसानों के लिए बेहतर नीतियां बनाकर मदद कर सकती हैं। वहीं, निजी क्षेत्र खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और नए कारोबारी मॉडल विकसित करने में योगदान दे सकते हैं।
शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, ताकि नई तकनीकों और शोध को खेतों तक पहुंचाया जा सके। इससे किसानों को फायदा होगा और लोगों के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना आसान हो सकता है।
खाद्य सुरक्षा का मतलब सिर्फ इतना नहीं है कि लोगों को आज खाने के लिए भोजन मिल जाए। यह भी जरूरी है कि आने वाले वर्षों में खेती के लिए पर्याप्त पानी, उपजाऊ जमीन और दूसरे प्राकृतिक संसाधन सुरक्षित रहें। जलवायु संबंधी संकटों से निपटने की तैयारी और संसाधनों का जिम्मेदारी से इस्तेमाल खाद्य व्यवस्था को मजबूत बना सकता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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