इधर Rajnath Singh ने पाकिस्तान को चेताया, उधर Rajasthan BJP अध्यक्ष Madan Rathore बोले- हम Pakistan के साथ खड़े होंगे!
देश की सुरक्षा और पाकिस्तान के साथ रिश्तों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं के बयानों ने सियासी बहस को नया मोड़ दे दिया है। एक ओर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान से होने वाले किसी भी संभावित आतंकी हमले पर पहले से भी ज्यादा कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं, तो दूसरी ओर राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान ने विपक्ष को सत्तारुढ़ पार्टी पर हमला बोलने का मौका दे दिया है। हालांकि दोनों नेताओं के बयानों का संदर्भ अलग-अलग बताया जा रहा है, लेकिन लगभग एक ही समय पर सामने आए इन बयानों ने राजनीतिक विरोधाभास की स्थिति पैदा कर दी है।
हम आपको बता दें कि दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान से होने वाली किसी भी भविष्य की आतंकी कार्रवाई का जवाब और भी सख्ती से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति अब केवल कूटनीतिक विरोध और निंदा तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद के स्रोत पर प्रहार करने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। बालाकोट एयरस्ट्राइक, सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने इन्हें भारत की बदली हुई रणनीति का उदाहरण बताया।
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राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन उसकी इस इच्छा को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत संवाद, सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखता है, लेकिन देश की सुरक्षा को चुनौती देने वालों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका यह संदेश पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख को दोहराने वाला था।
लेकिन इसी बीच राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ के बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। मदन राठौड़ ने कहा था कि यदि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है, तो भारत पाकिस्तान के साथ खड़ा होगा, क्योंकि वह हमारा पड़ोसी देश है। यह बयान सामने आते ही कांग्रेस ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने इस टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि क्या वे भी मदन राठौड़ के विचारों से सहमत हैं? कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान को लेकर बीजेपी का रुख उसके बयानों से उजागर हो रहा है।
हालांकि विवाद बढ़ने के बाद मदन राठौड़ ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने दावा किया कि उनकी टिप्पणी भारत-पाकिस्तान के संबंध में नहीं, बल्कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच के संदर्भ में थी। राठौड़ ने इसे अनुचित तरीके से प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाया।
अब सवाल यह है कि आखिर राजनीतिक बयानबाजी में ऐसी नौबत आती ही क्यों है? राजनाथ सिंह का बयान जहां आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति को रेखांकित करता है, वहीं मदन राठौड़ के बयान ने बीजेपी को असहज स्थिति में डाल दिया। देखा जाये तो दोनों बयानों के संदर्भ अलग हो सकते हैं, लेकिन राजनीति में शब्दों का चयन और उनका समय बेहद मायने रखता है।
दरअसल, सार्वजनिक जीवन में नेताओं की जुबान केवल उनकी निजी राय नहीं होती, बल्कि उसे पार्टी की नीति और देश के राजनीतिक रुख से जोड़कर देखा जाता है। खासकर पाकिस्तान और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कही गई एक पंक्ति भी बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। ऐसे में नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे अपनी बात स्पष्ट, सटीक और संदर्भ सहित रखें।
यह अक्सर देखा जाता है कि राजनीति में विरोधियों को घेरने के लिए बयान अक्सर हथियार बनते हैं, लेकिन कभी-कभी यही हथियार अपने ही खेमे के लिए परेशानी खड़ी कर देते हैं। मदन राठौड़ के बयान पर उठा विवाद इसी सवाल को सामने लाता है कि क्या राजनीतिक नेता बोलने से पहले अपने शब्दों के संभावित अर्थ और परिणामों पर पर्याप्त विचार करते हैं? क्योंकि सफाई बाद में दी जा सकती है, लेकिन तब तक राजनीतिक नुकसान हो चुका होता है।
फिलहाल, राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को सख्त चेतावनी और मदन राठौड़ की विवादित टिप्पणी ने एक बार फिर दिखा दिया है कि राजनीति में केवल मंशा ही नहीं, बल्कि शब्दों की स्पष्टता भी उतनी ही अहम है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर एकजुट संदेश देने की जरूरत के बीच विरोधाभास का आभास पैदा करने वाले बयान विपक्ष को हमला करने का अवसर देते हैं और जनता के मन में भी सवाल खड़े करते हैं।
16 October: लॉर्ड कर्जन ने लागू किया था Bengal Partition, देशभर में गूंजा था वंदे मातरम
बंटवारे का दर्द सदा दुख देता है और साल के दसवें महीने का 16वां दिन बंगाल के बंटवारे की दुखदायी घटना से जुड़ा है। सोलह अक्टूबर 1905 को हुआ बंगाल का विभाजन राष्ट्र के इतिहास में एक मोड़ ले आया और इसका हर ओर भारी विरोध हुआ। इस दिन को विरोध दिवस के रूप में मनाया गया और ढेरों जुलूस निकाले गए तथा हर तरफ वन्दे मातरम के नारे गूंज उठे। दरअसल बंगाल का विभाजन जैसे पूरे देश को एक कर गया और स्कूल कॉलेज से लेकर नुक्कड़ चौराहों तक विरोध प्रदर्शन किए गए। इस दौरान विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार की आंधी ने अंग्रेज सरकार को हिलाकर रख दिया। बाद में इस फैसले को वापस लेने का निर्णय किया गया, लेकिन अंग्रेजों के खिलाफ विरोध की जो लहर उठी थी, वह और बलवती होती रही।
देश-दुनिया के इतिहास में 16 अक्टूबर की तारीख पर दर्ज महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:- 1788 : मराठों ने शाह आलम को दिल्ली की गद्दी पर बिठाया। 1905 : भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन के आदेश पर बंगाल का विभाजन। 1923 : वॉल्ट डिज्नी और उनके भाई रॉय डिज्नी ने द वॉल्ट डिज्नी कंपनी की स्थापना की। 1934 : चीन के कम्युनिस्टों ने दस हजार किलोमीटर की यात्रा शुरू की, जिससे कम्युनिस्ट क्रांति का आधार दक्षिण-पूर्व चीन से बदलकर उत्तर पश्चिम चीन हो गया और माओ त्से तुंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अविवादित नेता के रूप में उभरे। 1942 : बंगाल में आए प्रलयकारी तूफान में 40 हजार लोगों की मौत। 1951 : पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली की एक जनसभा के दौरान हत्या कर दी गई। 1964 : परमाणु स्पर्धा में शामिल होने को उत्सुक चीन ने अपने पहले परमाणु बम का सफल परीक्षण किया। 1978 : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने पाकिस्तान में फैसलाबाद टेस्ट से अपने क्रिकेट जीवन की शुरुआत की। 1991 : अमेरिका के टेक्सास राज्य के किलीन शहर में स्थित लुबी कैफेटेरिया में 35 वर्षीय जॉर्ज पियरे हेनार्ड नाम के व्यक्ति ने अपना ट्रक रेस्तरां में घुसा कर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हो गए। 1996 : ग्वाटेमाला की राजधानी ग्वाटेमाला सिटी में विश्व कप क्वालीफाइंग मैच (ग्वाटेमाला और कोस्टा रिका के बीच) से ठीक पहले स्टेडियम में क्षमता से अधिक दर्शकों के पहुँच जाने से मची भीषण भगदड़ में 84 लोगों की मौत हो गई थी और 180 से अधिक लोग घायल हो गए थे। 1997 : समाचार पत्र द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने मुख्य पृष्ठ पर पहली बार रंगीन तस्वीर छापी, जो उस समय मीडिया प्रकाशन में एक बड़ा बदलाव था। 2015 : इराक भर में सिलसिलेवार कार-बम धमाकों में 57 लोगों की मौत। 2021 : चीनी अंतरिक्ष यात्री रिकॉर्ड छह महीनों के लिए अंतरिक्ष केंद्र पहुंचे। इसी दिन इंडोनेशिया के पश्चिम जावा प्रांत में सिलियूर नदी की सफाई अभियान पर गए एक स्कूल के 11 छात्र डूब गए और 10 अन्य को बचा लिया गया। 2022 : भारतीय रेलवे में शामिल किया गया पहला स्वदेश निर्मित अल्युमीनियम मालवाहक रेक। बेस्को लिमिटेड वैगन डिवीजन और अल्युमीनियम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को के सहयोग से निर्मित वैगन का वजन घटाने के लिए इसका प्रति क्विंटल कार्बन फुटप्रिंट भी कम है। 2023 : इजराइल के जमीनी आक्रमण की आशंका के बीच गाजा पट्टी में 10 लाख लोग घर छोड़कर भागे। 2024 : नाइजीरिया में पेट्रोल टैंकर में विस्फोट से 200 से ज्यादा लोगों की मौत, कई अन्य घायल। 2025 : वर्ष 1953 के माउंट एवरेस्ट अभियान में विश्व की सबसे ऊंची चोटी ‘माउंट एवरेस्ट’ पर पहली बार विजय प्राप्त करने वाले पर्वतारोहण अभियान दल के एकमात्र जीवित सदस्य कांचा शेरपा का काठमांडू में 92 साल की उम्र में निधन।
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