कहीं आपके घर में भी तो नहीं टंगा पुराना कैलेंडर? वास्तु के अनुसार तुरंत करें ये बदलाव!
दिवाली पर घर की साफ-सफाई के दौरान पुराने कैलेंडर को हटाकर नया कैलेंडर लगाने की सलाह दी जाती है. अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित आरके शर्मा के अनुसार, वास्तु मान्यताओं में पूर्व और उत्तर दिशा को कैलेंडर लगाने के लिए शुभ माना जाता है. जानें कैलेंडर की तस्वीरों और सही दिशा से जुड़े वास्तु नियम.
उज्जैन में रावण दहन की परंपरा पर विवाद, महाकाल मंदिर के पुजारी ने आयोजन समितियों को थमाए नोटिस
धर्म नगरी उज्जैन में दशहरा पर्व से ठीक पहले रावण दहन को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश पुजारी ने रावण दहन की सालों पुरानी परंपरा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे पूरी तरह से बंद कराने का एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। उनका साफ कहना है कि धार्मिक ग्रंथों में रावण वध की बात तो लिखी है लेकिन दहन का कहीं कोई जिक्र नहीं है।
शास्त्रों का हवाला देकर रावण दहन की परंपरा का विरोध
पुजारी का दावा है कि वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस में रावण वध का तो पूरा वर्णन मिलता है लेकिन रावण का पुतला फूंकने का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि रावण एक प्रकांड विद्वान, महाज्ञानी और ब्राह्मण था, जिसका खुद भगवान श्रीराम भी सम्मान करते थे। उनका मानना है कि धार्मिक कथाओं को केवल मनोरंजन या सार्वजनिक तमाशे का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
नोटिस का इंतजार
पुजारी ने बताया कि उन्होंने जिन चार संस्थाओं को कानूनी नोटिस भेजे हैं फिलहाल वे उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं। अगर आयोजक शास्त्रों से रावण दहन का कोई ठोस प्रमाण पेश कर देते हैं, तो वह अपना विरोध तुरंत वापस ले लेंगे। लेकिन अगर वे कोई सबूत नहीं दे पाते हैं, तो इस परंपरा को हमेशा के लिए बंद किया जाना चाहिए। उनका मकसद विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना है।
शहर भर में पोस्टर लगाकर लोगों को किया जा रहा जागरूक
अपने इस अनोखे अभियान को घर-घर तक पहुंचाने के लिए महेश पुजारी ने उज्जैन शहर में जगह-जगह बड़े-बड़े पोस्टर भी लगवाए हैं। इन पोस्टरों के जरिए वे आम लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे रावण दहन की धार्मिक सच्चाई पर विचार करें। उनका कहना है कि वे सनातन परंपरा और शास्त्रों के अनुसार आचरण करने के पक्ष में हैं और यह लड़ाई किसी संस्था के खिलाफ न होकर धार्मिक जागरूकता के लिए है।
पिछले साल फोड़ी थीं मटकियां
महेश पुजारी ने याद दिलाया कि उन्होंने पिछले साल भी रावण दहन के विरोध में मटकियां फोड़कर अनोखा प्रदर्शन किया था। उनका दावा है कि इस बार उनके इस अभियान को देश के 15 से 20 राज्यों से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। राजपूत, दलित, धोबी और महाराष्ट्र के आदिवासी समाज के कई संगठनों ने उन्हें समर्थन पत्र भेजे हैं। हालांकि, इन सामाजिक पत्रों और दावों की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
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