Prime Minister Narendra Modi पर टिप्पणी करने वाली लड़की का Noida घर छोड़ा
नोएडा (उप्र), चार अगस्त दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने वाली 15 वर्षीय लड़की का परिवार मंगलवार को नोएडा स्थित अपने घर पर नहीं मिला। वहीं, स्थानीय पुलिस का कहना है कि उन्हें परिवार को परेशान किए जाने की कोई शिकायत नहीं मिली है। सेक्टर-168 में मौजूद हाउसिंग सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड और रखरखाव कर्मियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वायरल वीडियो में नजर आई लड़की और उसकी मां घर पर नहीं हैं।
एक सुरक्षा गार्ड ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘वीडियो सामने आने के बाद से ही परिवार ने लोगों से मिलना-जुलना कम कर दिया था और दिल्ली व नोएडा पुलिस के अधिकारी कुछ मौकों पर उनके घर आए थे।’’ हालांकि, हाउसिंग सोसाइटी के कर्मियों ने कहा कि उन्हें परिवार के मौजूदा ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। परिवार के उत्पीड़न के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए नोएडा के एक्सप्रेसवे पुलिस थाने के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि हाउसिंग सोसाइटी के अंदर या कहीं और परिवार को परेशान किए जाने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है। अधिकारी ने कहा कि नोएडा पुलिस ने लड़की के खिलाफ शिकायत मिलने के दिन ही शून्य प्राथमिकी दर्ज की थी और इसे दिल्ली पुलिस को भेज दिया था, क्योंकि कथित घटना राष्ट्रीय राजधानी में हुई थी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘तब से परिवार हमारे संपर्क में नहीं है और न ही उन्होंने स्थानीय पुलिस के साथ कोई जानकारी या शिकायत साझा की है।’’ उन्होंने कहा कि हो सकता है कि परिवार अस्थायी रूप से पड़ोसी राज्य हरियाणा के फरीदाबाद में चला गया हो। यह घटनाक्रम लड़की की मां द्वारा प्रधानमंत्री मोदी से अपनी बेटी को माफ करने की अपील करने के कुछ दिनों बाद सामने आया है। मां ने कहा था कि परिवार ने कई बार माफी मांगी है और नाबालिग लड़की विरोध प्रदर्शन के दौरान बहकावे में आ गई थी।
एक अगस्त को ‘पीटीआई-वीडियो’ के साथ बातचीत में मां ने कहा था कि घटना के बाद लड़की को सार्वजनिक रूप से माफ करने के लिए वह प्रधानमंत्री की आभारी हैं।
DVAC ने भ्रष्टाचार के मामलों में 24 सरकारी अधिकारियों को किया गिरफ्तार
चेन्नई, चार अगस्त सतर्कता और भ्रष्टाचार विरोधी निदेशालय (डीवीएसी) ने जुलाई माह में पूरे राज्य में चलाए गए एक विशेष अभियान के दौरान 24 सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया। इस दौरान 1.3 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाबी नकदी और संदिग्ध डिजिटल लेन-देन का खुलासा हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी ने एक जुलाई से 31 जुलाई के बीच सरकारी कामकाज करने के एवज में 500 रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक की रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोप में अधिकारियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के एक संयुक्त आयुक्त, एक तहसीलदार, एक सहायक अभियंता (विद्युत), एक ग्राम प्रशासनिक अधिकारी (वीएओ) और पुलिस, राजस्व व स्थानीय प्रशासन विभागों के विभिन्न अधिकारी शामिल हैं। डीवीएसी ने जिला निरीक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारियों के साथ मिलकर कृष्णागिरी, तिरुवल्लुर, थेनी, कन्याकुमारी, डिंडीगुल, तंजावुर, रानीपेट, चेन्नई और करूर के 13 सरकारी कार्यालयों में अचानक छापेमारी की और 13,39,080 रुपये की बेहिसाबी नकदी जब्त की।
इसी तरह राज्य की सीमाओं पर स्थित छह वाहन जांच चौकियों पर एक साथ की गई जांच में 9,87,890 रुपये की अतिरिक्त नकदी बरामद हुई। गत 17 जुलाई को राज्य भर के तहसील कार्यालयों में चलाए गए एक बड़े तलाशी अभियान के दौरान 13,88,750 रुपये की नकदी जब्त की गई। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने ऑनलाइन भुगतान माध्यम ‘जी-पे’ के जरिए किए गए 94,69,887 रुपये के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन को भी चिन्हित किया।
इस तरह केवल एक ही दिन में कुल 1,08,58,637 रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला। न्यायिक मोर्चे पर, विशेष अदालतों ने जुलाई के दौरान भ्रष्टाचार के चार मामलों में पांच व्यक्तियों को दोषी ठहराया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मामलों के लिए गठित विशेष अदालतों के साथ-साथ तिरुवल्लुर और रानीपेट की सत्र अदालतों ने एक तहसीलदार, तहसीलदार के चालक, एक प्रधानाध्यापिका और एक पुलिस उप-निरीक्षक को दो से चार साल तक के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
अदालतों ने उन पर 1,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना भी लगाया।
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