ICC इवेंट में गर्लफ्रेंड को साथ ले जाना है मना? आइए जान लेते हैं क्या कहता है BCCI का नियम
IND VS PAK: टी-20 विश्व कप 2026 में 15 फरवरी को पाकिस्तान के साथ खेले जाने वाले मैच के लिए टीम इंडिया कोलंबो पहुंच चुकी है. 13 फरवरी को कोलंबो पहुंची टीम इंडिया का धूम धाम से स्वागत हुआ, जिसे टीम ने इंज्वॉय भी किया. इसी बीच टीम इंडिया का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि हार्दिक पांड्या अपनी गर्लफ्रेंड महिका शर्मा के साथ दिखे, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है? बीसीसीआई के नियमों के खिलाफ क्या हार्दिक, महिका को लेकर पहुंचे? या फिर उन्होंने बोर्ड से कोई स्पेशल परमिशन ली है?
गर्लफ्रेंड महिका शर्मा के साथ दिखे हार्दिक पांड्या
टीम इंडिया जब कोलंबो पहुंची, तब जहां भारत के बाकी खिलाड़ी जहां बिना कपल के नजर आए. वहीं, हार्दिक पांड्या अपनी गर्लफ्रेंड महिका शर्मा के साथ दिखे. ये कपल बाकियों के साथ-साथ ही एयरपोर्ट से बाहर निकला. वीडियो को देखकर यूजर्स का ऐसा कहना है कि महिका हार्दिक के साथ ही कोलंबो लैंड हुई हैं. हालांकि, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा संभव कैसे हुआ?
???? BCCI is giving special treatment to Hardik Pandya.
— Sonu (@Cricket_live247) February 14, 2026
He is the only player travelling with his girlfriend, while other players are seen without their wives or girlfriends. BCCI has given him special permission.
Hardik Pandya is the MVP of the Indian cricket team for a… pic.twitter.com/QctYDuPFFE
क्या है BCCI का नियम?
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का सख्त नियम है कि आईसीसी इवेंट में कोई भी खिलाड़ी अपनी फैमिली के साथ नहीं जाएगा, हां परिवार के सदस्य सपोर्ट करने के लिए पहुंच जरूर सकते हैं. मगर, साथ ट्रैवल नहीं कर सकते. ऐसे में महिका शर्मा का हार्दिक के साथ एयरपोर्ट पर और फिर होटल में दिखना सोशल मीडिया पर यूजर्स को हजम नहीं हो रहा है और वह सवाल उठाते दिख रहे हैं.
45 दिन से ज्यादा टूर पर परिवार सिर्फ 14 दिन साथ रह सकता है
वर्ल्ड कप में भी यही नियम लागू
परिवार टीम होटल में नहीं रुक सकता
टीम के साथ ट्रैवल की अनुमति नहीं
मअलग से रहने की व्यवस्था खिलाड़ी खुद कर सकते हैं
क्या हार्दिक ने ली है स्पेशल परमिशन?
Hardik Pandya travel with his girlfriend mahika Sharma pic.twitter.com/0EqXcT6n6k
— Kishan Singh (@KishanS72375994) February 14, 2026
सोशल मीडिया पर चल रही रिपोर्ट्स की मानें, तो टीम इंडिया के कई खिलाड़ियों ने अपनी पार्टनर्स को कोलंबो साथ ले जाने की बीसीसीआई से अपील की थी. मगर, बोर्ड ने इस अपील को अस्वीकार कर दिया. ऐसे में अब ये बात सामने आ रही है कि हार्दिक ने बोर्ड से अपनी गर्लफ्रेंड को ले जाने के लिए स्पेशल परमिशन ली है. हालांकि, इसपर कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है.
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बांग्लादेश में लोकतंत्र के लिए अच्छा दिन है लेकिन नए सवाल भी खड़े हुए हैं: लिसा कर्टिस
वॉशिंगटन, 14 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने भारी मतों के साथ जीत हासिल की है। चुनाव को लेकर व्हाइट हाउस की पूर्व दक्षिण एशियाई अधिकारी लिसा कर्टिस का बयान सामने आया है। लिसा ने नतीजों को बांग्लादेशी लोकतंत्र के लिए एक अच्छा दिन बताते हुए कहा कि बांग्लादेश के चुनावों का ज्यादातर शांतिपूर्ण होना उम्मीद जगाता है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जमात-ए-इस्लामी का बढ़ना और गहरी संस्थागत क्षति आगे बहुत सारे सवाल छोड़ गई है।
कर्टिस ने आईएएनएस को दिए खास इंटरव्यू में कहा, “मुझे लगता है कि आज बांग्लादेशी लोकतंत्र के लिए अच्छा दिन है।” चुनाव के नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की शानदार जीत और जमात-ए-इस्लामी की मजबूत बढ़त दिखी।
उन्होंने कहा, “चुनाव के दिन बहुत हिंसा होने की आशंका के बावजूद, ऐसा लगता है कि चुनाव बिना किसी बड़ी हिंसा के हुए।”
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के 70 फीसदी लोगों ने डेमोक्रेटिक संस्थाओं में सुधार के लिए रेफरेंडम के पक्ष में भी वोट दिया, जिसमें प्रधानमंत्री पर टर्म लिमिट तय करना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना शामिल है। उन्होंने इन्हें बहुत सकारात्मक डेवलपमेंट बताया। साथ ही, कर्टिस ने बताया कि वोटर टर्नआउट सामान्य से थोड़ा कम था।
बता दें, बांग्लादेश में हुए चुनाव में लगभग 60 फीसदी वोटिंग हुई। उन्होंने इसका कारण अवामी लीग को इस चुनाव का हिस्सा बनने से रोके जाने को बताया। लिसा ने कहा कि इसी कीमत पर आपको कम वोटर टर्नआउट मिला क्योंकि अवामी लीग के कई वोटर घर पर ही रहे।
उन्होंने कहा, “पिछले चुनावों में, जमात-ए-इस्लामी को पारंपरिक रूप से केवल 5 से 7 फीसदी वोट मिलते थे। इस बार, ऐसा लगता है कि उन्होंने विधानसभा में शायद 68 से ज्यादा सीटें जीती हैं। इसलिए यह बांग्लादेश के लिए एक बड़ा बदलाव है।”
कर्टिस ने जमात-ए-इस्लामी के लिए आगे की चुनौतियों को लेकर कहा कि बड़ा सवाल यह है कि वे एक विपक्षी पार्टी के तौर पर कैसे काम करेंगे? उन्होंने कहा कि पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान युवा वोटरों को आकर्षित करने की बहुत कोशिश की, लेकिन यह पुरानी पीढ़ी के नेताओं के नियंत्रण में है, जिसका मतलब है कि उनकी नीतियां कंजर्वेटिव ही रहने की संभावना है।
लिसा कार्टिस ने पूछा, “तो मुझे लगता है कि यह बड़ा सवाल है। जमात-ए-इस्लामी समाज और देश के शासन के तरीके पर कैसे असर डालेगी?” बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान को लेकर कर्टिस ने कहा, “मुझे लगता है कि उनके सामने एक बड़ा काम है। उनके बारे में और भ्रष्टाचार के पिछले आरोपों के बारे में बहुत संदेह रहा है। वह 17 साल से देश से बाहर हैं।”
बातचीत के दौरान लिसा ने संस्थाओं को ठीक करने की तुरंत जरूरत पर जोर दिया और कहा, “उन्हें शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का भरोसा वापस लाने के लिए बहुत कुछ करना होगा। शेख हसीना सरकार ने उन संस्थाओं को बहुत नुकसान पहुंचाया है।”
उन्होंने कहा, अब सबकी नजरें उन पर हैं कि वह इन चुनौतियों से कैसे निपटेंगे और देश को कैसे आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने इस पल को उम्मीद का दिन बताया, लेकिन साथ ही, बांग्लादेश के सामने चुनौतियां भी बहुत बड़ी हैं।
बांग्लादेश के चुनाव को लेकर वॉशिंगटन की प्रतिक्रिया पर कर्टिस ने कहा कि अमेरिका शायद चुनावों के काफी शांति से होने का स्वागत करेगा। अमेरिका शायद खुश है कि चुनाव ठीक माहौल में सम्पन्न हुए।
उन्होंने आगे कहा कि जब अंतरिम सरकार देश को इस बहुत मुश्किल समय से निकालने की कोशिश कर रही थी, तब अमेरिका ने अंतरिम सरकार का समर्थन करके बहुत मदद की और अमेरिकी पॉलिसी सर्कल में राहत की भावना है कि चुनाव काफी हद तक हिंसा से मुक्त हुए हैं।
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जमात-ए-इस्लामी की मजबूत स्थिति मामलों को और मुश्किल बना सकती है। जमात-ए-इस्लामी को मिली इस नई ताकत पर सवाल उठेंगे। उनकी नीतियां अमेरिका की हर उस चीज के उलटी रही हैं, जिसके लिए वे खड़े हैं, खासकर महिलाओं के मामले में।
कर्टिस ने कहा कि अमेरिका शायद इंतजार करो और देखो वाला नजरिया अपनाएगा ताकि यह देखा जा सके कि बीएनपी की सरकार जमात-ए-इस्लामी से कैसे निपटती है। डेमोक्रेसी के लिए अच्छा दिन है, लेकिन बहुत सारे सवाल अभी भी बाकी हैं।
चुनाव को लेकर भारत के जवाब पर, कर्टिस ने कहा कि नई दिल्ली ने शुरू में बदलते राजनीतिक माहौल को गलत समझा। उन्होंने कहा, “बेशक, नई दिल्ली ने पूरी तरह हसीना पर दांव लगाया था और उनके सत्ता से जाने से वह असंतुष्ट थी।”
उन्होंने कहा कि “भारत को यह थोड़ी देर से समझ आया कि देश कहां जा रहा है और शेख हसीना ने देश को कितना नुकसान पहुंचाया है और उनका कितना विरोध हो रहा है।”
हालांकि, हाल के महीनों में उन्होंने भारत की तरफ से बदलाव देखा है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ महीनों में, मुझे लगता है कि हमने नई दिल्ली और बीएनपी के प्रति उसके नजरिए में बदलाव देखा है।” उन्होंने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के पूर्व पीएम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने और नए नेतृत्व के साथ मीटिंग को आउटरीच का सबूत बताया।
कर्टिस ने कहा, “हालांकि मुझे लगता है कि नई दिल्ली थोड़ी देर से आई है, देर आए दुरुस्त आए, लेकिन उन्होंने यह पहचान लिया है कि बांग्लादेश में एक नई व्यवस्था है।” उन्होंने आगे कहा कि बांग्लादेश और भारत कई तरह से आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे जुड़ाव जरूरी हो जाता है। भारत के लिए बांग्लादेश के साथ डील न करना नामुमकिन होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में संबंध सुधर जाएंगे।
कर्टिस अभी सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी में सीनियर फेलो और इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी प्रोग्राम की डायरेक्टर के तौर पर काम कर रही हैं। इससे पहले वह 2017 से 2021 तक अमेरिकी राष्ट्रपति की डिप्टी असिस्टेंट और साउथ और सेंट्रल एशिया के लिए नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की सीनियर डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने इंडो-पैसिफिक और साउथ एशिया पर अमेरिकी पॉलिसी को कोऑर्डिनेट किया, जिसमें अमेरिका-भारत रणनीतिक सहयोग और क्वाड फ्रेमवर्क शामिल हैं।
--आईएएनएस
केके/एएस
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