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शनि प्रदोष व्रत 2026: साढ़ेसाती-ढैय्या से मुक्ति के लिए करें ये 5 Astro Upay, मिलेगी Shani Dev की कृपा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनि देव को न्याय का देवता माना गया है। भगवान शिव शनि देव के गुरु है। जब त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन आती है, तो इसे 'शनि प्रदोष व्रत' कहा जाता है। यह दिन उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्टों से जूझ रहे हैं। इस बार फरवरी में शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी यानी के आज मनाया जा रहा है, जो महाशिवरात्रि से ठीक एक दिन पहले होने के कारण से और भी प्रभावशाली माना जा रहा है। 

शनि प्रदोष का महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) के बाद महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस समय कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है और सिंह व धनु राशि पर ढैय्या का प्रभाव है। इस शनिवार और त्रयोदशी का यह मेल शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करने का सबसे उत्तम समय माना गया है।

साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट दूर करने के उपाय 

पीपल के नीचे दीपदान

शनिवार को शाम के समय पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाना और सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु, महेश तथा शनि देव का निवास होता है, इसलिए इस दिन इसकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

शनि मंत्रों का जाप

इस दिन ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से मन को शांति मिलती है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और रुके हुए कामों में धीरे-धीरे प्रगति होने लगती है।

छाया दान की विधि

आप कांसे या स्टील की एक छोटी कटोरी में सरसों का तेल भरें और उसमें अपना चेहरा देखें। इसके बाद उस तेल को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें या शनि मंदिर में अर्पित कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से कष्ट कम होते हैं और शनि की कृपा प्राप्त होती है।

हनुमान चालीसा का पाठ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शनि देव ने हनुमान जी से वादा किया था कि जो भक्त हनुमान जी की सच्चे मन से आराधना करेगा, उसे शनि की बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। यही कारण है कि शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है।

दान का विशेष फल

इस दिन आप काले कपड़े, काली उड़द दाल, कंबल, छाता या जूतों का दान करने से राहु-केतु और शनि के दोष शांत होते हैं। इस दिन गरीब और असहाय लोगों की मदद करना शनि देव को सबसे अधिक प्रिय माना जाता है। 

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पूर्वोत्तर में सामरिक क्रांति: मोरन बाईपास पर उतरा पीएम मोदी का विमान, जानें क्या है यह 'इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी' (ELF)

डिब्रूगढ : भारत ने अपनी सैन्य और नागरिक बुनियादी ढांचे की ताकत का अद्भुत समन्वय पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-127 (NH-127) के मोरन बाईपास पर निर्मित देश की नवीनतम इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) का उद्घाटन किया।

उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी वायुसेना के C-130J सुपर हर्कुलिस परिवहन विमान से इसी स्ट्रिप पर उतरे, जो पूर्वोत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।

​क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)?

​आसान शब्दों में कहें तो यह नेशनल हाईवे का एक ऐसा हिस्सा है, जिसे इस तरह से डिजाइन और मजबूत किया जाता है कि संकट के समय इसे हवाई पट्टी के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

मजबूत बनावट: इन स्ट्रिप्स को बनाने के लिए कंक्रीट और कोलतार की कई विशेष परतों का उपयोग किया जाता है ताकि यह लड़ाकू विमानों की लैंडिंग का भारी दबाव सह सकें।

दोहरा उपयोग: सामान्य दिनों में यहां गाड़िया चलती हैं, लेकिन युद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय ट्रैफिक रोककर इसे वायुसेना को सौंप दिया जाता है।

सामरिक महत्व: चीन सीमा के करीब होने के कारण, यदि मुख्य एयरबेस पर हमला होता है, तो ये हाईवे स्ट्रिप्स हमारे लड़ाकू विमानों को सुरक्षित लैंडिंग और उड़ान भरने की सुविधा प्रदान करती हैं।

​मोरन ELF की खासियतें

लंबाई और स्थान: यह पट्टी 4.2 किलोमीटर लंबी है, जो मोरन बाईपास पर स्थित है।

परमाणु और भारी विमानों की क्षमता: यह स्ट्रिप C-130J जैसे भारी परिवहन विमानों के साथ-साथ सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को उतारने में पूरी तरह सक्षम है।

विशेष सुरक्षा: इस क्षेत्र में फेंसिंग और एप्रोच रोड बनाई गई हैं ताकि विमानों के संचालन में कोई बाधा न आए।

​वायुसेना का शौर्य: सुखोई और तेजस का प्रदर्शन

​प्रधानमंत्री की लैंडिंग से पहले, भारतीय वायुसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। सुखोई-30 MKI ने इस हाईवे स्ट्रिप पर टच-डाउन किया और फिर गर्जना के साथ आसमान की ओर उड़ान भरी।

​तेजस और राफेल ने फ्लाईपास्ट के जरिए अपनी मारक क्षमता का परिचय दिया।

​इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया कि असम और पूर्वोत्तर का यह इलाका अब किसी भी हवाई चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

​प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा का मजबूत कवच है। उन्होंने असम के लिए 5,500 करोड़ रुपये की अन्य विकास परियोजनाओं का भी जिक्र किया, जो राज्य में कनेक्टिविटी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।

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