पाकिस्तानी PIO जासूसी मामले में Andhra Police ने दो और आरोपियों को पकड़ा
पाकिस्तान की खुफिया एजेंट (पीआईओ) से जुड़े कथित जासूसी की साजिश के मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान बोंगू रवि और कादरी श्रीनिवास के रूप में हुई है।
एक खुफिया अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘आंध्र प्रदेश पुलिस के खुफिया रोधी प्रकोष्ठ ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंट (पीआईओ) से जुड़े जासूसी मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या चार हो गई है।’’ जांच में पता चला कि ‘एंजेल पायल’ नाम का इस्तेमाल करने वाली एक अज्ञात महिला ने 2023 में फेसबुक के जरिए रवि से संपर्क किया था। रवि विशाखापत्तनम स्थित नौसेना डॉकयार्ड में एक इंजीनियरिंग कंपनी में काम करता है।
महिला ने दावा किया था कि वह दुबई की एक शिपिंग कंपनी में काम करती है। अधिकारी के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर रवि को पैसे के बदले नौसेना डॉकयार्ड में मौजूद जहाजों और पनडुब्बियों के बारे में जानकारी साझा करने के लिए उकसाया। रवि और उसके सहकर्मी श्रीनिवास ने कथित तौर पर मिलीभगत करके प्रतिबंधित रक्षा प्रतिष्ठान में मौजूद जहाजों और पनडुब्बियों की संख्या से जुड़ी जानकारी महिला के साथ साझा की।
जांच में यह भी सामने आया कि रवि को महिला से उसके बैंक खाते में पैसे मिले और उसने बाद में उनमें से कुछ रकम श्रीनिवास को दी। इस मामले में 12 अक्टूबर, 2025 को विशाखापत्तनम के मालकापुरम पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता और सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। रवि को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था, जबकि 11 अक्टूबर, 2025 को सऊदी अरब गए श्रीनिवास के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
उत्तराखंड High Court ने परिवार के 3 लोगों की हत्या के दोषी की फांसी की सजा पलटी
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अधीनस्थ अदालत द्वारा एक तिहरे हत्याकांड में अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से बेरहमी से हत्या करने के दोषी ठहराए गए व्यक्ति की मौत की सजा को बृहस्पतिवार को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। इससे पहले, अदालत ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दोषी की मानसिक बीमारी का उचित इलाज कराया जाए और उसके ठीक होने पर उसे रिहा कर दिया जाए। सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से दोषी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करने और यह पता लगाने को कहा कि क्या घटना के समय वह किसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित था। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या मौत की सजा सुनाते समय उसकी मानसिक स्थिति से जुड़े किसी अहम तथ्य को नजरअंदाज कर दिया गया था।
टिहरी जिले के गुमल गांव के रहने वाले संजय सिंह ने 13 दिसंबर 2014 को एक मामूली विवाद के बाद, तलवार से अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या कर दी थी। उसके पिता राम सिंह पंवार ने इस घटना के संबंध में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अगस्त 2021 में, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडे की अदालत ने संजय सिंह को दोषी ठहराते हुए उसे मौत की सजा सुनाई।
इसके बाद सिंह ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने दोषी का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ वकील अरविंद वशिष्ठ को न्याय मित्र नियुक्त किया। वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि मौत की सजा पाए दोषी को एक मानसिक बीमारी है।
एक मेडिकल बोर्ड ने भी उसे मानसिक रूप से बीमार पाया और कहा कि वह अपने कार्यों के परिणामों को समझने में असमर्थ है। हांलांकि, बोर्ड ने यह भी कहा कि उसकी बीमारी का इलाज संभव है और सही इलाज मिलने पर वह ठीक हो सकता है। सिंह की ओर से दलील दी गयी कि अधीनस्थ अदालत ने मौत की सजा सुनाते समय इस महत्वपूर्ण पहलू को नजरअंदाज कर दिया था।
इससे पहले, उच्च न्यायालय ने मामले को पुनर्विचार के लिए अधीनस्थ अदालत के पास वापस भेजा था, ताकि मौत की सजा की पुष्टि करने से पहले दोषी की शारीरिक और मानसिक स्थिति की जांच की जा सके। पुनर्विचार के बाद, अधीनस्थ अदालत ने कहा कि यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि घटना के समय दोषी किसी ऐसी बीमारी से पीड़ित था, जिसके प्रभाव में आकर उसने यह अपराध किया हो। अधीनस्थ अदालत ने यह भी कहा था कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार मामले पर फिर से सुनवाई की गई है और सभी संबंधित तथ्यों पर विचार करने के बाद अपने पिछले आदेश में बदलाव करने का कोई आधार नहीं बनता है।
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