'मैकाले की शिक्षा नीति के बंधनों से मुक्त होने की जरूरत', बाबा रामदेव इस मुद्दे पर बच्चों और अभिभावकों करेंगे संवाद
योगऋषि स्वामी रामदेव महाराज 14 फरवरी शनिवार को हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों की सभा को संबोधित करेंगे. वे मूल्य आधारित शिक्षा प्रणाली अपनाने और लॉर्ड मैकाले की 1835 की शिक्षा नीति के बंधनों से मुक्त होने की जरूरतों पर बल देंगे. युवाओं को भंवरजाल और दिवास्वप्न की दुनिया से बाहर निकालकर भारतीयता के बोध के साथ दुनिया का नेतृत्व करने की शिक्षा और विधि से अवगत कराएंगे.
मानसिकता से बाहर निकालना जरूरी
उनका कहना है कि यह सब हमारी आने वाली पीढ़ियों को मुगल और ब्रिटिश साम्राज्य की गुलामी वाली मानसिकता से बाहर निकालना जरूरी है. इस प्रकार, सच्ची शैक्षिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने ओर विश्व गुरु भारत तथा एक विकसित देश का निर्माण करने के लक्ष्य को प्राप्त करना होगा.
लाइव प्रसारण भी किया जाएगा
इस दौरा एन. पी. सिंह (सेवानिवृत्त आईएएस), कार्यकारी अध्यक्ष, भारतीय शिक्षा बोर्ड एक अहम विषय पर प्रस्तावना भाषण देंगे. कार्यक्रम दोपहर 1:30 बजे से शुरू होगा. स्वामी रामदेव दोपहर 3:30 बजे अपना भाषण देंगे. इस कार्यक्रम का आयोजन यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सूरजमल विहार, दिल्ली में होगा. लोगों को एंट्री इसके 4 नंबर गेट से होगी. इसका लाइव प्रसारण भी किया जाएगा. इसके लिए खास व्यवस्था की गई है. मल्टीकैम लाइव प्रसारण एएनआई और स्वामी रामदेव महाराज के फेसबुक हैंडल पर शेयर किया जाएगा.
एआरसी के बिना एयरबस उड़ाने पर डीजीसीए ने एयर इंडिया पर एक करोड़ रुपए का लगाया जुर्माना
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयर इंडिया पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। डीजीसीए ने यह कार्रवाई इसलिए की क्योंकि एयर इंडिया ने एक एयरबस ए320 विमान को वैध उड़ान योग्यता प्रमाणपत्र (एयरवर्थिनेस परमिट) के बिना आठ बार उड़ाया। विमानन नियामक ने इस उल्लंघन को गंभीर बताया और इस सुरक्षा चूक के लिए कंपनी के शीर्ष प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है।
डीजीसीए के जुर्माना आदेश में कहा गया है कि एयरबस ए320 विमान को पिछले साल 24 और 25 नवंबर के बीच नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद के बीच कई उड़ानों में बिना अनिवार्य एयरवर्थिनेस रिव्यू सर्टिफिकेट के उड़ाया गया।
एआरसी एक महत्वपूर्ण वार्षिक प्रमाणपत्र होता है, जिसे विमानन नियामक तब जारी करता है जब विमान तय सुरक्षा और नियमों की जांच में सफल होता है। इसके बिना उड़ान भरना विमानन सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, डीजीसीए ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एयरलाइन के लापरवाह रवैये पर आपत्ति जताई।
डीजीसीए के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए एयर इंडिया के प्रवक्ता ने बयान में कहा, “एयर इंडिया डीजीसीए के आदेश की प्राप्ति की पुष्टि करती है, जो 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट की गई एक घटना से संबंधित है। पहचानी गई सभी कमियों को संतोषजनक रूप से दूर कर लिया गया है और इसकी जानकारी प्राधिकरण को दे दी गई है। एयर इंडिया परिचालन की विश्वसनीयता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”
पिछले साल जून में अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद एयर इंडिया कठिन दौर से गुजर रही है। निजीकरण प्रक्रिया के तहत सरकार से अधिग्रहण के बाद कंपनी अपेक्षित गति से वित्तीय सुधार नहीं कर पाई है।
रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया अपने मौजूदा प्रमुख कैंपबेल विल्सन की जगह नए सीईओ की तलाश कर रही है। विल्सन का अनुबंध 2027 के मध्य में समाप्त हो रहा है और बताया जा रहा है कि वे आगे कार्य जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव आपसी सहमति से हो सकता है।
बताया जा रहा है कि टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बड़े एयरलाइंस संचालन का अनुभव रखने वाले संभावित सीईओ उम्मीदवारों से प्रारंभिक बातचीत भी की है।
प्रबंधन में बदलाव की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि एयर इंडिया 31 मार्च तक ब्रेक-ईवन का लक्ष्य हासिल करने से चूक सकती है। जून 2025 में अहमदाबाद में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर दुर्घटना ने कंपनी और उसके पुनरुद्धार योजना को बड़ा झटका दिया।
इसके अलावा, पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने से उड़ान मार्ग लंबे हो गए हैं और परिचालन लागत बढ़ गई है, जिसका असर एयर इंडिया के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ा है।
--आईएएनएस
एएमटी/डीकेपी
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