CMRL रिश्वत मामले में केरलम सरकार ने कानून के तहत की कार्रवाई, VD Satheesan बोले नहीं की कोई जल्दबाजी
केरलम के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने बृहस्पतिवार को कहा कि कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके परिजनों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोधी कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से पत्र मिलने पर राज्य सरकार ने कोई जल्दबाजी नहीं की। सतीशन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला, मंत्रिमंडल के अन्य वरिष्ठ सदस्यों और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के नेताओं के साथ चर्चा की थी। इसके बाद सामूहिक रूप से मामले में आगे की कार्रवाई के संबंध में कानूनी राय लेने का फैसला किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा, हमने कोई जल्दबाजी नहीं की, क्योंकि यह सरकार किसी से बदला लेने या राजनीतिक प्रतिशोध लेने के लिए अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करेगी। हमने कानूनी सलाह ली और उसके अनुसार प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों की प्रारंभिक जांच शुरू करने के लिए कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि जब केरल उच्च न्यायालय ने कहा कि प्रारंभिक जांच की आवश्यकता नहीं है और प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया, तो सरकार ने उस आदेश को लागू किया।
उन्होंने जोर देकर कहा, इस प्रकार हमने कानून के अनुसार काम किया। मुख्यमंत्री से उच्च न्यायालय के उस आदेश के बारे में सवाल किया गया था, जिसमें अदालत ने सुबह विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके पति पी. ए. मोहम्मद रियास की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने नौ अक्टूबर के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी। एकल न्यायाधीश ने कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में ईडी की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।
इससे पहले दिन में उच्च न्यायालय के फैसले का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शोन जॉर्ज और कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन ने स्वागत किया। दूसरी ओर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने दावा किया कि विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और उनके पति रियास के खिलाफ मामला झूठा और राजनीति से प्रेरित है। पार्टी ने इसे भाजपा और यूडीएफ की ओर से उन्हें तथा वामपंथी दल को निशाना बनाने के लिए उठाया गया “सुनियोजित कदम” बताया।
इस बीच, राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश सरकार के लिए झटका नहीं है, क्योंकि सरकार ने कानून के अनुसार काम किया है, न कि किसी राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से। जॉर्ज ने संवाददाताओं से कहा कि यदि पूर्व मुख्यमंत्री में “थोड़ी भी शर्म बची है” तो उन्हें राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य सरकार विजयन की इससे अधिक मदद नहीं कर सकती, जितनी वह पहले ही कर चुकी है।
यह स्थिति तब से है जब से उसे प्रवर्तन निदेशालय से एक पत्र मिला था, जिसमें मार्क्सवादी नेता और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार-रोधी कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज करने को कहा गया था। उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, भारत में आप भाग सकते हैं, लेकिन यदि आप भ्रष्ट राजनेता हैं तो छिप नहीं सकते। उच्च न्यायालय का आज का फैसला निर्णायक और स्पष्ट है।
पिनराई विजयन को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। माकपा के प्रदेश सचिव एम. वी. गोविंदन ने संवाददाताओं से कहा कि फैसले की समीक्षा करने के बाद इस मामले से राजनीतिक और कानूनी, दोनों स्तरों पर प्रभावी ढंग से निपटा जाएगा। विजयन और उनके रिश्तेदारों को झटका देते हुए केरल उच्च न्यायालय ने कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की उनकी याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति के. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की पीठ ने एकल न्यायाधीश के नौ अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के आवेदन को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने से पहले आरोपी को सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि अर्जियां खारिज होने के कारण उनकी अपील भी स्वतः खारिज हो जाती हैं। अदालत ने यह भी कहा कि नौ अक्टूबर के आदेश से प्राथमिकी दर्ज किए जाने के खिलाफ संवैधानिक और वैधानिक उपाय अपनाने के आवेदकों के अधिकार प्रभावित नहीं हुए हैं।
PNB Scam: भगोड़े Nirav Modi के सहयोगी Sandeep Mistri की जमानत याचिका मुंबई कोर्ट से खारिज
मुंबई की एक विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े करोड़ों डॉलर के घोटाले में भगोड़ा कारोबारी नीरव मोदी के सहयोगी संदीप मिस्त्री को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मिस्त्री का अतीत साक्ष्यों को नष्ट करने से जुड़ा है और रिहा होने पर वह दोबारा ऐसा कर सकता है। विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश सुभाष करहले ने कहा कि मिस्त्री करीब सात साल तक फरार रहा और गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी होने तथा निर्वासन की कार्यवाही के बाद उसे दुबई में हिरासत में लिया गया।
इसके बाद उसे भारत लाया गया और मुंबई हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया। अदालत ने कहा, ‘‘इस प्रकार, आरोपी इस मामले में बाध्यकारी परिस्थितियों के कारण पेश हुआ है। इन परिस्थितियों में, यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना मुश्किल होगा।’’ मिस्त्री नीरव मोदी की हांगकांग स्थित कंपनी फैंसी क्रिएशंस लिमिटेड का निदेशक रह चुका है।
विशेष लोक अभियोजक ए. लिमोसिन के माध्यम से सीबीआई ने अदालत को बताया कि मिस्त्री दुबई और हांगकांग में नीरव मोदी की मुखौटा कंपनियों का संचालन और उनके कामकाज में समन्वय करता था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि वह ‘पैनमेल’ और ‘क्रिकइन्फो’ जैसी गुप्त संचार प्रणालियों के जरिये इन कंपनियों के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी करता था। ये प्रणालियां संदेशों को अपने आप मिटाने के लिए बनाई गई थीं, ताकि साक्ष्य छिपाए जा सकें।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि मिस्त्री ने नीरव मोदी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके तहत पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ धोखाधड़ी की गई। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि मिस्त्री ने नीरव मोदी के भाई निहाल और एक अन्य वांछित आरोपी के साथ मिलकर कर्मचारियों (दुबई में नीरव मोदी से जुड़ी विभिन्न कंपनियों के नाममात्र के निदेशकों) को भारत में मामला दर्ज होने के बाद वहां से चले जाने की धमकी दी थी। आरोप है कि उन्हें यह धमकी देकर काहिरा जाने के लिए मजबूर किया गया कि उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि पासपोर्ट रद्द किए जाने के कारण वह पहले भारत नहीं लौट सका था। अदालत ने जोर देकर कहा कि आरोपी और अन्य लोगों पर 23,780 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। विशेष न्यायाधीश ने रेखांकित किया कि आरोपी का अतीत साक्ष्यों को नष्ट करने से जुड़ा रहा है।
अदालत ने कहा, ‘‘यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह साक्ष्य नष्ट कर सकता है। वह अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित कर सकता है।’’ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) नीरव मोदी, उसके मामा मेहुल चोकसी और अन्य लोगों के खिलाफ 2018 से धनशोधन के आरोपों में जांच कर रहा है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी उनके खिलाफ जांच कर रहा है।
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