बांग्लादेश: बीएनपी की वापसी का भारत के साथ संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
क़रीब दो दशक बाद बीएनपी के सत्ता में लौटने को बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. लेकिन इसका भारत-बांग्लादेश के रिश्तों पर क्या असर होगा?
CDS चौहान बोले- मौजूदा दुनिया में दोस्त-दुश्मन तय करना मुश्किल:पार्टनरशिप लेन-देन पर निर्भर; भारत को अकेले काम करने के लिए तैयार रहना होगा
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि आज की दुनिया में यह तय करना मुश्किल है कि आपके दोस्त कौन हैं, सहयोगी कौन हैं और विरोधी या दुश्मन कौन हैं। जनरल चौहान पुणे में साउदर्न कमांड की ओर से आयोजित जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन (JAI) सेमिनार में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा- परमानेंट दोस्ती या दुश्मनी को लेकर धारणाएं भरोसे के लायक नहीं रह गई हैं। CDS चौहान ने कहा- आजकल रणनीतिक गठबंधन लचीले और लेन-देन पर निर्भर हो गए हैं। भारत को जरूरत पड़ने पर अकेले काम करने के लिए तैयार रहना होगा। यह तैयारी मानसिक, संरचनात्मक और भौतिक, तीनों ही स्तर पर होनी चाहिए। CDS बोले- वैश्विक सुरक्षा माहौल बदल रहा CDS ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा वातावरण तेजी से बदल रहा है और इसमें अनिश्चितता बढ़ी है। उन्होंने ‘जबरन राष्ट्रवाद’ और ‘आर्थिक हथियारीकरण’ का जिक्र किया, जहां व्यापार, सप्लाई चेन, तकनीक तक पहुंच और अहम संसाधनों का इस्तेमाल रणनीतिक दबाव के औजार के रूप में किया जा रहा है। जनरल चौहान ने कहा कि घोषित युद्ध अब कम होते जा रहे हैं। प्रतिस्पर्धा अब प्रॉक्सी, सीमित स्तर की कार्रवाइयों और साइबर गतिविधियों के जरिए सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि संज्ञानात्मक और सूचना युद्ध अब एक प्रमुख रणक्षेत्र बन चुके हैं, जहां सेनाओं की बजाय समाजों को निशाना बनाया जा रहा है। ‘जय से विजय’ सिर्फ नारा नहीं सेमिनार की थीम ‘जय से विजय’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल नारा नहीं, बल्कि रणनीतिक सिद्धांत है, जो उद्देश्य को परिणाम से जोड़ता है। उन्होंने बताया कि JAI का अर्थ है—जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन। भविष्य की तैयारी के लिए रणनीतिक कमजोरियों, पुरानी सैन्य सोच और संगठनात्मक बाधाओं को दूर करना जरूरी है। जनरल चौहान ने कहा- जीत भाषणों से नहीं, बल्कि ठोस और परखे जा सकने वाले परिणामों से तय होती है। भारतीय सशस्त्र बलों को आने वाले दशक की प्रतिस्पर्धी, टकरावपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार करना होगा।
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