Nitish Kumar ने Delhi में प्रधानमंत्री Narendra Modi से की मुलाकात
नयी दिल्ली, चार अगस्त जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार के एक दिन बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिले। प्रधानमंत्री के साथ नीतीश की मुलाकात के दौरान जदयू नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार जी ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।” नीतीश ने कहा कि उन्होंने यहां संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री के कार्यालय में उनसे शिष्टाचार भेंट की।
भाजपा का गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा, क्योंकि नितिन नवीन के पार्टी अध्यक्ष का पद संभालने और फिर राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद यह सीट खाली हो गई थी। बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 मतों के अंतर से हराया। दस बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश ने इस साल अप्रैल में इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में पहली बार एक भाजपा नेता (सम्राट चौधरी) ने सरकार की कमान संभाली।
बिहार में भाजपा और जदयू सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा हैं।
Puri Rath Yatra के रथों के पहिए राष्ट्रपति भवन में होंगे प्रदर्शित
(संपादकीय सुधार के साथ) भुवनेश्वर, चार अगस्त पुरी की वार्षिक रथयात्रा में इस्तेमाल होने वाले तीनों रथों के पहिए राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किए जाएंगे। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बताया कि उन्होंने भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उनके समक्ष यह प्रस्ताव रखा।
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हो गईं कि तीनों रथों के पहिये राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शित किए जाएं। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है।’’ अधिकारियों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’, भगवान बलभद्र के ‘तालध्वज’ और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथों के पहियों को नयी दिल्ली भेजा जाएगा और ओडिशा की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वार्षिक रथयात्रा के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले तीनों रथों को हर साल उत्सव के बाद खोल दिया जाता है।
जहां लकड़ी का एक हिस्सा जगन्नाथ मंदिर की रसोई में इस्तेमाल होता है, वहीं रथों के महत्वपूर्ण हिस्सों की श्रद्धालुओं के बीच नीलामी की जाती है। उन्होंने बताया कि उत्सव के लिए नए रथों के निर्माण के वास्ते हर साल नयी लकड़ी का उपयोग किया जाता है। यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा की विरासत को राष्ट्रपति भवन परिसर में जगह मिलने जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले 29 अक्टूबर 2024 को प्रतिष्ठित कोणार्क पहियों की बलुआ पत्थर से बनी चार प्रतिकृतियों को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र और अमृत उद्यान में प्रदर्शित किया गया था, ताकि आगंतुकों के सामने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जा सके।
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