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योगी ने PMAY के लाभार्थियों को चाबी सौंपी, नए आवासों के लिए भूमिपूजन किया, समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज प्रयागराज में PMAY (प्रधानमंत्री आवास योजना, शहरी) के अंतर्गत पीपलगांव में बनाये गए  556 आवासों के लाभार्थियों को आवास की चाबियां सौंपी। इस विशेष अवसर पर योगी ने माफिया से मुक्त कराई गई भूमि पर पद्म लोक आवास योजना के अंतर्गत 191 करोड़ रुपये की की लागत से बनने वाले 602 आवासों के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया।

कार्यक्रम को सम्बोध्जित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा डबल इंजन सरकार के सुशासन, रोजगार सृजन, गरीब कल्याण और विकास के संकल्प से तीर्थराज प्रयागराज प्रगति के नित नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को हार्दिक बधाई दी एवं शारदीय नवरात्रि तथा विजयादशमी की शुभकामनाएं दी।

योगी एन कहा जब 2017 में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तब हम लोगों ने तय किय अकि उत्तर प्रदेश को सुरक्षित बनाना है, उत्तर प्रदेश में सुशासन लाना है,  उत्तर प्रदेश को भारत की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन के रूप में प्रस्तुत करना है और अपराध और अपराधियों के लिए जीरो टोलरेंस की नीति पर काम करना है।

अतीक अहमद और उसके गुंडों से छुड़ाई 15 बीघा जमीन पर बन रहे आवास  

मुख्यमंत्री ने कहा हमने तय किया था कि माफियामुक्त यूपी बनायेंगे और आज इसके परिणाम दिखाई दे रहे हैं, हमें पिछले दिनों माफिया से मुक्त भूमि पर हाइराइज बिल्डिंग बनाकर 86 गरीबों को आवास उपलब्ध कराये थे और आज यहाँ प्रयागराज में 602 आवासों के निर्माण के लिए भूमिपूजन कर रहे हैं

योगी ने बताया कि ये जो 15 बीघा की जमीन है इसपर माफिया अतीक अहमद और उसके गुंडों ने कब्जा कर अपना अस्तबल बनाया था, अपनी अय्याशी का केंद्र बनाया था उसके नाजायज साम्राज्य को ध्वस्त कर जमीन को वापस लिया गया। अब वहां गरीबों के लिए आवास बनेगा।

अब प्रयागराज में कोई माफियागिरी करने का दुस्साहस नहीं करेगा

योगी ने कहा समाजवादी पार्टी आती है तो माफिया और बदमाश लेकर आती है। भाजपा आती है तो विकास और बदलाव लेकर आती है, यही विअक्स है और यही बदलाव भी है , बिना भेदभाव के हर गरीब को, हर जाती के व्यक्ति को आवास की सुविधा मिल रही है, अब प्रयागराज में कोई माफियागिरी करने का दुस्साहस नहीं करेगा, अगर कोई कराएगा या करेगा तो फिर मिट्टी में मिलने की तैयारी भी कर लेगा।

 

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मस्क ने दबाया किल स्विच बटन, चीख पड़ा यूक्रेन, सही निकला भारत का अनुमान!

पिछले कुछ महीनों और सालों में इस बात पर कितनी तीखी बहस छिड़ी हुई थी कि भारत में विदेशी सेटेलाइट इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को तुरंत एंट्री क्यों नहीं दी जा रही है? लगातार यह सवाल पूछे गए, दबाव बनाए गए कि आखिर भारत अपनी क्लीयरेंस प्रक्रिया को इतना कड़ा क्यों रखे हुए? उस समय भारत के सुरक्षा हल्कों और नीति निर्माताओं का सिर्फ एक ही बुनियादी तर्क था। राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि है। डाटा का नियंत्रण और आपात स्थिति में नेटवर्क का स्विच किसके हाथ में होगा? यह सबसे बड़ा सुरक्षा सवाल था और आज यूक्रेन के रणक्षेत्र से जो तकनीकी और सामरिक रिपोर्ट सामने आई है, उन्होंने इस बात को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। यूक्रेन के फ्रंट लाइन से आ रही रिपोर्ट बताती है कि 160 कि.मी. प्रति घंटे से अधिक रफ्तार पर चलने वाले टर्मिनल्स की कनेक्टिविटी अचानक बाधित हो गई। इसका सीधा असर वहां के आधुनिक ड्रोन ऑपरेशन और काउंटर ड्रोन रक्षा प्रणालियों पर पड़ा है।

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आधुनिक युद्ध अब सिर्फ पारंपरिक हथियारों का खेल नहीं रहा है। आज का कॉम्बैट पूरी तरह से डिजिटल नेटवर्क, हाई स्पीड, डाटा, ट्रांसमिशन और रियल टाइम कोऑर्डिनेशन पर टिका हुआ है। यूक्रेन में पिछले दो सालों से सेटेलाइट इंटरनेट की भूमिका एक जीवन रेखा यानी कि लाइफ लाइन की तरह है। अब पहली बात है इसकी आर्टिलरी कोऑर्डिनेशन। जी हां, तोपखाने की गोलेबारी सटीक बैठी या फिर नहीं। कोऑर्डिनेट्स में बदलाव करना है। यह सब ड्रोन से मिली लाइव वीडियो फीड के जरिए तय होता है। दूसरी बात कमांड एंड कंट्रोल। जी हां, जमीन पर तैनात इनफेंट्री यूनिट्स अपने बेस कमांड सेंटर से रियल टाइम संचार के लिए इसी नेटवर्क का उपयोग करती है। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बात एफपीवी और इंटरसेप्टर ड्रोन। जी हां, आधुनिक युद्ध में कम लागत वाले फर्स्ट पर्सन व्यू ड्रोन का इस्तेमाल दुश्मन के टैंकों और ठिकानों को तबाह करने के लिए बड़े पैमाने पर होता है। लेकिन हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इन मोशन टर्मिनल्स पर स्पीड लिमिट या कैप लगा दी गई है। अब जैसे ही ड्रोन या टर्मिनल की गति 160 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक होती है, कनेक्शन ड्रॉप हो जाता है। अब इसका सीधा असर देखिए किस पर पड़ता है। इसका पहला असर पड़ता है ऑफेंसिव ऑपरेशन का धीमा होना। जी हां, आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से बचने के लिए ड्रोंस को बहुत तेजी से उड़ना पड़ता है। धीमी गति का मतलब है कि दुश्मन का रडार और एयर डिफेंस उन्हें आसानी से मार गिराएगा। दूसरा है डिफेंसिव इंटरसेप्टर का बेकार होना। जी हां, जब दुश्मन के जेट पावर्ड या तेज गति वाले ड्रोंस हमला करते हैं तो उन्हें हवा में ही टकराने के लिए इंटरसेप्टर ड्रोंस की रफ्तार 200 से 400 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। लेकिन अगर 160 किमी/ घंटे पर ही सिग्नल कट जाए तो ये इंटरसेप्टर हवा में ही दिशाहीन होकर गिर पड़ेंगे। यानी कि बिना किसी भौतिक हमले के सिर्फ सॉफ्टवेयर और नेटवर्क लेवल पर एक बदलाव ने पूरी सैन्य क्षमता को प्रभावित कर दिया है। 

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इस घटना ने पूरी दुनिया के सामने तीन कड़े भू राजनीतिक सबक रख दिए हैं। पहला किल स्विच का भूगोल। तकनीक कितनी भी एडवांस खरीद लें अगर उस तकनीक का नियंत्रण केंद्र और सर्वर आपकी सीमा से बाहर है तो संप्रभुता सिर्फ कागजों पर रह जाती है। अब विदेशी कंपनियों के साथ समस्या यह होती है कि उनके सर्वर, उनके सेटेलाइट गेटवे और उनकी नीतियां, उनकी अपनी घरेलू सरकार और अपने व्यवसायिक हितों से बंदी होती है। संकट के समय अगर आपको कहा जाए कि नियमों में बदलाव हो गया तो आपके पास बातचीत करने का समय नहीं बचता है। विदेश नीति में यह समझना बेहद जरूरी है कि व्यवसायिक साझेदारियां कभी भी स्थाई सैनिक गारंटी नहीं होती हैं। जब वैश्विक राजनीति में समीकरण बदलते हैं, जब चुनावी मौसम आते हैं या जब व्यापारिक प्राथमिकताओं में टकराव होता है तो सबसे पहले दबाव तकनीकी सप्लाई चेन पर बनाया जाता है। कल तक जो तकनीक आपकी सबसे बड़ी ताकत थी वो एक झटके में आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकती है। कोई भी बहुद्रवी कंपनी चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो वो अंततः अपने सबसे बड़े ग्राहकों अपने घरेलू रक्षा विभागों और अपने शेयर धारकों के प्रति जवाबदेह होती है। किसी दूसरे देश के राष्ट्रीय सुरक्षा हित उनके लिए प्राथमिकता नहीं हो सकते हैं। चलिए अब जानते हैं भारत की दूरदर्शिता और आत्मनिर्भरता का मॉडल।
 

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19 के स्कोर पर गिर गए थे 4 विकेट... स्मृति मंधाना ने जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत से किया कप्तानी का आगाज

India womens cricket team beat Zimbabwe: भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहले टी20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को चार विकेट से हराकर तीन मैच की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है. स्मृति मंधाना की कप्तानी में उतरी टीम इंडिया के सामने 115 रन का लक्ष्य था, लेकिन शुरुआती झटकों के कारण उसने 19 रन पर चार विकेट गंवा दिए थे. इसके बाद अनुभवी ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा (49) और पदार्पण कर रही निकी प्रसाद (नाबाद 39) ने पांचवें विकेट के लिए 82 रन की रिकॉर्ड साझेदारी कर टीम को रोमांचक जीत दिलाई. Fri, 16 Oct 2026 22:44:00 +0530

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