चिपचिपे और ऑयली बालों से परेशान? रीठा-शिकाकाई से नीम तक, ये चीजें दिलाएंगी समस्या से छुटकारा
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बालों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इस कड़ी में बालों का चिपचिपा और ऑयली हो जाना जैसी परेशानियां भी देखी जा रही हैं। सुबह उठते ही बाल ऐसे लगते हैं, जैसे उन पर तेल लगाया गया हो, वहीं बाहर से लौटने पर पसीने के साथ बाल आपस में चिपक जाते हैं। यह समस्या लुक को खराब करती है। साथ ही बालों के झड़ने और स्कैल्प से जुड़ी दूसरी परेशानियों को भी बढ़ावा देती है।
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में कफ दोष बढ़ने पर तैलीयपन ज्यादा हो जाता है। यही कफ दोष स्कैल्प में अतिरिक्त तेल बनाने लगता है, जिससे बाल भारी, चिपचिपे और बेजान नजर आने लगते हैं।
वहीं, विज्ञान की मानें तो, हमारे सिर की त्वचा में मौजूद सेबेशियस ग्लैंड जरूरत से ज्यादा सीबम यानी तेल बनाने लगती हैं। यह तेल अगर संतुलन में रहे तो बालों के लिए अच्छा होता है, लेकिन जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है, तो परेशानी शुरू हो जाती है।
गर्मी और पसीना बालों की इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। जब मौसम गर्म होता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना छोड़ता है। स्कैल्प पर पसीना और तेल मिलकर एक ऐसी परत बना देते हैं जिससे बाल चिपकने लगते हैं। इसके अलावा, बार-बार शैंपू करना भी नुकसान पहुंचा सकता है। ज्यादा शैंपू करने से स्कैल्प अपनी नमी खो देता है।
खान-पान का असर भी बालों पर साफ दिखता है। ज्यादा तला-भुना, जंक फूड और मीठा खाने से शरीर में अंदरूनी गर्मी और कफ बढ़ता है, जिसका सीधा असर स्कैल्प पर पड़ता है। गंदा स्कैल्प, डैंड्रफ और बैक्टीरिया भी बालों को चिपचिपा बना सकते हैं। जब सिर की त्वचा साफ नहीं रहती, तो तेल, पसीना और गंदगी मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे बाल कमजोर होने लगते हैं।
आयुर्वेद कहता है कि समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रकृति उपायों को अपनाना जरूरी है। रीठा और शिकाकाई का इस्तेमाल सदियों से बालों की सफाई के लिए किया जाता रहा है। यह बालों को बिना नुकसान पहुंचाए अतिरिक्त तेल को हटाते हैं और स्कैल्प को सांस लेने का मौका देते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व बालों को साफ करते हैं और उनकी मजबूती भी बनाए रखते हैं।
एलोवेरा को आयुर्वेद में ठंडक देने वाला माना गया है। जब स्कैल्प पर एलोवेरा जेल लगाया जाता है, तो यह गर्मी और जलन को शांत करता है। विज्ञान भी मानता है कि एलोवेरा में ऐसे एंजाइम होते हैं जो तेल के संतुलन को ठीक करते हैं और स्कैल्प को हेल्दी बनाते हैं। नियमित इस्तेमाल से बाल हल्के, मुलायम और कम चिपचिपे हो जाते हैं।
मुल्तानी मिट्टी भी असरदार उपाय है। यह मिट्टी अतिरिक्त तेल को सोखने की ताकत रखती है। जब इसे सिर पर लगाया जाता है, तो यह स्कैल्प को गहराई से साफ करती है और बालों को फ्रेश लुक देती है। नींबू का रस मिलाने से इसका असर और बढ़ जाता है। नींबू प्राकृतिक रूप से तेल को कम करने में मदद करता है।
नीम को आयुर्वेद में औषधि माना गया है। नीम के पानी से बालों को धोने से स्कैल्प पर मौजूद बैक्टीरिया और गंदगी साफ होती है। इससे न सिर्फ चिपचिपापन कम होता है, बल्कि डैंड्रफ और खुजली की समस्या से भी राहत मिलती है।
--आईएएनएस
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अमेरिका अपने सबसे घातक बम वर्षक B52 को अपग्रेड करने की तैयारी कर रहा है. अमेरिकी वायुसेना ने साफ कर दिया है कि अगर आदेश मिलता है तो सभी B52 बमबर्स की न्यूक्लियर कैपेबिलिटी रिस्टोर कर दी जाएगी. अगर अमेरिका ने ऐसा किया तो उसका क्या असर होगा और न्यूक्लियर वॉर का खतरा कैसे बढ़ जाएगा इस रिपोर्ट को देखिए. न्यूक्लियर वेपन की रेस में अमेरिका की नई रणनीति. सभी B52 बमबर्स में न्यूक्लियर कैपेबिलिटी रिस्टोर करने की तैयारी है.
न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अब कोई पाबंदी नहीं
यूरोप से लेकर मिडिल ईस्ट तक जारी तनाव के बीच अमेरिका अपनी न्यूक्लियर पावर में इजाफा करने की तैयारी में जुट गया है. न्यू स्टार्ट समझौता खत्म होने के बाद न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर अब कोई पाबंदी नहीं है. लिहाजा अमेरिका की इस कोशिश में है कि वो ज्यादा से ज्यादा परमाणु शक्ति बढ़ाएं. इसके तहत अमेरिका की एयरफोर्स सबसे पहले अपने सभी B52 बॉमबर विमानों को न्यूक्लियर पावर से लैस करना चाहती है. बी 52 लंबी दूरी का सबसोनिक भारी रणनीतिक बम वर्षक विमान है. इसकी ताकत से पूरी दुनिया खौफ खाती है. B52 अमेरिकी वायुसेना के सबसे खतरनाक विमानों में गिना जाता है. B52 ने अपनी पहली उड़ान 1952 में भरी थी और सात दशक बाद भी यह अमेरिकी एयरफोर्स की ताकत बना हुआ है.
परमाणु हथियार क्षमता को बहाल करने को तैयार
B52 की दहशत कायम रहे. इसके लिए अमेरिकी एयरफोर्स के ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने साफ किया है कि अगर सरकार का आदेश मिला तो वो पूरे B52 बम वर्षक बेड़े की परमाणु हथियार क्षमता को बहाल करने को तैयार है. दरअसल 2011 में अमेरिका और रूस के बीच हुई न्यू स्टार ट्रीटी के बाद B52 बमबर्स की न्यूक्लियर कैपेबिलिटी को कंट्रोल किया गया था. अब यह समझौता खत्म हो चुका है. लिहाजा अमेरिकी एयरफोर्स एक बार फिर से अपने सभी B52 बमबर्स की न्यूक्लियर कैपेबिलिटी रिस्टोर करने की तैयारी कर रहा है.
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