इन आसान आदतों से दिमाग को करें रिचार्ज, बढ़ेगी प्रोडक्टिविटी
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। शरीर के साथ मन को भी सेहतमंद रखना बेहद जरूरी है। लेकिन ये भी सच है कि आज के दौर में यह एक बड़ी चुनौती है। काम का प्रेशर, अनियमित लाइफस्टाइल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ऐसे में एक्सपर्ट कुछ आसान आदतों को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के अनुसार, मानसिक स्थिरता और अच्छा फोकस कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) को बढ़ाता है और कार्यस्थल पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करता है। मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होने से व्यक्ति तनाव से बेहतर निपटता है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और जीवन में संतुलन बना रहता है।
मानसिक स्वास्थ्य पूरे शरीर को सेहतमंद रखने में कारगर हो सकता है। खराब मानसिक स्थिति से अनुपस्थिति और प्रोडक्टिविटी में गिरावट आती है। इसलिए, रोजमर्रा की आदतों में आसान उपायों को अपनाकर सेहतमंद रहा जा सकता है।
एक्सपर्ट के अनुसार, मानसिक रूप से सेहतमंद रहने के लिए नियमित व्यायाम करें, संतुलित और पौष्टिक आहार लें और अच्छी नींद पूरी करें। यह सच है कि आज के समय में गैजेट्स एक जरूरी हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, इस पर कंट्रोल जरूरी है। ऐसे में मोबाइल और स्क्रीन से दूरी बनाएं, खासकर सोने से पहले।
साइकोलॉजी के अनुसार, छोटी-छोटी बातें खुशी देती हैं, जो मन के लिए अच्छी होती हैं। इसके लिए दूसरों के प्रति आभार व्यक्त करें, छोटी-छोटी अच्छी बातों के लिए धन्यवाद कहें। किसी की बात अच्छी लगे तो खुलकर तारीफ करें। किताबें पढ़ना, कहानियां सुनना या डायरी में अपने विचार लिखने शुरू करें।
परिवार और अपने पसंदीदा इंंसान जैसे दोस्त वगैरह के साथ समय बिताएं और पारिवारिक गतिविधियों में शामिल हों। साथ ही रोजाना योग और ध्यान का अभ्यास करें। मोबाइल फोन से दूरी के साथ ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी सीमित समय तक करें, अनावश्यक स्क्रॉलिंग से बचें। नई स्किल्स सीखें या कोई हॉबी अपनाएं, जैसे पेंटिंग, गार्डनिंग या संगीत।
ये छोटे-छोटे कदम विचारों को संतुलित रखते हैं और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखते हैं। यदि जरूरत हो तो डॉक्टर या काउंसलर से संपर्क करें।
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चिपचिपे और ऑयली बालों से परेशान? रीठा-शिकाकाई से नीम तक, ये चीजें दिलाएंगी समस्या से छुटकारा
नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बालों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इस कड़ी में बालों का चिपचिपा और ऑयली हो जाना जैसी परेशानियां भी देखी जा रही हैं। सुबह उठते ही बाल ऐसे लगते हैं, जैसे उन पर तेल लगाया गया हो, वहीं बाहर से लौटने पर पसीने के साथ बाल आपस में चिपक जाते हैं। यह समस्या लुक को खराब करती है। साथ ही बालों के झड़ने और स्कैल्प से जुड़ी दूसरी परेशानियों को भी बढ़ावा देती है।
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में कफ दोष बढ़ने पर तैलीयपन ज्यादा हो जाता है। यही कफ दोष स्कैल्प में अतिरिक्त तेल बनाने लगता है, जिससे बाल भारी, चिपचिपे और बेजान नजर आने लगते हैं।
वहीं, विज्ञान की मानें तो, हमारे सिर की त्वचा में मौजूद सेबेशियस ग्लैंड जरूरत से ज्यादा सीबम यानी तेल बनाने लगती हैं। यह तेल अगर संतुलन में रहे तो बालों के लिए अच्छा होता है, लेकिन जब इसकी मात्रा बढ़ जाती है, तो परेशानी शुरू हो जाती है।
गर्मी और पसीना बालों की इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। जब मौसम गर्म होता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना छोड़ता है। स्कैल्प पर पसीना और तेल मिलकर एक ऐसी परत बना देते हैं जिससे बाल चिपकने लगते हैं। इसके अलावा, बार-बार शैंपू करना भी नुकसान पहुंचा सकता है। ज्यादा शैंपू करने से स्कैल्प अपनी नमी खो देता है।
खान-पान का असर भी बालों पर साफ दिखता है। ज्यादा तला-भुना, जंक फूड और मीठा खाने से शरीर में अंदरूनी गर्मी और कफ बढ़ता है, जिसका सीधा असर स्कैल्प पर पड़ता है। गंदा स्कैल्प, डैंड्रफ और बैक्टीरिया भी बालों को चिपचिपा बना सकते हैं। जब सिर की त्वचा साफ नहीं रहती, तो तेल, पसीना और गंदगी मिलकर रोमछिद्रों को बंद कर देते हैं, जिससे बाल कमजोर होने लगते हैं।
आयुर्वेद कहता है कि समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए प्रकृति उपायों को अपनाना जरूरी है। रीठा और शिकाकाई का इस्तेमाल सदियों से बालों की सफाई के लिए किया जाता रहा है। यह बालों को बिना नुकसान पहुंचाए अतिरिक्त तेल को हटाते हैं और स्कैल्प को सांस लेने का मौका देते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व बालों को साफ करते हैं और उनकी मजबूती भी बनाए रखते हैं।
एलोवेरा को आयुर्वेद में ठंडक देने वाला माना गया है। जब स्कैल्प पर एलोवेरा जेल लगाया जाता है, तो यह गर्मी और जलन को शांत करता है। विज्ञान भी मानता है कि एलोवेरा में ऐसे एंजाइम होते हैं जो तेल के संतुलन को ठीक करते हैं और स्कैल्प को हेल्दी बनाते हैं। नियमित इस्तेमाल से बाल हल्के, मुलायम और कम चिपचिपे हो जाते हैं।
मुल्तानी मिट्टी भी असरदार उपाय है। यह मिट्टी अतिरिक्त तेल को सोखने की ताकत रखती है। जब इसे सिर पर लगाया जाता है, तो यह स्कैल्प को गहराई से साफ करती है और बालों को फ्रेश लुक देती है। नींबू का रस मिलाने से इसका असर और बढ़ जाता है। नींबू प्राकृतिक रूप से तेल को कम करने में मदद करता है।
नीम को आयुर्वेद में औषधि माना गया है। नीम के पानी से बालों को धोने से स्कैल्प पर मौजूद बैक्टीरिया और गंदगी साफ होती है। इससे न सिर्फ चिपचिपापन कम होता है, बल्कि डैंड्रफ और खुजली की समस्या से भी राहत मिलती है।
--आईएएनएस
पीके/एबीएम
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