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Super El Nino: क्या भारत में पड़ेगी भीषण गर्मी, सूखे और पानी की किल्लत की मार? जानिए WMO की चेतावनी का मतलब

Super El Nino: दुनिया के मौसम पर नजर रखने वाली एजेंसियों ने अल नीनो की मजबूत होती स्थिति को लेकर चिंता जताई है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ सकता है और अल नीनो दिसंबर के आसपास अपने चरम पर पहुंच सकता है. इसका असर 2027 तक दुनिया के कई क्षेत्रों के तापमान और बारिश के पैटर्न पर दिखाई दे सकता है.

भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम बारिश के साथ खत्म हुआ. ऐसे में सर्दियों में बारिश, रबी फसलों की सिंचाई, जलाशयों में पानी की उपलब्धता और अगले साल गर्मी की स्थिति पर दबाव बढ़ने की आशंका है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश के हर हिस्से में सूखा पड़ेगा या हर जगह तापमान एक जैसा बढ़ेगा. वास्तविक असर क्षेत्रीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

सुपर अल नीनो से जुड़े अहम आंकड़े

- अल नीनो के मजबूत होने का दौर: अक्टूबर-दिसंबर 2026

- संभावित चरम: दिसंबर 2026 के आसपास

- प्रशांत महासागर का अनुमानित तापमान अंतर: Nino 3.4 क्षेत्र में सामान्य से लगभग 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक

- संभावित प्रभाव: तापमान में वृद्धि, बारिश के पैटर्न में बदलाव, सूखे और बाढ़ का जोखिम

- प्रभाव की अवधि: 2027 तक मौसम पर असर जारी रहने की आशंका

ये आंकड़े WMO के मौसमी पूर्वानुमान पर आधारित हैं. तापमान का अंतर समुद्र की सतह के तापमान और उसके सामान्य स्तर के बीच का अंतर है, न कि पूरे भारत के तापमान में होने वाली वृद्धि. 

क्या है अल नीनो और यह कैसे काम करता है?

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक होने की जलवायु संबंधी स्थिति है. यह ENSO यानी अल नीनो-सदर्न ऑसिलेशन प्रणाली का एक चरण है. इसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वायुमंडल के दबाव, हवाओं और नमी के प्रवाह में भी बदलाव ला सकता है.

सामान्य परिस्थितियों में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में चलने वाली व्यापारिक हवाएं गर्म सतही पानी को पश्चिम की ओर धकेलती हैं. अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं. इससे मध्य और पूर्वी प्रशांत में गर्म पानी का विस्तार होता है और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश तथा तापमान का संतुलन बदल सकता है.

अल नीनो को उसकी तीव्रता के आधार पर कमजोर, मध्यम, मजबूत और बहुत मजबूत श्रेणियों में देखा जाता है. 'सुपर अल नीनो' शब्द का इस्तेमाल बहुत शक्तिशाली घटना के लिए मीडिया और चर्चा में किया जाता है. भारत सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि 'सुपर अल नीनो' WMO या भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की कोई औपचारिक रूप से परिभाषित श्रेणी नहीं है. 

WMO ने क्या चेतावनी दी है?

WMO के सितंबर 2026 के अपडेट के मुताबिक, अल नीनो के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत बताई गई थी. अक्टूबर-दिसंबर के मौसमी पूर्वानुमान में इसके और मजबूत होने तथा दिसंबर के आसपास चरम पर पहुंचने का अनुमान है. संगठन ने चेताया है कि इससे दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, सूखा और भारी बारिश का जोखिम बढ़ सकता है. 

यहां एक बात समझना जरूरी है. WMO का पूर्वानुमान किसी एक देश में किसी खास दिन आने वाली गर्मी, बारिश या बाढ़ की निश्चित भविष्यवाणी नहीं है. यह बड़े पैमाने पर जलवायु की संभावित दिशा बताता है. स्थानीय मौसम पर मानसूनी प्रणालियों, पश्चिमी विक्षोभ, समुद्र के अन्य तापमान पैटर्न और क्षेत्रीय परिस्थितियों का भी असर पड़ता है.

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

भारत में अल नीनो को अक्सर कमजोर मानसून की आशंका से जोड़ा जाता है. ऐतिहासिक तौर पर कई अल नीनो वर्षों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम रही है, लेकिन हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है. इस साल चिंता इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून देशभर में लगभग 13 प्रतिशत कम बारिश के साथ समाप्त हुआ. 

अब असर के तीन बड़े क्षेत्रों पर नजर रखना जरूरी होगा.

1. सर्दियों में तापमान और बारिश

अल नीनो के मजबूत होने से भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और बारिश के वितरण में बदलाव की आशंका है. WMO से जुड़े दक्षिण एशियाई मौसमी पूर्वानुमान में अक्टूबर-दिसंबर के दौरान क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य या उससे ऊपर रहने की संभावना जताई गई है. हालांकि, बारिश का पूर्वानुमान सभी क्षेत्रों के लिए एक जैसा नहीं है. उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना के साथ मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में कम बारिश का जोखिम भी बताया गया है. 

2. रबी फसलों पर दबाव

गेहूं, सरसों, चना और दूसरी रबी फसलों की बुवाई तथा शुरुआती विकास के दौरान मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी होती है. यदि बारिश कम होती है और तापमान अधिक रहता है, तो सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है. इससे उन किसानों की लागत बढ़ने का जोखिम है, जो पहले से ही पानी की कमी का सामना कर रहे हैं.

हालांकि, फसल पर असर केवल अल नीनो से तय नहीं होगा. बुवाई का समय, सिंचाई सुविधाएं, मिट्टी की नमी और स्थानीय मौसम भी अहम भूमिका निभाएंगे.

3. पानी और बिजली की मांग

कम बारिश से कुछ क्षेत्रों में जलाशयों, भूजल और स्थानीय जलापूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है. वहीं, तापमान अधिक रहने पर पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर के इस्तेमाल से बिजली की मांग बढ़ सकती है. कृषि सिंचाई के लिए भी ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ सकती है. यदि पानी और बिजली की उपलब्धता एक साथ प्रभावित होती है, तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ सकती हैं.

दुनिया के दूसरे देशों में क्या होगा असर?

अल नीनो का असर हर क्षेत्र में अलग होता है. कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति गंभीर हो सकती है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है. समुद्र के तापमान में बदलाव वैश्विक औसत तापमान को भी ऊपर ले जाने में योगदान दे सकता है. WMO का अनुमान है कि इस जलवायु घटना के प्रभाव 2027 तक बने रह सकते हैं. 

किन क्षेत्रों में क्या जोखिम?

सरकार और आम लोगों को अभी क्या करना चाहिए?

अल नीनो के संभावित प्रभावों को देखते हुए सबसे जरूरी है कि मौसम की चेतावनियों और पानी की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जाए.

किसानों के लिए: स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार फसल और सिंचाई की योजना बनाएं.

जल प्रबंधन: वर्षा जल संचयन, जलाशयों की निगरानी और पानी की बचत पर जोर दें.

बिजली व्यवस्था: गर्मी के दौरान बढ़ने वाली मांग के लिए बिजली आपूर्ति की योजना बनाएं.

स्वास्थ्य सुरक्षा: अधिक तापमान की स्थिति में पर्याप्त पानी पिएं और मौसम विभाग की गर्मी संबंधी चेतावनियों का पालन करें.

सरकारी तैयारी: IMD के पूर्वानुमान और जिला स्तर की चेतावनियों के आधार पर आवश्यक कदम उठाएं.

भारत सरकार के मुताबिक, IMD अल नीनो समेत दूसरे जलवायु कारकों की निगरानी करता है और मौसम संबंधी पूर्वानुमान तथा चेतावनियां जारी करता है. इसलिए किसी भी संभावित खतरे के आकलन में आधिकारिक और क्षेत्र-विशिष्ट जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है.

क्या सुपर अल नीनो से 2027 की गर्मी रिकॉर्ड तोड़ सकती है?

मजबूत अल नीनो वैश्विक तापमान को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है. यदि यह 2027 तक प्रभावशाली बना रहता है, तो अगले साल गर्मी और जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. लेकिन अभी से यह निश्चित कहना सही नहीं होगा कि भारत में गर्मी का हर रिकॉर्ड टूट जाएगा.

तापमान पर अल नीनो के अलावा जलवायु परिवर्तन, समुद्र की स्थिति और क्षेत्रीय मौसमी प्रणालियों का भी असर होता है. इसी तरह, कम बारिश का मतलब हर जगह सूखा और अधिक बारिश का मतलब हर जगह बाढ़ नहीं होता.

सुपर अल नीनो को लेकर WMO की चेतावनी भारत के लिए समय रहते तैयारी करने का संकेत है. 2026 में मानसून की कमी के बाद सर्दियों की बारिश, रबी फसलों, जलाशयों और 2027 की गर्मी पर नजर रखना जरूरी होगा. हालांकि, 'सुपर अल नीनो' कोई आधिकारिक अलग श्रेणी नहीं है और इसके प्रभावों को लेकर घबराने के बजाय वैज्ञानिक पूर्वानुमानों को समझना ज्यादा जरूरी है.

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नेहा बोरा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नारेबाजी, दीपके बोले- तिरंगा फहराना भी अपराध? प्रदर्शन से पहले गरमाई सियासत

CJP AISA Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में तिरंगा फहराना भी अपराध बना दिया गया है. दीपके ने यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध के बीच की. प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी मौजूद रहीं. उनके बोलने से पहले कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण और अभिनेता प्रकाश राज भी शामिल हुए. इस दौरान SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराकर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. पार्टी ने इस कार्यक्रम को 'लहरा दो तिरंगा मार्च' नाम दिया है.

16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन

CJP ने SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन की घोषणा की है. इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया.

यह मामला कनॉट प्लेस के एक दुकानदार की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया. याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है. यहां प्रदर्शन होने से कारोबार प्रभावित हो सकता है. खासकर वीकेंड के दौरान दुकानदारों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई गई.

दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट को भरोसा दिया कि प्रदर्शन को नियंत्रित रखने के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठाए जाएंगे. अदालत ने पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया. मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी.

व्यापारियों ने जताई कारोबार प्रभावित होने की आशंका

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कनॉट प्लेस में प्रस्तावित मार्च की अनुमति नहीं देने की मांग की थी. उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारियों में चिंता है.

CTI ने दावा किया था कि 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के कारण कारोबार को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हालांकि, यह आंकड़ा संगठन की ओर से किया गया दावा है.

कनॉट प्लेस के दुकानदार ने भी अदालत में कहा कि पिछले एक सप्ताह से कारोबार प्रभावित हो रहा है. ऐसे में प्रस्तावित प्रदर्शन के कारण व्यापारियों को और नुकसान उठाना पड़ सकता है. याचिकाकर्ता के वकील ने प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी.

23 अक्टूबर से 'पीपुल्स अगेंस्ट SIR' अभियान

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत भूषण ने SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के मानकों को लेकर स्पष्टता नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में एक केंद्रीय आईटी सेल के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े फैसले किए जा रहे हैं.

भूषण ने यह भी कहा कि जो लोग SIR के तहत फॉर्म नहीं भरेंगे, उनके नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं. उन्होंने दूसरे शहरों में शिफ्ट हो चुके लोगों के सामने आने वाली परेशानियों का मुद्दा भी उठाया. ये सभी आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है.

CJP ने घोषणा की कि 23 अक्टूबर से वह अन्य संगठनों के साथ मिलकर 'पीपुल्स अगेंस्ट SIR' अभियान शुरू करेगी. इस अभियान के जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे.

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