UP News: 52 रुपये किलो चीनी चाहिए? लखनऊ में यहां योगी सरकार ने की व्यवस्था
UP News: बढ़ती महंगाई के दौर में रसोई का बजट संभालना हर परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है. रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल चीनी के बढ़ते दाम भी आम आदमी की जेब पर लगातार असर डाल रहे थे. इसी बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निवासियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए राजधानी में आम जनता को बाजार भाव से काफी कम कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने का फैसला किया है. अब शहर के लोग सरकारी बिक्री केंद्र पर जाकर सिर्फ 51 और 52 रुपये प्रति किलो के हिसाब से अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी खरीद सकते हैं. सरकार की इस पहल से उन परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा जो त्योहारों और आम दिनों में चीनी के बढ़ते दामों से परेशान थे.
मुख्यमंत्री के निर्देश पर बना राहत का प्लान
इस पूरी व्यवस्था की नींव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद पड़ी. बीते दिनों प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और उनकी कीमतों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में मुख्यमंत्री ने चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के आला अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहनी चाहिए. इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि आम जनता तक यह बुनियादी जरूरत बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के पहुंचे. मुख्यमंत्री के इसी आदेश को जमीन पर उतारते हुए विभाग ने तुरंत राजधानी में विशेष सरकारी बिक्री केंद्र शुरू करने की रूपरेखा तैयार की और इसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया.
गन्ना किसान संस्थान परिसर में खुला बिक्री केंद्र
राजधानी लखनऊ के डालीबाग इलाके में स्थित लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान परिसर को इस खास बिक्री केंद्र के लिए चुना गया है. इस परिसर में उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम और उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ के संयुक्त सहयोग से काउंटर की स्थापना की गई है. इस केंद्र को इस तरह तैयार किया गया है ताकि वहां आने वाले किसी भी खरीदार को लंबी कतारों में न लगना पड़े और आसानी से सामान मिल सके. केंद्र पर विभिन्न वजन के पैकेट तैयार रखे गए हैं ताकि ग्राहक अपनी घरेलू जरूरत और बजट के मुताबिक तुरंत खरीदारी कर सकें.
उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के पैकेट के दाम
सरकारी काउंटर पर उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की तरफ से उपलब्ध कराई जा रही चीनी के दाम काफी किफायती रखे गए हैं. अगर आप इस निगम की चीनी लेते हैं, तो आपको एक किलो का पैकेट 52 रुपये में मिलेगा. इसके अलावा दो किलो का पैकेट लेने पर उसकी कीमत 102 रुपये तय की गई है. जो परिवार एक साथ ज्यादा खरीदारी करना चाहते हैं, उनके लिए पांच किलो का पैकेट 250 रुपये में उपलब्ध है. वहीं हलवाई, छोटे दुकानदार या बड़े परिवारों की सुविधा के लिए पचास किलो की पूरी बोरी 2500 रुपये में दी जा रही है.
संपूर्णानगर चीनी मिल के पैकेटों पर अतिरिक्त बचत
सरकारी काउंटर पर सिर्फ एक विकल्प नहीं है, बल्कि ग्राहकों को और अधिक बचत का अवसर भी दिया जा रहा है. लखीमपुर खीरी जिले की मशहूर सहकारी चीनी मिल संपूर्णानगर की चीनी भी इसी केंद्र पर बेची जा रही है, जिसके दाम निगम की चीनी से भी थोड़े कम हैं. संपूर्णानगर मिल की एक किलो चीनी का पैकेट मात्र 51 रुपये में खरीदा जा सकता है. वहीं दो किलो का पैकेट 102 रुपये में मिल रहा है. इसके पांच किलो वाले पैकेट की कीमत 245 रुपये तय की गई है. यदि कोई ग्राहक पचास किलो का पूरा कट्टा खरीदता है, तो उसे यह मात्र 2400 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे प्रति किलो के हिसाब से सीधी बचत होती है.
खरीदारी का समय और जरूरी नियम
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह बिक्री केंद्र सभी सरकारी कार्यदिवसों में पूरी तरह सक्रिय रहेगा. लोग सुबह 10 बजे से लेकर शाम 5 बजे के बीच किसी भी समय केंद्र पर पहुंचकर चीनी खरीद सकते हैं. शनिवार, रविवार और अन्य घोषित सरकारी छुट्टियों के दिन काउंटर बंद रहेगा. केंद्र पर डिजिटल भुगतान के साथ-साथ नकद भुगतान की भी पूरी सुविधा रखी गई है, जिससे किसी भी नागरिक को सामान खरीदते समय असुविधा का सामना न करना पड़े. केंद्र पर तैनात कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि ग्राहकों के साथ शालीनता से पेश आएं और वजन में पूरी पारदर्शिता रखें.
बाजार की जमाखोरी पर लगेगा सीधा अंकुश
सरकार के इस कदम का दोहरा असर देखने को मिलेगा. पहला फायदा सीधे आम उपभोक्ता को होगा, जिसकी जेब पर पड़ने वाला बोझ कम होगा. दूसरा बड़ा असर खुले बाजार पर पड़ेगा. अक्सर देखा जाता है कि मांग बढ़ते ही कुछ व्यापारी मनमाने दाम वसूलने लगते हैं या जमाखोरी शुरू कर देते हैं. राजधानी के प्रमुख स्थान पर सरकारी दरों पर सस्ती चीनी मिलने से खुले बाजार के दुकानदारों पर भी अपने दाम नियंत्रित रखने का स्वाभाविक दबाव बनेगा. गन्ना विकास विभाग का कहना है कि अगर लोगों की मांग बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में शहर के अन्य प्रमुख इलाकों में भी इसी तरह के अतिरिक्त काउंटर खोले जा सकते हैं. कुल मिलाकर, योगी सरकार की यह पहल राजधानी के लोगों के लिए मिठास और बचत दोनों लेकर आई है.
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ऑटो सेक्टर में आई तेजी! सितंबर में 4.54 लाख यात्री वाहन बिके, दोपहिया वाहनों की बिक्री भी बढ़ी
भारत में घरेलू स्तर पर यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर में सालाना आधार पर 21.8 प्रतिशत बढ़कर 4,54,574 यूनिट्स हो गई है. यह जानकारी इंडस्ट्री बॉडी सियाम की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों में दी गई. पिछले साल सितंबर में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 3,73,347 यूनिट्स थी.
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की ओर से बताया गया कि सितंबर में दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 24.63 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 21.70 लाख यूनिट्स पर था.
सितंबर में डीलरों को भेजे गए तिपहिया वाहनों की संख्या 16 प्रतिशत बढ़कर 98,162 यूनिट्स हो गई है, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 84,635 यूनिट्स था. इससे पहले जारी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (फाडा) के आंकड़ों से पता चला कि सितंबर में घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन बाजार ने अब तक का सबसे ऊंची मासिक हासिल की है. इस दौरान कुल रिटेल बिक्री 3,33,634 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो साल-दर-साल आधार पर 74 प्रतिशत की अधिक है.
सेगमेंट के हिसाब से देखें तो, इलेक्ट्रिक दोपहिया (ई2डब्ल्यू) की रिटेल बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 2,07,314 यूनिट्स पर पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 88.67 प्रतिशत और अगस्त की तुलना में 13.16 प्रतिशत अधिक है. बाजार में इलेक्ट्रिक दोपहिया की हिस्सेदारी बढ़कर 11.6 प्रतिशत हो गई है, जो कि एक साल पहले 8.2 प्रतिशत थी. सितंबर में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों (ईपीवी) की रिटेल बिक्री 36,108 यूनिट्स के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई. इसमें पिछले साल के मुकाबले 94.56 प्रतिशत और पिछले महीने के मुकाबले 17.63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. बाजार में इनकी हिस्सेदारी पिछले साल के 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई है.
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