CJP Press Conference:'भारत को बांग्लादेश बनाने' के बयान पर बवाल, Neha Bora की बौखलाहट कैमरे में कैद
CJP Press Conference:'भारत को बांग्लादेश बनाने' के बयान पर बवाल, Neha Bora की बौखलाहट कैमरे में कैद बांग्लादेश के आंदोलन और छात्र क्रांति को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद नेहा बोरा बुरी तरह घिर गई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने 'भारत को बांग्लादेश बनाने' और आंदोलन से प्रेरणा लेने वाले बयानों पर सीधे सवाल पूछे, तो जवाब देने के बजाय भारी बौखलाहट और नोकझोंक देखने को मिली। #CJPProtest #DelhiProtest #DelhiNews #AkhileshYadav #BJPVsCongress #BJP #Congress #GyaneshKumar #CEC #ElectionCommission #DhruvRathee #AbhijeetDipke #BreakingNews #HindiNews #BreakingNewsHindi#RepublicBharat #PMModi #RahulGandhi #ModiVsRahul #INDIABloc #Congress #BJP #IndiaAlliance #DelhiProtest #CJP #BreakingNews #HindiNews #LiveNews #BreakingNewsHindi #SouravDas #CECGyaneshKumar #ElectionCommission #SIRControversy #VoteChori #DelhiPolice #DelhiProtest #GenZ #PMModi #BreakingNews #HindiNews #ClashAtJantarMantar ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ Disclaimer: Republic Media Network may provide content through third-party websites, operating systems, platforms, and portals (‘Third-Party Platforms’). Republic does not control and has no liability for Third-Party Platforms, including content hosted, advertisements, security, functionality, operation, or availability. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ रिपब्लिक भारत देश का नंबर वन न्यूज चैनल है। देश और दुनिया की जनहित से जुड़ी ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल और मनोरंजन की खबरों का खजाना है । इस खजाने तक पहुंचने के लिए रिपब्लिक भारत से जुड़े रहिए और सब्सक्राइब करिए। ► http://bit.ly/RBharat R. Bharat TV - India's no.1 Hindi news channel keeps you updated with non-stop LIVE and breaking news. Watch the latest reports on political news, sports news, entertainment, and much more. आप Republic Bharat से जुड़ें और अपडेट्स पाएं! ???? Facebook: https://www.facebook.com/RepublicBharatHindi/ ???? Twitter: https://twitter.com/Republic_Bharat ???? Instagram: https://www.instagram.com/republicbharat/ ???? WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va7GPTi7dmecQ2LFH01I ???? Telegram: https://t.me/RepublicBharatHindi ???? LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/republic-bharat/
SIR विवाद पर SC सख्त, राहुल गांधी और INDIA गठबंधन की याचिका पर नोटिस; मार्च के आचरण पर भी उठे सवाल
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चुनावी पारदर्शिता और न्यायिक परिसर की गरिमा, दोनों से जुड़े अहम मुद्दे सामने आए. राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिका पर शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा. वहीं, अदालत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर तक मार्च करने के दौरान एक याचिकाकर्ता के आचरण को लेकर भी सख्त टिप्पणी की.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका पर नोटिस जारी करने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत संबंधित नेताओं के व्यवहार का समर्थन कर रही है. पीठ ने संकेत दिया कि मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम पर संबंधित याचिकाकर्ता को स्पष्टीकरण देना होगा. इस तरह अदालत ने मतदाता सूची से जुड़े कानूनी सवालों और न्यायालय परिसर में हुए आचरण को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखा.
SIR प्रक्रिया पर विपक्ष ने उठाए सवाल
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. याचिका में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और निर्णयों में पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई गई है.
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का बुनियादी हिस्सा है. इसलिए किसी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए. प्रभावित व्यक्ति को जानकारी दी जानी चाहिए और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए.
याचिका में निर्वाचन आयोग के संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों का बूथवार विवरण सामने लाने और नाम हटाने के कारणों की जांच कराने जैसी मांगें भी रखी गई हैं. विपक्षी नेताओं ने प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है.
हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष आना अभी बाकी है. अदालत ने फिलहाल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, इसलिए नोटिस को याचिकाकर्ताओं के सभी आरोपों की पुष्टि नहीं माना जा सकता.
चुनाव आयोग से मांगा गया जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है. अब आयोग को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा.
सुनवाई के इस चरण में अदालत के सामने यह स्पष्ट होना बाकी है कि SIR की प्रक्रिया को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर आयोग क्या जवाब देता है और याचिकाकर्ताओं की मांगों पर आगे किस तरह विचार किया जाता है.
मतदाता सूची से जुड़े इस विवाद का महत्व इसलिए भी है क्योंकि सूची में नाम शामिल होने या हटाए जाने का सीधा संबंध मतदान के अधिकार के इस्तेमाल से है. ऐसे मामलों में पारदर्शी प्रक्रिया, सही रिकॉर्ड और प्रभावित लोगों को उचित अवसर देना महत्वपूर्ण माना जाता है.
कोर्ट मार्च पर अदालत ने जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर तक किए गए मार्च का मुद्दा भी उठा. राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के कई नेता SIR के खिलाफ अपनी मांगें लेकर अदालत पहुंचे थे. इस घटनाक्रम को लेकर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की ओर से आपत्तियां रखी गईं.
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने साफ किया कि अदालत का याचिका पर सुनवाई करना या नोटिस जारी करना, मार्च के दौरान अपनाए गए आचरण को सही ठहराने के समान नहीं है. पीठ ने संकेत दिया कि एक याचिकाकर्ता को अपने व्यवहार पर स्पष्टीकरण देना होगा.
अदालत की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि न्यायिक प्रक्रिया में उठाए गए कानूनी सवालों पर सुनवाई जारी रह सकती है, लेकिन इससे अदालत परिसर में हुए किसी आचरण को स्वतः उचित नहीं माना जाएगा. इस मामले में याचिका की विषयवस्तु और मार्च से जुड़े सवालों पर अलग-अलग विचार किया जाएगा.
आगे की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब मामले में चुनाव आयोग का जवाब और कोर्ट मार्च से जुड़े घटनाक्रम पर मांगा गया स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे. अदालत को यह तय करना है कि SIR को लेकर उठाई गई कानूनी आपत्तियों पर आगे क्या कार्रवाई आवश्यक है और याचिकाकर्ताओं की मांगों पर किस सीमा तक राहत दी जा सकती है.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है. नोटिस जारी होने से सुनवाई आगे बढ़ी है, लेकिन SIR पर रोक लगाने, मतदाता सूची के रिकॉर्ड की जांच कराने या अन्य राहत देने के संबंध में अंतिम निर्णय अदालत के आगे के आदेशों पर निर्भर करेगा.
यह मामला एक ओर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाताओं के हितों से जुड़ा है, तो दूसरी ओर न्यायिक संस्थाओं की गरिमा और अदालत परिसर में जिम्मेदार आचरण के महत्व को भी सामने लाता है. अगली सुनवाई में दोनों पहलुओं पर होने वाली कार्यवाही पर नजर रहेगी.
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