चरनोई की भूमि को बंजर बताकर स्वराज शूटिंग्स को कर दी आवंटित, वहां खड़े हैं दो हजार से ज्यादा वृक्ष, हाई कोर्ट पहुंचा मामला
नीमच जिला प्रशासन ने चरनोई की भूमि को बंजर बता राजस्थान के उद्योगपति को फैक्ट्री विस्तार के लिए आवंटित कर दी, एक पर्यावरण प्रेमी ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगाई तो खुलासा हुआ कि उस जमीन पर दो हजार से ज्यादा वृक्ष खड़े हैं।
खुलासे में सामने आया कि ग्राम सोनियाना में जो जमीन को स्वराज शूटिंग्स को आवंटित की गई थी वह चरनोई की जमीन है और इसी जमीन को सरकारी टीम ने सांठ गांठ कर, दस्तावेजों में हेरफेर कर बंजर और अनुपयोगी बताया। मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद स्वराज शूटिंग्स को मिलने वाली जमीन का मामला अटक गया है।
नीमच जिले के धामनिया-झंझावाड़ा औद्योगिक पार्क में भीलवाड़ा के उद्योगपति मोहम्मद साबिर खान की कंपनी स्वराज शूटिंग्स को फैक्टरी विस्तार के लिए ग्राम सोनियाना में 52 बीघा जमीन आवंटित की गई थी। यह आवंटन वर्ष 2021-22 में तत्कालीन कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने किया था। ग्राम सोनियाना में जिस जमीन को आवंटित किया गया, पटवारी और तहसीलदार की टीम ने बंजर और अनुपयोगी बताया था जबकि जमीन चरनोई की है, जो खनन जमीन के बदले वृक्ष लगाने के लिए दी गई थी।
जिस जमीन को प्रशासन ने बंजर बताया वहां खड़े 2 हजार से ज्यादा पेड़
यह खुलासा हुआ है पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र मेघवाल के प्रयासों से। ग्राम जमुनिया कला के जितेंद्र मेघवाल द्वारा सोनियाना में चरनोई की जमीन पर स्वराज शूटिंग्स कंपनी द्वारा अंधाधुंध तरीके से वृक्ष काटे जाने का विरोध किया ओर इसकी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों को की गई लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो हजारों हरे-भरे वृक्षों को बचाने लिए जितेंद्र मेघवाल ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई साथ एनजीटी में भी शिकायत की गई। हाई कोर्ट में सुनवाई के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और पता चला कि जिस जमीन को प्रशासन की टीम ने बंजर बताया था वहां दो हजार से ज्यादा वृक्ष मौजूद है और जमीन चरनोई की है। यह खुंलासा होने के बाद स्वराज शूटिंग्स को आवंटित जमीन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले चरनोई की भूमि- फिर आवंटन कैसे
तत्कालीन कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने दिनांक 30-5- 2022 को एमपीआईडीसी को आवंटित जमीन को चरनोई की बताते हुए आवंटन निरस्त करते हुए पुन: चरनोई की घोषित की गई। बाद में कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने अपने आदेश को पलटते हुए 23-7- 2021 के आवंटन के आदेश को यथावत रखा।
वन विभाग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
नीमच के वन विभाग द्वारा इस जमीन को लेकर एक रिपोर्ट दी गई। यह रिपोर्ट मौके पर जाकर वन कर्मियों ने तैयार की और बताया कि जमीन पर 2370 वृक्ष सागवान, आंवला और नीम के हैं जो जीवित अवस्था में है, साथ ही 55 वृक्ष जमीन पर गिरे पड़े पाए गए , जो ठूंठ बन गए थे। वन विभाग की रिपोर्ट बताती है कि यह जंगल की जमीन थी और इस जमीन पर दो हजार से ज्यादा जीवित वृक्ष है।
इन्होंने बताई बंजर जमीन- पेश की झूठी रिपोर्ट
वर्ष 2021 में जीरन की तत्कालीन तहसीलदार श्रद्धा त्रिवेदी, राजस्व निरीक्षक पंकज श्रीवास्तव, पटवारी, सीमा पंवार, संदेश चेलावत, हिमांशु तिवारी, सुनील कोरी और सोनियाना के तत्कालीन सरपंच-सचिव ने दिनांक 30-5-2022 को जमीन को बंजर और अनुपयोगी बताकर झूठी रिपोर्ट पेश की। इस मामले में याचिकाकर्ता जितेंद्र मेघवाल ने एफआईआर के लिए नीमच पुलिस अधीक्षक को आवेदन भी दिया है।
फैक्टरी को सौंप दी चरनोई की जमीन
पर्यावरण प्रेमी जितेंद्र मेघवाल का कहना है कि सोनियाना में खनन के बदले इस जमीन को चरनोई के लिए दिया गया था। हमने वहां दो से ढाई हजार पौधे लगाए जो वृक्ष बन गए हैं। वन विभाग ने भी रिपोर्ट वृक्ष होन की रिपोर्ट दी है। चरनोई की जमीन को कैसे स्वराज शुटिंग्स को दी गई। यह आवंटन है, हम हाई कोर्ट पहुंच गए हैं।
एमडी को किया मैसेज, जवाब नहीं आया
जमीन आवंटन को लेकर स्वराज शुटिंग्स के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहम्मद साबिर खान से संपर्क किया गया और उन्हें मैसेज पर पूरा विवरण भेजा गया लेकिन उन्होंने अपना पक्ष रखने के लिए कोई जवाब नहीं दिया।
कमलेश सारड़ा की रिपोर्ट
अंकपात-खाकचौक मार्ग पर होगा चौड़ीकरण, कई मंदिर जद में, पुजारियों ने मांगा दूसरा विकल्प
उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से किया जा रहा है। अलग-अलग मार्गों पर रोड पहले से ज्यादा चौड़ी की जा रही है। इसकी जद में मकान और दुकान से लेकर धर्मस्थल भी आ रहे हैं। ऐसे ही अब अंकपात से खाक चौक की तरफ जाने वाले मार्ग को चौड़ा करने का फैसला लिया गया है। लेकिन अब पुजारी इसका विरोध कर रहे हैं।
इस पूरे मार्ग पर कई सारे पुराने को मंदिर मौजूद है। पहले से ही 45 फीट चौड़ा यह मार्ग 30 मीटर और चौड़ा करने की तैयारी की जा रही है। इसमें लगभग दो दर्जन से ज्यादा मंदिर भी आ रहे हैं। इसी को देखते हुए पुजारियों ने कहा है कि अगर धार्मिक स्थल ही नहीं रहेंगे तो सिंहस्थ किस काम का रहेगा। मांग ना माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
ये मंदिर चौड़ीकरण की जद में
इस चौड़ीकरण की चपेट में उत्तरामुखी हनुमान मंदिर से लेकर, अविघ्न विनायक गणेश मंदिर, षट् विनायक, हांडीफोड भैरव, पुरुषोत्तम मंदिर, नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, बृहस्पतेश्वर महादेव, राम मंदिर, अन्नपूर्णा माता मंदिर, वीर हनुमान, बड़ा राम मंदिर, श्री राम हनुमान मंदिर लक्ष्मण दास जी महाराज, राम मंदिर बलाई समाज धर्मशाला, लाल पत्थर का हनुमान मंदिर, गोपाल धाम, रविदास धाम सहित कई सारे मंदिर आ रहे हैं। इनमें से कुछ मंदिर ऐसे हैं जो बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और अगर चौड़ीकरण किया जाता है तो केवल गर्भगृह बच पाएगा। वहीं कुछ मंदिरों का हिस्सा 6 से 7 मीटर तक प्रभावित हो रहा है। हालांकि अंतिम नपती और सीमांकन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि कितना चौड़ीकरण होगा।
पुजारियों का क्या कहना
चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं मंदिरों के पुजारियों का कहना है कि UDA और प्रशासन को मौके पर आकर संतों और पुजारी के साथ बैठक कर विचार विमर्श करना चाहिए। बातचीत के बाद सर्वसम्मति से जो निर्णय सामने आएगा वह उसमें सहयोग करेंगे। फिलहाल लाल निशान लगाए गए हैं और जल्द ही नोटिस भेजा जाएगा। पुजारियों का कहना है कि अगर बातचीत के दौरान समाधान नहीं निकलता है और मंदिरों को हटाने की कार्रवाई की जाती है तो आंदोलन किया जाएगा। सिंहस्थ के नाम पर प्राचीन मंदिरों का नुकसान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पहले भी हुआ चौड़ीकरण
बता दें कि साल 2004 में भी इस रोड को चौड़ा किया गया था। तब भी सिंहस्थ को लेकर किए गए काम के चलते कई मंदिर के हिस्से सड़क में चले गए थे। पुजारियों का कहना है कि वर्तमान में सड़क पर्याप्त रूप से चौड़ी है। अगर इसे और चौड़ा किया जाएगा तो मंदिरों के प्राचीन स्वरूप पर असर पड़ सकता है। धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को देखते हुए दूसरा विकल्प निकाला जाना चाहिए।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Mp Breaking News









