CMRL मामले में Pinarayi Vijayan को झटका, केरल हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके रिश्तेदारों को झटका देते हुए केरल उच्च न्यायालय ने कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की उनकी याचिकाओं को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति के. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की पीठ ने एकल न्यायाधीश के नौ अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास के आवेदन को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज होने से पहले आरोपी को सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा कि अर्जियां खारिज होने के कारण उनकी अपील भी स्वतः खारिज हो जाती हैं।
उसने कहा कि नौ अक्टूबर के आदेश से ‘‘प्राथमिकी दर्ज किए जाने के विरुद्ध आवेदकों के संवैधानिक और कानूनी राहत मांगने के अधिकार प्रभावित नहीं हुए हैं।’’ अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी अपराध का संज्ञान लिए जाने से पहले तक प्राथमिकी रद्द कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की जा सकती है पीठ ने यह भी कहा कि संज्ञान लिए जाने के बाद, कार्यवाही को रद्द करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 (उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियां) का सहारा लिया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए यह स्पष्ट है कि संबंधित फैसले ने प्राथमिकी दर्ज करने के विरुद्ध आवेदकों के संवैधानिक या वैधानिक राहत के अधिकार को प्रभावित नहीं किया है और ऐसी स्थिति में यह नहीं माना जा सकता कि आवेदकों ने मांगी गई अनुमति देने के लिए प्रथम दृष्टया कोई ठोस दलील दी है।’’ अदालत ने यह भी कहा कि यदि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 की धारा 66(2) के तहत संज्ञेय अपराध का संकेत देने वाले पर्याप्त सबूत और जानकारी उपलब्ध कराता है, तो ऐसे मामले में प्रारंभिक जांच कराने की कोई जरूरत नहीं होती। पीठ ने दोहराया कि भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले आरोपी को सुने जाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
विजयन, वीणा और रियास ने अपनी अपीलों में दावा किया था कि नौ अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से पहले एकल न्यायाधीश द्वारा उनका पक्ष नहीं सुना गया। यह अपील सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (वीएसीबी) की विशेष जांच इकाई-एक द्वारा सोमवार को कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले के संबंध में विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दो प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद दायर की गई थी। केरल उच्च न्यायालय ने नौ अक्टूबर को वीएसीबी को राज्य पुलिस को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपनी जांच और छापेमारी के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर मामला दर्ज करने की मांग की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि सीएमआरएल ने आईटी परामर्श सेवाओं के नाम पर वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया था।
SRFTI Kolkata में छात्रों का आंदोलन तेज, VC के इस्तीफे और हिंसा की जांच की मांग
सत्यजीत राय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) के विद्यार्थियों ने परिसर में हिंसा के विरोध में जारी अनिश्चितकालीन धरने के चौथे दिन बृहस्पतिवार को संस्थान के चेयरमैन सुरेश गोयल को पत्र लिखकर मौजूदा संकट में तत्काल हस्तक्षेप करने और कुलपति के इस्तीफे की मांग की। एसआरएफटीआई छात्र संघ ने 14 अक्टूबर को लिखे एक पत्र में कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उसके सदस्य ‘‘शैक्षणिक गतिविधियां ठप रखने के साथ ही अनिश्चितकालीन धरना’’ जारी रखेंगे। इसमें कहा गया है कि उनकी मांगों में कुलपति संतोष अजमेरा का इस्तीफा, अनुशासनात्मक नोटिस वापस लेना और परिसर में हुई हिंसा की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से जांच कराना शामिल है।
प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान में 28 सितंबर से कक्षाएं स्थगित हैं। छात्र संघ की अध्यक्ष ब्लॉसम हजारिका और उपाध्यक्ष शुभम वायदांडे के हस्ताक्षर वाले पत्र में संस्थान के अधिकारियों और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया है। एसआरएफटीआई के एक अधिकारी ने बताया कि अनुशासनात्मक आधार पर और परिसर की दीवारों पर ‘‘आपत्तिजनक नारे लिखने’’ के आरोप में आठ विद्यार्थियों को प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
उन पर अनुशासन का उल्लंघन करने वाले कुछ पोस्टर लगाने, कुलपति के कक्षाएं फिर से शुरू करने के अनुरोध पर ध्यान नहीं देने और पिछले सप्ताह कुलपति के कमरे में सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया है। एसआरएफटीआई प्रशासन के दावे का खंडन करते हुए विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि 27 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े समूह ‘अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत’ (एबीजीपी) के सदस्यों ने उन पर हमला किया था। ‘बंगीय हिंदू जागरण मंच’ के सदस्यों द्वारा चार अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान परिसर में एक बार फिर झड़प हुई थी।
उन्होंने दावा किया कि इन घटनाओं में कई छात्र घायल हो गए थे। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि संस्थान प्रशासन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और कथित हमलों के बाद पर्याप्त कार्रवाई करने में विफल रहा। उन्होंने दावा किया कि ‘‘जवाबदेही तय करने और संस्थान के अध्यक्ष, कुलपति तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बातचीत करने के लिए बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिले’’।
छात्र संघ ने पत्र में कहा, ‘‘हम अपनी कक्षाओं में लौटना चाहते हैं, शूटिंग और कार्यशालाएं फिर से शुरू करना चाहते हैं और अपनी फिल्में बनाना चाहते हैं।’’
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi











