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सितंबर में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 21.8% बढ़ी, 4.54 लाख यूनिट्स पर पहुंची

भारत में यात्री वाहनों की घरेलू थोक बिक्री में सितंबर में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। उद्योग संगठन सियाम के गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 21.8 प्रतिशत बढ़कर 4,54,574 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में बिक्री इससे कम थी।

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) की ओर से बताया गया कि सितंबर में दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 24.63 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 21.70 लाख यूनिट्स पर था। सितंबर में डीलरों को भेजे गए तिपहिया वाहनों की संख्या 16 प्रतिशत बढ़कर 98,162 यूनिट्स हो गई है, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा 84,635 यूनिट्स था।

कुल रिटेल बिक्री 3,33,634 यूनिट्स

इससे पहले जारी फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (फाडा) के आंकड़ों से पता चला कि सितंबर में घरेलू इलेक्ट्रिक वाहन बाजार ने अब तक का सबसे ऊंची मासिक हासिल की है। इस दौरान कुल रिटेल बिक्री 3,33,634 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो साल-दर-साल आधार पर 74 प्रतिशत की अधिक है।

इलेक्ट्रिक दोपहिया रिटेल बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर

सेगमेंट के हिसाब से देखें तो, इलेक्ट्रिक दोपहिया (ई2डब्ल्यू) की रिटेल बिक्री अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 2,07,314 यूनिट्स पर पहुंच गई, जो पिछले साल की तुलना में 88.67 प्रतिशत और अगस्त की तुलना में 13.16 प्रतिशत अधिक है। बाजार में इलेक्ट्रिक दोपहिया की हिस्सेदारी बढ़कर 11.6 प्रतिशत हो गई है, जो कि एक साल पहले 8.2 प्रतिशत थी।

सितंबर में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों (ईपीवी) की रिटेल बिक्री 36,108 यूनिट्स के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसमें पिछले साल के मुकाबले 94.56 प्रतिशत और पिछले महीने के मुकाबले 17.63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार में इनकी हिस्सेदारी पिछले साल के 5.7 प्रतिशत से बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई है। 

(DISCLAIMER: खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)

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गुजरात: अस्पतालों में मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 18 नई मशीनों को मंजूरी

गांधीनगर, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। मोतियाबिंद सर्जरी की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने 18 अत्याधुनिक फैकोइमल्सीफिकेशन मशीनों की मंजूरी दी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री की ओर से मंजूरी मिलने के बाद सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को लगभग 8.85 करोड़ रुपये से अधिक की मशीनें मिलेंगी।

ये मशीनें अहमदाबाद, सूरत, भावनगर, वडोदरा, जामनगर, मोरबी, गांधीनगर, वडनगर और हिम्मतनगर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बांटी जाएंगी। राज्य सरकार ने कहा कि इन उपकरणों की मदद से मरीजों को आंखों का आधुनिक इलाज मुफ्त में मिल सकेगा।

अहमदाबाद के एमएंडजे इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी को सात मशीनें मिलेंगी जबकि भावनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज और मोरबी के जीएमआआरएस अस्पताल को दो-दो मशीनें दी जाएंगी। सूरत के न्यू सिविल अस्पताल और ओल्ड सिविल अस्पताल, जामनगर के जीजी जनरल अस्पताल, वडोदरा के ईएसआईसी जनरल अस्पताल और गांधीनगर, वडनगर तथा हिम्मतनगर के जीएमईआरएस संस्थानों में से प्रत्येक को एक-एक मशीन दी गई हैं।

इन मशीनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि मोतियाबिंद की सर्जरी के दौरान सर्जन अल्ट्रासाउंड एनर्जी, वैक्यूम और फ्लूइड फ्लो (तरल के बहाव) को नियंत्रित कर सकें, जिससे सर्जरी अधिक सटीक हो सके। इनकी तकनीक मोतियाबिंद के टुकड़ों को तोड़ने और उन्हें बाहर निकालने में मदद करती है। इससे सर्जरी के दौरान सर्जन का नियंत्रण बेहतर होता है और मरीज जल्दी ठीक हो पाता है।

इन उपकरणों के हैंडपीस में एलिप्टिकल मूवमेंट (अंडाकार गति) तकनीक और फ्लूइड फ्लो तथा वैक्यूम को नियंत्रित करने के लिए पेरिस्टाल्टिक पंप सिस्टम लगा है। इससे मोतियाबिंद के कणों को एक सक्शन टिप के जरिए बाहर निकाला जा सकता है। इसमें एक फुट-पेडल कंट्रोल सिस्टम भी है, जिसकी मदद से सर्जन हर ऑपरेशन की जरूरत के हिसाब से अल्ट्रासाउंड एनर्जी, वैक्यूम और फ्लूइड फ्लो को एडजस्ट कर सकते हैं।

इन मशीनों में सीएएसई (चैंबर स्टेबिलाइजेशन एनवायरनमेंट) तकनीक भी शामिल है। यह तकनीक सर्जरी के दौरान आंख के अंदर वैक्यूम और फ्लूइड फ्लो में होने वाले बदलावों को नियंत्रित करती है, जिससे आंख के भीतर दबाव स्थिर रहता है। इससे अचानक दबाव कम होने का खतरा (जिसे पोस्ट-ऑक्लूजन सर्ज कहा जाता है) भी कम हो जाता है।

इसके हैंडपीस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सर्जरी के दौरान जहां छोटा चीरा लगाया जाता है, वहां बहुत अधिक गर्मी पैदा न हो। इससे कॉर्निया में सूजन (कॉर्नियल एडिमा) और सर्जरी के बाद होने वाली अन्य जटिलताओं को कम करने में मदद मिलती है, जिससे मरीज जल्दी ठीक हो सकता है।

राज्य सरकार सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में आंखों की देखभाल की सुविधाओं को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। इसके तहत, पानशेरिया की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इन मशीनों को मंजूरी दी गई।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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