गिरफ्तारी से सुरक्षा की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार, Delhi High Court कल सुनेगा केस
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक महिला पत्रकार की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। पत्रकार ने यह याचिका सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत की शिकायत पर 'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा पाने के लिए दायर की थी। कोर्ट ने इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यह याचिका कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ के समक्ष रखी गई थी। पत्रकार की ओर से पेश वकील ने गुरुवार को ही तत्काल सुनवाई की मांग की और गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा का अनुरोध किया। हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि इस मामले को सुनवाई के लिए कल सूचीबद्ध किया जाएगा। यह मामला 3 अक्टूबर को बूटा सिंह राउंडअबाउट पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, ACP विवेक भगत की शिकायत पर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान ACP को उनकी जाति को लेकर अपमानित किया गया, डराया-धमकाया गया और उनके सरकारी काम में बाधा डाली गई।
इसे भी पढ़ें: दिल्ली प्रदर्शन में NSUI कार्यकर्ता पर हमले को लेकर Kerala Police ने दर्ज की Zero FIR
FIR के अनुसार, नई दिल्ली जिले के कनॉट प्लेस सब-डिवीजन में तैनात ACP भगत ने आरोप लगाया है कि भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान, जब वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर थे, तब एक पत्रकार ने उनकी जाति का जिक्र करते हुए अपमानजनक टिप्पणी की। FIR में रोजी, गजेंद्र और एक अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। अपनी शिकायत में, भगत ने बताया कि वे अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने और उनके ऑपरेटर, कांस्टेबल रवि दहिया ने सुना कि एक पत्रकार उनकी नेमप्लेट और जाति का जिक्र करते हुए, उनकी जाति और ACP के पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर अपमानजनक बातें कह रहा था। वहीं, उस पत्रकार ने इस घटना के संबंध में ACP भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 356(2) और 3(5) के साथ-साथ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(p), 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(s) लगाई गई हैं। दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों की अभी जांच होनी बाकी है और इस पर अदालत द्वारा फैसला लिया जाना है।
न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता, 12 अक्टूबर के आचरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को जमकर लताड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राहुल गांधी के बर्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई और 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए उनके मार्च को लेकर उन्हें फटकार लगाई। कोर्ट ने विपक्ष के नेता से उनके इस कदम के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। राहुल गांधी के विरोध मार्च और उसके बाद मची अफरा-तफरी का जिक्र करते हुए, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने कहा कि "कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन और AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई (अधिसूचना रद्द) करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी केंद्र से जवाब मांगा है।
इसे भी पढ़ें: Rahul की Poster Girl पर बवाल: Bangladesh मॉडल से Anarchy फैलाने की कोशिश, BJP का सनसनीखेज आरोप
CJI ने राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा उन्हें (राहुल गांधी को) स्पष्टीकरण देना होगा। CJI ने आगे कहा कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं डाल सकता। कांग्रेस सांसद और 'इंडिया' गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR को रद्द करने की अपनी मांग को लेकर अभियान तेज कर दिया है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









