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श्रेयस अय्यर ने 3 गेंद शेष रहते हुए डिक्लेयर कर क्यों मान ली हार? कारण जानकर आप भी करेंगे कप्तान को सलाम

IND VS WI: भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही टी-20 सीरीज का चौथा मुकाबला बुधवार को हैदारबाद में खेला गया. इस मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला और मेहमान टीम को बल्लेबाजी करने के लिए बुलाया. जहां, पहले बैटिंग करने आई वेस्टइंडीज की टीम ने ताबड़तोड़ अंदाज में बल्लेबाजी की और 248 रनों का टारगेट सेट किया. इसे चेज करने उतरी टीम इंडिया की पारी में कुछ अजीब ही देखने को मिला. 19.3 ओवर में भारत ने 223 रन बनाए और लक्ष्य से दूर थी.

तभी कप्तान श्रेयस अय्यर ने डगआउट से अपने बल्लेबाजों को वापस लौटने का इशारा किया और क्रीज पर मौजूद अर्शदीप सिंह और मयंक यादव वापस लौट गए. तभी से हर क्रिकेट फैन के जहन में सवाल आ रहा है कि आखिर कप्तान श्रेयस अय्यर ने 3 गेंद शेष रहते हुए ही हार क्यों मान ली? अगर आपके मन में भी ये सवाल है, तो आपको इस खबर में इसका जवाब मिल जाएगा.

19.3 ओवर में भारत ने बनाए 223 रन

हैदराबाद के राजीव गांधी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीता और गेंदबाजी करने का फैसला किया. जहां, पहले बैटिंग करने आई वेस्टइंडीज की टीम ने कप्तान शे होप की शतकीय पारी की बदौलत 248 रनों का लक्ष्य खड़ा किया. इसके जवाब में टीम इंडिया ने शुरुआत तो अच्छी की, लेकिन कैरेबियाई टीम के गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को ज्यादा देर तक क्रीज पर टिकने ही नहीं दिया.

संजू सैमसन ही एकमात्र बल्लेबाज रहे, जिन्होंने अर्धशतक लगाया. वहीं, तिलक वर्मा ने 43 और नितीश कुमार रेड्डी ने 41 रन बनाए. इस तरह भारतीय टीम ने 19.3 ओवर में 9 विकेट के नुकसान पर 223 रन बनाए. आखिर में अर्शदीप सिंह को चोट लग गई और वह रिटायर्ड हर्ट हो गए और टीम इंडिया 24 रन से मैच हार गई.

श्रेयस अय्यर ने क्यों 3 गेंद शेष रहते हुए मान ली हार?

वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे टी20 मैच में भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने एक अनोखा फैसला लिया और 3 गेंदें बाकी रहते ही भारत की पारी घोषित (डिक्लेयर) कर दी. दरअसल, हुआ कुछ ऐसा कि क्रीज पर मौजूद अर्शदीप सिंह ने 20वें ओवर की पहली गेंद पर चौका मारा, फिर दूसरी गेंद उन्होंने डॉट खेली.

फिर, इसके बाद शमार जोसेफ ने बाउंसर गेंद डाली, जो उनकी बाएं हाथ के कंधे में लगी, जिसके बाद फिजियो मैदान पर आए और उपचार दिया. इसके बाद अर्शदीप सिंह ने अगली गेंद खेलने का फैसला किया, लेकिन शमार ने फिर एक घातक बाउंसर डाली, लेकिन वो वाइड चौके के लिए चली गई. उसके बाद अर्शदीप दर्द से कराहने लगे और घुटनों पर बैठ गए. तभी अपने खिलाड़ी को दर्द में देखकर कप्तान श्रेयस अय्यर ने बड़ा फैसला लिया और अपने खिलाड़ियों को वापस आने का इशारा किया.

निर्णायक होगा सीरीज का पांचवां मैच

भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही 5 मैचों की टी-20 सीरीज 2-2 की बराबरी पर आ पहुंची है. ऐसे में अब सीरीज का फैसला पांचवें मैच के नतीजे के साथ ही होगा. निर्णायक मैच बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा, जो 17 अक्टूबर को होने वाला है. देखने वाली बात होगी कि आखिरी मैच में श्रेयस अय्यर की टीम बाजी मारती है या फिर शे होप एंड कंपनी जीत दर्ज करने में कामयाब होती है.

ये भी पढ़ें: 'मुझे कुछ दिक्कतें आ सकती हैं...', कप्तान शे होप मैच जीतने के बाद ये क्या बोल गए, वायरल हुआ बयान

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Explainer: हिंदू से मुस्लिम बने तो नहीं मिलेगा आरक्षण? सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से समझें किसे मिलेगा लाभ और किसे नहीं...

Supreme Court reservation verdict 2026: धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण का लाभ लेने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को अहम फैसला सुनाया है. दरअसल, शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी. हाईकोर्ट ने इस्लाम अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण देने से जुड़ी राज्य सरकार की अधिसूचना रद्द कर दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में स्पष्ट किया कि केवल धर्म बदल लेने के आधार पर कोई व्यक्ति पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण का दावा नहीं कर सकता. अब कोर्ट के इस फैसले ने धर्मांतरण और आरक्षण के संबंध पर एक नई बहस शुरू कर दी है. आइए आपको इस खबर में बताते हैं कि क्या शीर्ष अदालत के इस आदेश का मतलब है कि धर्म बदलने वाले हर व्यक्ति का आरक्षण खत्म हो जाएगा या नहीं? 

सुप्रीम कोर्ट ने ताजा फैसले में क्या कहा?

जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की अपील खारिज करते हुए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. बता दें ये मामला उन लोगों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण देने से जुड़ा था जिन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया था. अदालत के निर्णय मुताबिक हिंदू सामाजिक व्यवस्था से दूसरे धार्मिक-सामाजिक ढांचे में जाने भर से किसी व्यक्ति की पिछड़ेपन से जुड़ी पात्रता अपने आप दूसरी आरक्षण श्रेणी में स्थानांतरित नहीं हो जाती है. केवल धर्म परिवर्तन को आरक्षण पाने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता.

आखिर यह पूरा विवाद शुरू कैसे हुआ?

बता दें यह पूरा मामला तमिलनाडु सरकार की उस अधिसूचना से जुड़ा था जिसके जरिए दूसरे धर्मों के कुछ पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, विमुक्त समुदायों और अनुसूचित जातियों से आने वाले इस्लाम अपनाने वाले लोगों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में शामिल कर आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था की गई थी. इस व्यवस्था को ही मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. मद्रास हाईकोर्ट ने सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया था. इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन शीर्ष अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को उसकी अपील खारिज कर दी. इस तरह अब इस मुद्दे हाईकोर्ट का फैसला ही बरकरार रहेगा.

क्या धर्म बदलते ही हर तरह का आरक्षण खत्म हो जाएगा?

इस फैसले को इस तरह समझना सही नहीं होगा. ताजा मामला तमिलनाडु में पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ लेने से संबंधित है. इसका मतलब यह नहीं है कि धर्म परिवर्तन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए सभी आरक्षण श्रेणियों के नियम एक जैसे हो गए हैं. आरक्षण की पात्रता इस बात पर निर्भर करती है कि संबंधित व्यक्ति किस श्रेणी में आता है, उस श्रेणी के लिए क्या कानूनी प्रावधान हैं और संबंधित राज्य में कौन-से नियम लागू हैं. 

अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का क्या नियम है?

अनुसूचित जाति के दर्जे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी अहम फैसला दे चुका है. बता दें शीर्ष अदालत ने 24 मार्च 2026 को चिंथाडा आनंद बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में अपना निर्णय देते हुए कहा था कि संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म मानने वालों तक सीमित है. अदालत ने स्पष्ट किया था कि इन धर्मों के अलावा किसी दूसरे धर्म को मानने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का दर्जा बरकरार नहीं रख सकता है. अदालत ने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति के दर्जे पर आधारित कानूनी लाभ और संरक्षण उसी व्यक्ति को मिल सकते हैं जो कानून के अनुसार इस श्रेणी का सदस्य हो. बता दें ये याचिका ईसाई धर्म अपनाने वाले एक व्यक्ति ने दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने उस समय अपना​ डिटेल आदेश पारित किया था. 

क्या धर्म परिवर्तन के बाद जाति प्रमाणपत्र मान्य रहेगा?

सिर्फ जन्म के आधार पर जारी जाति प्रमाणपत्र होने से यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि व्यक्ति धर्म परिवर्तन के बाद भी हर स्थिति में अनुसूचित जाति के लाभ लेने का पात्र रहेगा. बता दें सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2026 के फैसले के अनुसार अनुसूचित जाति का दर्जा निर्धारित करते समय व्यक्ति द्वारा वर्तमान में माने जा रहे धर्म को भी देखा जाएगा. यदि वह संविधान के निर्धारित प्रावधानों के तहत अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं रह जाता तो उस दर्जे पर आधारित आरक्षण और अन्य कानूनी लाभों का दावा नहीं किया जा सकता.

इस फैसले का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

कानून के जानकारों की मानें तो तमिलनाडु के ताजा मामले का सीधा संबंध पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण की पात्रता से है. इसका असर केवल उन लोगों पर पड़ सकता है जो केवल धर्म परिवर्तन के आधार पर इस श्रेणी में आरक्षण पाने का दावा करते हैं. जबकि​ अनुसूचित जाति के दर्जे से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का मार्च 2026 का फैसला अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लागू होता है.

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जिम्बाब्वे सीरीज से पहले भारतीय बैटर ने लिया संन्यास, सोशल मीडिया पर लिखा स्पेशल मैसेज

Poonam Raut Retire: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी बल्लेबाज पूनम राउत ने इंटरनेशनल क्रिकेट के सभी प्रारूपों से तत्काल प्रभाव से संन्यास ले लिया है. भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 सीरीज की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले 37 वर्षीय पूनम ने सोशल मीडिया के जरिए अपने इस फैसले की घोषणा की. उन्होंने 2009 से 2021 के बीच भारत के लिए 4 टेस्ट, 73 वनडे और 35 टी20 मैच खेले. उन्होंने अपने शानदार सफर के लिए मुंबई क्रिकेट संघ और प्रशंसकों का आभार जताया है. Thu, 15 Oct 2026 22:54:26 +0530

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