Rajasthan News: राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल, एक शिक्षक पर 150 बच्चे, 35% युवा शिक्षा और रोजगार दोनों से दूर!
Rajasthan News: राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. राज्य के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी देखी गई. इसने युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है. मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, कई सरकारी स्कूलों में एक शिक्षक पर करीब 150 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है. वहीं, 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 35.28 प्रतिशत, यानी लगभग 77.61 लाख युवा ऐसे हैं जिनके पास शिक्षा से जुड़े रहने के कोई अवसर नहीं है, न ये लोग रोजगार कर रहे हैं और न ही किसी कौशल प्रशिक्षण का हिस्सा हैं. राजस्थान की यह स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी अधिक बताई जा रही है. ऐसे में भजनलाल सरकार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि युवाओं का भविष्य कौन से अंधेरे में जा रहा है और सरकार क्यों इसका समाधान नहीं निकाल पा रही है.
आखिर सबसे मजबूत नींव कैसे पड़ गई कमजोर?
शिक्षा किसी भी राज्य के विकास की सबसे मजबूत नींव कहलाती है. लेकिन जब एक शिक्षक को 150 बच्चों की पढ़ाई का दायित्व निभाना पड़े, तब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना ही नामुमकिन होता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राज्य के सरकारी स्कूल पर्याप्त शिक्षकों, संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं से लैस हैं?
न नौकरी का कोई ठिकाना!
शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बीच प्रभावी तालमेल का अभाव इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है. राजस्थान के लाखों युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं, जबकि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे युवा भी मौजूद हैं, जो बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं. इससे राज्य में बेरोजगारी के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं.
क्यों नहीं हुई शिक्षकों की भर्तियां?
यह स्थिति प्रशासनिक स्तर पर भी कई प्रश्न खड़े करती है. यदि सालों तक पढ़ाई करने के बाद शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं तो उनकी भर्ती समय पर क्यों नहीं हो पाई? जिन स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहां और शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई? क्या राजस्थान के शिक्षा विभाग ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त योजना नहीं बनाई?
स्किल डेवलेपमेंट कोर्सेज के लिए भी कोई इंतजाम नहीं
स्किल डेवलेपमेंट के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक देखी गई है. जब लाखों युवा किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम से नहीं जुड़े हैं तो यह सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि सरकारी कौशल विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ कितने युवाओं को मिल रहा है. क्या इन योजनाओं की पहुंच सीमित है या फिर उनकी प्रभावशीलता पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है?
शिक्षा से वंचित युवा कैसे बनेंगे देश का भविष्य?
शिक्षा विशेषज्ञ लगातार यह सुझाव देते रहे हैं कि सिर्फ स्कूल और कॉलेज खोलना पर्याप्त नहीं है. क्वालिटी एजुकेशन, मॉडर्न करिक्यूलम, उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग और रोजगार से जुड़ी नीतियों का बेहतर समन्वय होना बहुत जरूरी है. अगर हमारी युवा कड़ी मजबूत नहीं होगी तो बड़ी संख्या में युवा शिक्षा और रोजगार दोनों से वंचित रह जाएंगे और ये देश के उज्जवल भविष्य पर अंकुश लगा सकती है.
सामान्य शिक्षा से ज्यादा जरूरी है रोजगार युक्त ट्रेनिंग
प्रदेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ नामांकन बढ़ाना नहीं है बल्कि युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार की एक मजबूत क्रम से जोड़ना भी है. इसके लिए शिक्षकों की भर्ती में तेजी, स्कूलों में संसाधनों का विस्तार, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पहुंच को बढ़ाना और employment oriented शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होगी.
कब तक चुप रहेगा प्रशासन?
छात्रों की राज्य सरकार और प्रशासन से यह अपेक्षा है कि वे इन आंकड़ों को सिर्फ रिपोर्ट का हिस्सा मानकर न छोड़ें, बल्कि इनके आधार पर ठोस और सुधारात्मक कदम समय रहते उठाएं. क्योंकि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती ही आने वाले सालों में राजस्थान की आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक प्रगति को नई दिशा दे सकेगी.
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