Gold Silver Rate 15 October : सोने में उछाल, चांदी में भी तेजी, ये है भोपाल-इंदौर का गुरुवार का लेटेस्ट रेट
नवरात्रि के पांचवें दिन फिर सोने-चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। आज, 15 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव बढ़कर 1,47,530 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। चांदी की कीमत 2,09,034 रुपये प्रति किलो पर बनी हुई है।
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) पर 24 कैरेट सोने का भाव 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 2.15 लाख रुपये प्रति किलो पर बनी हुई है। गुडरिटर्न्स पर 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,590 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है, वहीं चांदी 2,30,000 रुपये प्रति किलो के दायरे में ट्रेड कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,167.70 डॉलर प्रति औंस और चांदी 59.17 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है।
भोपाल और इंदौर में ताजा भाव
24 कैरेट सोने का भाव 1 लाख 47 हजार 490 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया है । गहनों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला 22 कैरेट सोने का रेट 1 लाख 35 हजार 200 रुपये बनी हुई है । 18 कैरेट सोने का दाम 1 लाख 10 हजार 630 रुपये प्रति 10 ग्राम है। चांदी की कीमत 2 लाख 30 हजार रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही है।
अन्य बड़े शहरों में भाव
दिल्ली, जयपुर, चंडीगढ़ और लखनऊ में 24 कैरेट सोना 1 लाख 47 हजार 590 रुपये, 22 कैरेट 1 लाख 35 हजार 300 रुपये और 18 कैरेट 1 लाख 10 हजार 730 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है।
मुंबई, पुणे, नागपुर, जयपुर, दिल्ली और लखनऊ में चांदी का भाव करीब 2,30,000 रुपये प्रति किलो बना हुआ है। इसके अलावा चेन्नई, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और केरल में कीमतें बढ़ी हुई है। एक किलो चांदी की कीमत करीब 2,35,000 रुपये बताई जा रही है।
वैश्विक तनाव, डॉलर इंडेक्स की चाल और कच्चे तेल में हो रहे बदलाव का सीधा असर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट पर देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत $104.53 से $105.50 प्रति बैरल और WTI क्रूड की कीमत $94.24 से $94.64 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 102 के आसपास मजबूत बना हुआ है। अमेरिका में महंगाई बढ़ने और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने को लेकर मिल रहे संकेतों से डॉलर को मजबूती मिल रही है। फिलहाल निवेशक सतर्क हैं और अक्टूबर अंत में होने वाली बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। आरबीआई द्वारा उठाए गए कदमों के बाद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ा संभला है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जब तक अमेरिका-ईरान तनाव शांत नहीं होता और वैश्विक सेंट्रल बैंक ब्याज दरों पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाते, तब तक सोने-चांदी में उठापटक बनी रहेगी।
सोना खरीदने से पहले पढ़ लें ये बातें
शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार द्वारा घोषित अवकाश के दिनों में नए भाव जारी नहीं किए जाते हैं, इस दौरान बाजार बंद रहता है। शुक्रवार शाम को बंद हुए रेट ही शनिवार-रविवार को मान्य होते हैं। सोना खरीदते समय हमेशा BIS हॉलमार्क और HUID कोड जरूर जांचें। हॉलमार्क के निशान में BIS लोगो, कैरेट/शुद्धता, HUID नंबर और सेंटर मार्क होता है।
24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999, 22 कैरेट पर 916 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है। 24 कैरेट गोल्ड 99.9% शुद्ध होता है और 22 कैरेट में 91.6% शुद्धता ( 8.4% अन्य धातु जैसे तांबा, चांदी, जिंक) होती है।
नोट- ऊपर दी गई सोने-चांदी की कीमतों में जीएसटी, टीसीएस और मेकिंग चार्ज जैसे अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं, इसलिए शोरूम या स्थानीय बाजार से आभूषण खरीदते समय कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है। सटीक दरों के लिए अपने स्थानीय जौहरी या ज्वैलर्स शॉप से संपर्क करें।
सऊदी की वो भूल जो करा रही फजीहत, अंसारुल्लाह कैसे चढ़ बैठे, ट्रंप की धकधकी क्यों बढ़ी?
यमन से जिस तरह से प्रतिकार अंसारुल्लाह हूती कर रहे हैं वो सऊदी अरब के लिए गले की फांस बनता चला जा रहा है। मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब की हालत ऐसी हो गई है जैसे किसी शख्स ने अपनी सारी एनर्जी और वक्त घर के लिए बेहतर ताले और अलार्म बनाने, बाहर से बुलाने और लगाने में खर्च कर डाले। लेकिन अब जब वक्त आया तो ताले टूट गए हैं। ताले काम नहीं आ रहे हैं। अलार्म बज नहीं रहे हैं। जब घर तक धावा बोल दिया गया तो अब इस्लामाबाद, अंकारा, वाशिंगटन और लंदन में ताला बनाने वालों से पूछ रहा है सऊदी कि क्या उनके पास कुछ बेहतर है। मिडिल ईस्ट की सऊदी हूती जंग पर नजर रख रहे एक्सपर्ट तो यही कहते हैं। सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर 3 महीनों में सऊदी अरब हूतियों या अंसारुल्लाह से पार क्यों नहीं पा सका? रॉयल सऊदी एयरफोर्स एक ऐसी ताकत है जिसे जीता जाना बेहद मुश्किल है। बरसों से अमेरिका सऊदी अरब को वो फाइटर जेट और डिफेंस सिस्टम देता रहा है जिसके लिए दुनिया भर की एयरफोर्स तरसती है। सऊदी के पास F-15 एस एफ-15 ईगल का एडवांस वेरिएंट है। इतनी तादाद में कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा F1-15 बेड़ा वह बन जाता है जो सिर्फ अमेरिकी एयरफोर्स के बाद दुनिया में दूसरा है। इतना ही नहीं एफ-15 ऐसे में एपीजी 63 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन रडार कंप्यूटर आर्किटेक्चर डिजिटल फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल जैसी सुविधाएं सऊदी के पास हैं।
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F-15 के बेड़े के साथ सऊदी अरब रॉयल एयरफोर्स के पास यूरो फाइटर, टाइफोन, टोरनेडो और टैंकरों, इलेक्ट्रॉनिक जंगी जहाज और खुफिया जानकारी हासिल करने के प्लेटफार्मों का एक पूरा बुनियादी ढांचा है। जिसका सपना उस ख्ते के बाकी देशों की एयरफोर्स बस देख ही सकती हैं। उसे हासिल नहीं कर सकती। लेकिन यमन में अंसार उल्लाह के कंट्रोल वाले इलाके पर सऊदी एयरफोर्स कहर तो बरपा रही हैं। मगर आरोप लग रहा है कि ये अंसारुल्ला के ठिकाने हैं ही नहीं बल्कि सिविलियन इलाके हैं। डिफेंस एक्सपर्ट कहते हैं कि सऊदी एयरफोर्स जब यमन में अंसार उल्लाह के ठिकानों और हथियारों के जखीरे वाली पहाड़ियों पर हमला कर रही हैं तो पहाड़ियों से उठते धुएं और धूल के गुबार को देखकर तो ऐसा लगता है कि भारी तबाही हुई है। लेकिन हकीकत यह है कि यह सिर्फ उस पहाड़ की ऊपरी सतह होती है। दरअसल पहाड़ों में छेद बनाए गए हैं और उनके भीतर कई कई सुरंगे हैं। सऊदी एयरफोर्स सिर्फ उसके ऊपरी हिस्से पर बम गिराकर निकल जाती है। उसके महंगे हथियार जाया हो जाते हैं। लेकिन अंसारुल्ला लड़ाकों का बुनियादी ढांचा वहीं का वहीं रहता है।
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जानकार कहते हैं कि इसके लिए हमें यमन में अंडरग्राउंड ढांचे के इतिहास को समझना होगा। जिसमें अंसारुल्लाह ने बरसों से मेहनत की है और इसे डेवलप किया हुआ है। टूटे-फूटे इलाके, चट्टानें और घाटियां उन्हें कुदरती सेफ जोोन या गलियारे देती हैं। सऊदी वायुसेना सुरंग के प्रवेश द्वारों यानी एंट्री पॉइंट पर बमबारी कर रही है। यहूतियों के लिए कुछ घंटों का खेल है। उनके इंजीनियर्स और एक्सपर्ट कुछ ही घंटों में उस नुकसान की भरपाई कर लेते हैं। उसे दुरुस्त कर देते हैं। मीडिया रिपोर्ट बताती है कि जब अंसारुल्ला तहरीक ने यमन में साल 2014-15 में सरकार बनाई और सना को राजधानी बनाया और उस पर कंट्रोल हासिल किया तो उन्होंने सबसे पहले अपने डिफेंस के बुनियादी ढांचे को विरासत में लिया जिसमें सैन्य अड्डे, गोला बारूद, डिपो, कमांड सेंटर और तकनीकी सुविधाएं शामिल हैं, जो 1970 की दहाई से बन रहे थे। क्योंकि पहले भी यमन में लंबी जंगे चली हैं और यमनी आर्म फोर्स ने जमीन के अंदर सुरंगों पर काफी मेहनत कर रखी थी। उनमें से कई तो सोवियत और चीनी मदद से मिडिल ईस्ट में पकड़ बनाए रखने के लिए कोल्ड वॉर के वक्त में बनाई गई थी। इसके उलट सऊदी एयरफोर्स ने खुद को लंबे टारगेट के लिए तैयार किया था।
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