DK Shivakumar का बड़ा बयान, मंत्री पद नहीं मिलने पर इस्तीफा देने वालों की मांग मिनटों में होगी मंजूर
बेंगलुरु, चार अगस्त कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार में जगह नहीं मिलने से नाराज विधायकों द्वारा इस्तीफे की धमकी दिये जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए मंगलवार को कहा कि पार्टी अहम है और अगर कोई इस्तीफा देता है, तो उसे कुछ ही मिनटों में स्वीकार कर लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नाराज विधायकों से धैर्य रखने और अवसर का इंतजार करने की अपील करते हुए कहा कि सरकारी बोर्ड और निगमों में जल्द ही पद भरे जाएंगे। शिवकुमार ने विधायकों द्वारा इस्तीफ देने की धमकी के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, ‘‘मुझे जो कहना था, मैंने कह दिया है... राजनीति में इस्तीफे होते रहते हैं।
इस्तीफा देने वालों को कोई रोक नहीं सकता। अगर वे पार्टी और अपने भविष्य को चाहते हैं, तो पार्टी जरूरी है। अगर पार्टी है, तो बाकी सब कुछ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं भी इस्तीफ़ा दे सकता था क्योंकि धर्म सिंह और सिद्धरमैया के मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे मंत्री नहीं बनाया गया था।
क्या परमेश्वर (उप-मुख्यमंत्री) और मैंने सब्र नहीं रखा? जब वीरेंद्र पाटिल मुख्यमंत्री थे, तब बंगारप्पा, खरगे (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे)और धर्म सिंह को मंत्री नहीं बनाया गया था। क्या बाद में बंगारप्पा और सिंह मुख्यमंत्री नहीं बने?
इंसान को सब्र रखना चाहिए।’’ मुख्यमंत्री ने व्यक्ति से अधिक पार्टी को अहम बताते हुए कहा, ‘‘अगर कोई इस्तीफा देता है, तो मैं कुछ ही मिनटों में उसे स्वीकार कर लूंगा।
Rajya Sabha में पेश हुआ Birth and Death Registration संशोधन विधेयक
नयी दिल्ली, चार अगस्त सरकार ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण संबंधी कानून में संशोधन करने के प्रावधान वाला विधेयक मंगलवार को राज्यसभा में चर्चा एवं पारित करने के लिए पेश किया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 चर्चा और पारित करने के लिए उप सभापति हरिवंश की अनुमति से पेश किया विपक्षी सदस्य चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। बीते 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दी थी।
इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में और संशोधन करना है, ताकि विलंब से होने वाले पंजीकरण के प्रावधानों को और अधिक कड़ा बनाया जा सके। मौजूदा प्रावधानों के तहत यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अथवा किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है। विधेयक में देरी की अवधि के आधार पर दो-स्तरीय मंजूरी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।
लोकसभा ने 31 जुलाई को जन्म और मृत्यु के पंजीकरण संबंधी कानून में संशोधन करने के प्रावधान वाले विधेयक को विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित कर दिया था।
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