Los Angeles Mayor Election: भारतीय-अमेरिकी Nithya Raman ने Karen Bass पर बनाई बढ़त
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 15 अक्टूबर केरल में जन्मीं नित्या रमन अमेरिका के लॉस एंजिलिस में मेयर पद के चुनाव में अपनी पूर्व राजनीतिक सहयोगी एवं मौजूदा मेयर कैरेन बास पर बढ़त बनाए हुए हैं। इस चुनाव से पहले दोनों उम्मीदवारों के बीच टेलीविजन पर बहस हुई थी। अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर लॉस एंजिलिस में मंगलवार रात हुई इस बहस के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी की दोनों नेताओं बास (73) और रमन (45) के बीच बेघर लोगों की समस्या, पुलिस विभाग के नेतृत्व और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर तीखी बहस हुई।
तीन नवंबर को होने वाले चुनाव में यदि रमन की जीत होती है तो वह लॉस एंजिलिस की पहली भारतीय-अमेरिकी मेयर होंगी। ‘डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका’ आंदोलन से जुड़ी रमन पिछले छह साल से लॉस एंजिलिस की नगर परिषद की सदस्य हैं। रमन ने मेयर पद के चुनाव में उतरने का फैसला करने से पहले बास को दोबारा चुने जाने का समर्थन किया था लेकिन बहस में उन्होंने उन पर आरोप लगाया कि पिछले साल जनवरी में जब शहर भीषण आग से जूझ रहा था, तब वह वहां मौजूद नहीं थीं और अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहीं।
बास ने भी एक घंटे तक चली बहस में रमन पर तीखे हमले किए। उन्होंने रमन को ‘‘गैर-गंभीर और निर्णय लेने में असमर्थ’’ बताते हुए कहा कि वह शहर का सर्वोच्च पद संभालने के लिए तैयार नहीं हैं। रमन ने पलटवार करते हुए कहा कि लॉस एंजिलिस ‘‘गिरावट, कुप्रबंधन या बहानेबाजी के चार और साल बर्दाश्त नहीं कर सकता।’’ केरल में 28 जुलाई 1981 को जन्मीं रमन छह साल की उम्र में अमेरिका के लुइसियाना चली गई थीं।
उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से राजनीतिक सिद्धांत में स्नातक और फिर मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआईटी) से शहरी नियोजन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ गवर्नमेंटल स्टडीज’ की ओर से किए गए एक सर्वेक्षण में रमन, मंगलवार रात हुई बहस से पहले बास से 11 प्रतिशत अंक आगे थीं। यह सर्वेक्षण ‘लॉस एंजिलिस टाइम्स’ के सहयोग से किया गया था।
चुनाव के संभावित नतीजों का अनुमान लगाने वाले मंच ‘कल्शी’ ने बहस के एक दिन बाद बुधवार को रमन की जीत की संभावना 56 प्रतिशत और बास की जीत की संभावना 45 प्रतिशत बताई। लॉस एंजिलिस में मेयर का चुनाव गैर-दलीय व्यवस्था के तहत होता है। प्रारंभिक चुनाव में सभी उम्मीदवार हिस्सा लेते हैं और यदि किसी को 50 प्रतिशत से अधिक मत नहीं मिलते, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवार अगले चरण में पहुंचते हैं, चाहे वे एक ही पार्टी से जुड़े हों।
दो जून को हुए प्रारंभिक चुनाव में बास को 34.3 प्रतिशत, रमन को 29 प्रतिशत और रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े स्पेंसर प्रैट को 25.5 प्रतिशत वोट मिले थे। किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिलने के कारण सबसे अधिक मत पाने वाली बास और रमन के बीच तीन नवंबर को अंतिम मुकाबला होगा।
S Jaishankar ने अबू धाबी में छोटे समूहों के सहयोग पर दिया जोर, वैश्विक सुधार जरूरी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के अनुरूप बहुपक्षीय संस्थानों में तत्काल सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि देशों के छोटे समूहों के बीच सहयोग बढ़ाकर इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। जयशंकर ने बुधवार को अबू धाबी में आयोजित ‘रायसीना डायलॉग’ के पश्चिम एशिया संस्करण के एक सत्र में यह बात कही। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ ‘भविष्य की दुनिया : शक्ति, उद्देश्य और संभावनाएं’ विषय पर चर्चा में हिस्सा लिया।
जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की रफ्तार लगातार बढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि यह ‘‘लंबे समय से जारी रुझानों और अचानक सामने आने वाली घटनाओं’’ दोनों का परिणाम है तथा ऐसे में देश अपनी-अपनी परिस्थितियों के अनुसार नयी साझेदारियां और अन्य विकल्प तलाश रहे हैं। जयशंकर ने इस चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस प्रक्रिया में नयी साझेदारियों और नए विकल्पों की तलाश स्वाभाविक है।’’ उन्होंने कहा कि इसके लिए देशों को अपने परंपरागत एवं सहज दायरे से बाहर निकलकर अपनी रणनीतिक समझ को और विकसित करना होगा। जयशंकर ने जोर देकर कहा, ‘‘बहुपक्षवाद में सुधार की तत्काल जरूरत है।
देशों के छोटे समूहों के बीच सहयोग (मिनीलैटरलिज्म) मजबूत करके इसमें मदद की जा सकती है।’’ ‘मिनीलैटरलिज्म’ का अर्थ कुछ खास मुद्दों से निपटने के लिए अपेक्षाकृत कम देशों के समूह के बीच सहयोग से है। जब बड़े बहुपक्षीय मंचों पर आम सहमति बनाना मुश्किल होता है, तब इस तरह के छोटे समूहों के जरिए देश अधिक प्रभावी ढंग से मिलकर काम कर सकते हैं। जयशंकर ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच मजबूत हुई साझेदारी इस बात का उदाहरण है कि देश बदलते वैश्विक माहौल के अनुसार किस तरह कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में भारत और यूएई के बीच साझेदारी इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि हमारे दोनों देशों ने बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप किस तरह कदम उठाए हैं।’’ जयशंकर ने शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक भी की, जिसे उन्होंने ‘‘सौहार्दपूर्ण और सार्थक’’ बताया। दोनों नेताओं ने भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना के अनुरूप द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। जयशंकर भारत और यूएई के द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा के लिए तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को यहां पहुंचे।
भारत और यूएई ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाया है। मई 2022 में लागू हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) से दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने में मदद मिली है। यूएई खाड़ी क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार भी है।
खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं। इसके अलावा, यूएई भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और निवेश का एक प्रमुख स्रोत है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, भारतीय प्रवासी समुदाय यूएई में सबसे बड़ा जातीय समुदाय है और देश की कुल आबादी में उसकी हिस्सेदारी लगभग 35 प्रतिशत है।
यूएई में रहने वाले लगभग 15 प्रतिशत प्रवासी भारतीय अबू धाबी अमीरात में रहते हैं, जबकि बाकी दुबई समेत अन्य छह अमीरात में रहते हैं। यूएई में रहने वाले भारतीयों में केरल के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। इसके बाद तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लोगों का स्थान है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और अन्य राज्यों के लोग भी यहां रह रहे भारतीय समुदाय का बड़ा हिस्सा हैं।
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