पिता ने 2 साल के बेटे को पेट्रोल डालकर जलाया:हत्या के सबूत मिटाने शव दफनाया; अकेले परवरिश नहीं करना चाहता था
गुजरात के वाव-थराद जिले में एक व्यक्ति ने अपने 2 साल के बेटे पर पेट्रोल डालकर उसे जिंदा जला दिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी बच्चे को बोझ मानता था। घटना मंगलवार को जिले के सुईगाम तालुका में हुई। आरोपी अशोक रावल को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने बताया कि रावल ने बच्चे को आग लगाने के बाद अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अशोक के चाचा ने दर्ज करवाई FIR सुइगाम के रावलवास में रहने वाले बाबूभाई लखमनभाई रावल ने अपने भतीजे और हत्यारे अशोक जीताभाई रावल के खिलाफ सुइगाम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। आरोपी अशोक रावल की पत्नी झगड़े के बाद पिछले 3 महीने से मायके में थी। अशोक बेटे के साथ अकेला रह रहा था। पत्नी के न होने से अशोक को बच्चे की देखभाल करना मुश्किल लगने लगा था। 13 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे उसने बेटे नवघन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। फिर वह उसे अस्पताल ले गया, लेकिन बच्चे की मौत हो गई। असलियत छुपाने शव दफनाया, पुलिस ने खोदकर निकाला बच्चे की मौत की असलियत सामने न आ सके, इसके लिए अशोक ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर बच्चे के शव को सामुदायिक श्मशान घाट में दफनाया और अंतिम संस्कार किया। हालांकि, बाद में जब अशोक के चाचा बाबूभाई रावल को इस पूरी बात का पता चला, तो वे हैरान रह गए और तुरंत सुईगाम पुलिस स्टेशन जाकर अपने भतीजे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने श्मशान घाट से बच्चे का शव खोदकर निकाला और उसे अपने कब्जे में ले लिया। पूछताछ के दौरान अशोक ने अपने बेटे की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें…. किड्स जोन में खेल रहे बच्चे को बेरहमी से पीटा:बच्चे ने कान पकड़कर माफी मांगी; फिर भी नहीं माना, सूरत की घटना गुजरात के सूरत की अलथाण सोसायटी में एक शख्स ने छोटी सी बात पर 9 साल के बच्चे को बेरहमी से पीट दिया। थप्पड़ों से बच्चा जमीन पर गिर गया। इसके बाद भी आरोपी ने उसे कई थप्पड़ जड़े, जिससे बच्चे के कान में गंभीर चोटें आ गईं। बच्चे की मां ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। पढ़ें पूरी खबर…
पटाखों पर बैन मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:CJI ने कहा था- पटाखों पर बैन लगाना नामुमकिन, कम प्रदूषण वाले तरीकों से त्योहार मनाएं
सुप्रीम कोर्ट में आज दिल्ली-NCR में पटाखों पर रोक लगाने की मांग पर सुनवाई होगी। सोमवार को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था- पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाना मुमकिन नहीं है। लेकिन, 24 घंटे आतिशबाजी की इजाजत भी नहीं दी जा सकती। लोगों के स्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन जरूरी है। CJI सूर्यकांत की बेंच ने लोगों से कम प्रदूषण वाले तरीकों से त्योहार मनाने की अपील करते हुए कहा था - पटाखे चलाने के लिए समय तय करना होगा, जिससे कि त्योहार भी मनाया जा सके और लोगों को परेशानी भी न हो। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) अपराजिता सिंह ने कहा था- अगर भगवान को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं तो वे भी हैरान रह जाएंगे। ऐसा आदेश नहीं देंगे जिसे लागू न किया जा सके सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पटाखों से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदेश देने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसे व्यावहारिक और लागू करने योग्य बनाया जा सकता है या नहीं। जस्टिस बागची ने पटाखे फोड़ने के धार्मिक आधार पर सवाल उठाया। जागरूकता और कम प्रदूषण वाले पटाखों पर जोर CJI ने कहा कि लोगों को समझदार बनाना होगा और जागरूक करना होगा। उन्हें बताना होगा कि कौन से पटाखे ज्यादा नुकसानदायक हैं। हमें लोगों को अपनी मूल संस्कृति की ओर लौटने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उस समय केवल फुलझड़ियां जलती थीं और दीपक जलाए जाते थे। वरिष्ट वकील पराजिता सिंह ने कहा कि सही तरीके से लागू किए बिना प्रतिबंध प्रभावी नहीं होंगे। पिछले साल ग्रीन पटाखों की अनुमति दी थी पिछले साल दिवाली से पहले दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 पार हो गया था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन में ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति दी थी। यह छूट परंपराओं और पर्यावरण व स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की शर्तों के साथ दी गई थी। कोर्ट ने साफ किया था कि ग्रीन पटाखे दिवाली से पहले और दिवाली के दिन ही तय समय के दौरान चलाए जा सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कहा था कि अगर दिल्ली-NCR के शहरों को साफ हवा का हक है तो दूसरे शहरों के लोगों को क्यों नहीं? हाई लेवल से ऊपर AQI खतरा AQI एक तरह का थर्मामीटर है। बस ये तापमान की जगह प्रदूषण मापने का काम करता है। इस पैमाने के जरिए हवा में मौजूद CO (कार्बन डाइऑक्साइड ), OZONE, (ओजोन) NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड), PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) और PM 10 पोल्यूटेंट्स की मात्रा चेक की जाती है और उसे शून्य से लेकर 500 तक रीडिंग में दर्शाया जाता है। हवा में पॉल्यूटेंट्स की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, AQI का स्तर उतना ज्यादा होगा। और जितना ज्यादा AQI, उतनी खतरनाक हवा। वैसे तो 200 से 300 के बीच AQI भी खराब माना जाता है, लेकिन अभी हालात ये हैं कि राजस्थान, हरियाणा दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ये 300 के ऊपर जा चुका है। ये बढ़ता AQI सिर्फ एक नंबर नहीं है। ये आने वाली बीमारियों के खतरे का संकेत भी है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं:लेकिन 24 घंटे आतिशबाजी की परमिशन भी नहीं, सरकार समय तय करे सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पटाखों पर बैन हटाने की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कहा- पूरे देश में पटाखों पर बैन लगाना मुमकिन नहीं है। पूरी पाबंदी से लोगों की भावनाएं आहत होंगी। पूरी खबर पढ़ें…
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