पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी की सरकार बर्खास्त:इमरजेंसी लगी; पूर्व पीएम की रिहाई के लिए राज्य के CM मार्च निकाल रहे थे
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रविवार को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लगा दी और सरकार बर्खास्त कर दी। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इसकी घोषणा की। यहां इमरान खान की पार्टी PTI की सरकार है। खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी पूर्व पीएम की रिहाई की मांग को लेकर समर्थकों के साथ इस्लामाबाद की ओर 4 अक्टूबर से मार्च निकाल रहे थे। अब उन्हें अपना पद छोड़ना होगा। शहबाज सरकार का आरोप है कि PTI सरकार प्रांत में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जानबूझकर सहयोग नहीं कर रही है। पाक सरकार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी। PTI बोली- फैसले से हिंसा और बढ़ सकती है इमरजेंसी लगाने का फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में प्रांत की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई। सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI ने इस कदम का विरोध किया है। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि प्रांत के अधिकार कमजोर करके शांति और स्थिरता नहीं लाई जा सकती। इमरान खान के करीबी सहयोगी और PTI प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने इस फैसले को ‘हास्यास्पद’ बताया। उन्होंने कहा कि खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तान की एकमात्र वैध रूप से चुनी गई सरकार है। बुखारी ने कहा कि इस फैसले से हिंसा, अस्थिरता और आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का रास्ता खुला था लेकिन सरकार के इस कदम से लगता है कि वह बातचीत करना ही नहीं चाहती थी। इससे पहले इमरान खान के समर्थकों के प्रदर्शन कई बार हिंसक हो चुके हैं। 2024 में हुए प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों की भी मौत हुई थी। इमरजेंसी और गवर्नर शासन का क्या मतलब है? पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत युद्ध, दूसरे देश के हमले या देश के अंदर बिगड़े ऐसे हालात में इमरजेंसी लगाई जा सकती है, जिन्हें प्रांतीय सरकार संभाल न पा रही हो। इमरजेंसी लगने पर केंद्र सरकार को प्रांत के मामलों में दखल देने और कुछ मुद्दों पर कानून बनाने के ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं। वहीं, अनुच्छेद 234 के तहत जब किसी प्रांत की सरकार संविधान के मुताबिक काम नहीं कर पाती, तो वहां गवर्नर शासन लगाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति के फैसले को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक से मंजूरी लेनी होती है। मंजूरी नहीं मिलने पर गवर्नर शासन दो महीने बाद खत्म हो जाता है। मंजूरी मिलने पर भी इसे एक बार में दो महीने के लिए ही बढ़ाया जा सकता है। यह व्यवस्था कुल छह महीने से ज्यादा नहीं चल सकती। पाकिस्तान सरकार ने इस फैसले में अनुच्छेद 233 का इस्तेमाल नहीं किया है। यह अनुच्छेद इमरजेंसी के दौरान नागरिकों के कुछ बुनियादी अधिकारों पर रोक लगाने से जुड़ा है। PTI और सरकार के बीच बातचीत नाकाम रही 73 वर्षीय पूर्व क्रिकेटर इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उन पर भ्रष्टाचार और हिंसा भड़काने से जुड़े आरोपों समेत 100 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। लॉन्ग मार्च PTI और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के दो दौर नाकाम होने के बाद शुरू हुआ था। बातचीत इस मुद्दे पर टूट गई कि प्रदर्शन खत्म करने से पहले इमरान खान से मिलने दिया जाए। PTI पहले इमरान से मुलाकात चाहती थी, जबकि सरकार की शर्त थी कि पार्टी पहले प्रदर्शन खत्म करे। केंद्र सरकार ने पहले ही चेतावनी दी थी कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी गई और मार्च के तय रास्तों पर शिपिंग कंटेनर लगाकर सड़कें बंद कर दी गईं। अब आपातकाल लगाकर PTI सरकार को ही बर्खास्त कर दिया गया है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में 4 प्रांतों के 15 हिस्से करने की तैयारी:पंजाब-सिंध में नवाज और भुट्टो परिवार कमजोर होंगे पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर देश के 4 प्रांतों को 12 से 15 हिस्सों में बांटकर सियासत का पूरा गणित बदलना चाहते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ट्रम्प बोले- यूक्रेन को नए राष्ट्रपति की जरूरत:पुतिन शांति चाहते हैं; जेलेंस्की ने अमेरिका-रूस के बीच डीजल डील का विरोध किया था
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि यूक्रेन को नया राष्ट्रपति चुनना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से दावा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए शांति समझौता करना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की बातचीत के मौके गंवा रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ट्रम्प ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका अब रूस से डीजल खरीदेगा। जेलेंस्की ने इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा था कि इससे रूस को युद्ध जारी रखने के लिए और पैसा मिलेगा। रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों से ट्रम्प नाराज ट्रम्प ने यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन हमलों से दुनिया में ईंधन की समस्या बढ़ सकती है। यूक्रेन रूस की तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। इससे रूस की तेल से होने वाली कमाई और उसकी सेना तक ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। तब से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। जेलेंस्की बोले- रूस चाहे तो आज ही हमले रुक सकते हैं जेलेंस्की ने रविवार को एक्स पर लिखा कि यूक्रेन रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए तैयार है, बशर्ते रूस यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले बंद करे। उन्होंने कहा कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले आज से ही रोके जा सकते हैं, लेकिन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ऐसा नहीं चाहते। जेलेंस्की के मुताबिक, तनाव कम करने के लिए दोनों देशों को एक-दूसरे के खिलाफ हमले रोकने होंगे और इसके लिए ठोस गारंटी भी जरूरी है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने भी ट्रम्प के बयान का विरोध किया। उन्होंने शनिवार देर रात एक्स पर लिखा कि जेलेंस्की को यूक्रेन के लोगों का समर्थन हासिल है और अपने नेता को चुनने का अधिकार भी उन्हीं के पास है। अमेरिका ने रूस से डीजल खरीदने पर पाबंदी हटाई ईरान-अमेरिका और इजराइल के युद्ध के कारण इस साल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसी बीच अमेरिका ने रूसी डीजल के निर्यात पर लगी पाबंदियां अगले साल अप्रैल तक हटा दीं है। इस फैसले से रूस के लिए अमेरिका और दूसरे देशों को डीजल बेचने का रास्ता खुल गया है। जेलेंस्की ने इस फैसले को कमजोर कदम बताया। उनका कहना है कि रूस को तेल और डीजल बेचने की छूट मिलने से उसकी कमाई बढ़ेगी और वह इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने में कर सकेगा। मियामी में युद्ध रोकने की बातचीत बेनतीजा रही अमेरिका और यूक्रेन के अधिकारियों के बीच 9 अक्टूबर को मियामी में युद्ध रोकने को लेकर करीब 6 घंटे बातचीत हुई थी। लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। बैठक में ट्रम्प के दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी शामिल थे। जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन की टीम बातचीत के लिए गई थी, लेकिन इसके बाद रूस को राहत देने वाला फैसला कर लिया गया। यूक्रेन का मानना है कि रूस पर दबाव बनाए बिना युद्ध खत्म करना मुश्किल है। रूस को मनाने के लिए अमेरिका ने आर्थिक प्रस्ताव रखे थे सितंबर के आखिर में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अमेरिका ने रूस से युद्ध रोकने का समझौता कराने के लिए कुछ प्रस्तावों पर चर्चा की थी। इसके बदले रूस को आर्थिक राहत देने के विकल्प रखे गए थे। इनका मकसद ऊर्जा से जुड़ी जगहों और समुद्र में हमले रुकवाना था। प्रस्तावों में पश्चिमी देशों में जब्त रूस की सरकारी संपत्ति का कुछ हिस्सा लौटाना, रूसी कंपनी लुकोइल की कुछ संपत्तियां मध्य-पूर्व के निवेशकों को बेचने की इजाजत देना और बेलारूस को पोटाश (खाद बनाने में इस्तेमाल होता है) बेचने की छूट देना शामिल था। यूक्रेन इन प्रस्तावों के पूरी तरह खिलाफ नहीं था। लेकिन उसने कहा कि अगर रूस युद्ध रोकने का समझौता तोड़ता है, तो उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। यूक्रेन ने यह सुझाव भी दिया कि रूस की जब्त संपत्ति से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल यूक्रेन की मदद के लिए किया जाए। रूस-यूक्रेन ने एक-दूसरे पर हमले तेज किए यूक्रेन ने रविवार को रूस के व्लादिमीर शहर में ड्रोन हमला किया, जिससे टेक कंपनी यांडेक्स का डेटा सेंटर बंद हो गया। चार दिन में कंपनी के ठिकानों पर यह तीसरा हमला था। इससे रूस के कई शहरों के अलावा कजाखस्तान, बेलारूस और आर्मेनिया में टैक्सी बुकिंग और बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुईं। वहीं, यूक्रेन के जापोरिज्जिया शहर में रूसी हमले में 23 लोगों की मौत हो गई, जिनमें चार बच्चे शामिल हैं। 30 से ज्यादा लोग घायल हुए। दूसरी ओर, रूस के ब्रियांस्क इलाके में यूक्रेनी ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई और दो महिलाएं घायल हो गईं। -------------------- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी चुनाव से पहले डीजल महंगा, ट्रम्प रूस से खरीदेंगे:इसी वजह से भारत पर 100% टैरिफ की धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूसी डीजल खरीदने पर लगी रोक 7 अप्रैल 2027 तक हटा दी है। अब अमेरिका रूस से डीजल खरीद सकेगा। रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था। इसके बाद अमेरिका ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिए थे। पूरी खबर पढ़ें…
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