सोने की बढ़ती कीमतों के बीच छोटे निवेश का बढ़ा ट्रेंड, पेटीएम गोल्ड बन रहा लोगों की पसंद
Gold Investment: सोने की कीमतें फिलहाल करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई हैं. हालांकि, रिकॉर्ड स्तर से कुछ नीचे आने के बावजूद कीमतों में हर हफ्ते उतार-चढ़ाव जारी है. ऐसे में लोग एक साथ बड़ी रकम लगाकर सोना खरीदने के बजाय पेटीएम गोल्ड जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए थोड़ा-थोड़ा सोना खरीदना पसंद कर रहे हैं. इससे कम पैसे में भी नियमित निवेश करना आसान हो गया है और निवेशकों का जोखिम भी कम रहता है.
घरेलू बाजार में आज 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1.43 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है. यह ऐसे समय में है जब पिछले कुछ समय से सोने की कीमतें सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर रही हैं. यह कीमत 29 जनवरी 2026 को बने करीब 1.78 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 20 प्रतिशत कम है. उस समय सुरक्षित निवेश की मांग अपने चरम पर थी.
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मिडिल ईस्ट तनाव पर निर्भर
सोने की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों, डॉलर की मजबूती और पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति पर निर्भर रहा है. पिछले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था और अब बाजार की नजर उसके अगले फैसले पर टिकी है.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का क्या है कहना?
अधिकांश प्रमुख विश्लेषकों ने सोने के लिए अपने लक्ष्य में कुछ कटौती की है, लेकिन मध्यम अवधि में वे अब भी सोने को लेकर सकारात्मक हैं. इसकी वजह केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक अनिश्चितता है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और निवेशकों की मांग के चलते सोने को समर्थन मिलता रहेगा, हालांकि बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती कीमतों में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकती है.
जो परिवार धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए ऊंची कीमतों और लगातार उतार-चढ़ाव के बीच सही समय चुनना मुश्किल हो जाता है. एक साथ बड़ी रकम लगाने पर ऊंचे स्तर पर खरीदारी का जोखिम रहता है, जबकि इंतजार करने पर कीमतें और बढ़ सकती हैं. ऐसे में थोड़ा-थोड़ा और नियमित निवेश करने की रणनीति अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी का अवसर देती है और अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है.
कैसे होती है खरीद
पेटीएम गोल्ड के जरिए ग्राहक लाइव बाजार भाव पर 24 कैरेट डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं. इसमें निवेश की शुरुआत केवल 51 रुपए से की जा सकती है.साथ ही, जो निवेशक नियमित निवेश करना चाहते हैं उनके लिए डेली गोल्ड एसआईपी की सुविधा भी उपलब्ध है. यह डिजिटल गोल्ड एमएमटीसी-पीएएमपी के साथ साझेदारी में उपलब्ध कराया जाता है और इसके बराबर का भौतिक सोना बीमाकृत, बैंक-ग्रेड वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाता है.
होम डिलीवरी भी उपलब्ध
निवेशक अपनी होल्डिंग्स को मौजूदा बाजार भाव पर बेच सकते हैं या उन्हें 24 कैरेट प्रमाणित भौतिक सोने में बदलकर मंगवा सकते हैं. इसकी होम डिलीवरी देशभर के 12,000 से अधिक पिन कोड पर उपलब्ध है. पेटीएम ने अपनी हालिया तिमाही आय रिपोर्ट में पेटीएम गोल्ड सहित वेल्थ प्रोडक्ट्स से बेहतर कमाई का भी उल्लेख किया है.
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हालांकि, यह रणनीति बाजार जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं करती. सोने की कीमतें बढ़ने के साथ-साथ गिर भी सकती हैं. इसलिए सोने को पूरे निवेश पोर्टफोलियो के बजाय एक विविधीकृत निवेश योजना का हिस्सा माना जाता है. लेकिन इस साल की दूसरी छमाही में भी कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना को देखते हुए कई छोटे निवेशकों का ध्यान अब सही समय तलाशने के बजाय नियमित और छोटी रकम से लगातार निवेश करने पर केंद्रित हो गया है.
(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
भारत के रिटेल सेक्टर में जबरदस्त उछाल, 4 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची लीजिंग
India Retail Sector: भारत के रिटेल सेक्टर में तेजी बनी हुई है. साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) में देश के सात बड़े शहरों में दुकानों और कमर्शियल स्पेस की लीजिंग 10.5% बढ़कर 62.7 लाख वर्ग फुट पहुंच गई है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, यह पिछले चार साल में किसी भी छमाही का सबसे बड़ा लीजिंग रिकॉर्ड है, जो रिटेल बाजार में बढ़ती मांग और निवेशकों के भरोसे को दिखाता है.
कमर्शियल रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म जेएलएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग को प्रभावित करने वाले कई बाहरी कारकों के बावजूद भारतीय रिटेल बाजार ने मजबूत वृद्धि का रुझान दिखाया है. जनवरी से जून 2026 के बीच रिटेल स्पेस की मांग स्थिर बनी रही और आपूर्ति की कमी के बावजूद खुदरा विक्रेताओं के विस्तार के चलते पहली तिमाही में कुल लीजिंग 30.9 लाख वर्ग फुट रही. वहीं, दूसरी तिमाही में लीजिंग की रफ्तार और मजबूत हुई. यह क्रमिक रूप से 2.7 प्रतिशत बढ़कर 31.8 लाख वर्ग फुट हो गई। इस विस्तार में मुख्य रूप से घरेलू ब्रांडों का योगदान रहा, जिनकी कुल लीजिंग में 79.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रही.
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ये हैं टॉप 7 शहर
भारत के शीर्ष सात शहरों में मुंबई (29 प्रतिशत) और दिल्ली एनसीआर (24 प्रतिशत) की 2026 की पहली छमाही के कुल लीजिंग वॉल्यूम में 53 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। बेंगलुरु (23 प्रतिशत) को मिलाकर इन तीनों प्रमुख बाजारों ने रिटेल स्पेस की कुल मांग का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभाला. हालांकि, 2026 की दूसरी तिमाही में नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति सीमित रही, लेकिन दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद के बाहरी इलाकों में नए रिटेल स्पेस की उपलब्धता ने अपने भौतिक स्टोर नेटवर्क का विस्तार करने वाले रिटेलर्स को नए अवसर प्रदान किए.
नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति
2026 की पहली छमाही में नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति 8.2 लाख वर्ग फुट रही, जो 2025 की पहली छमाही में दर्ज की गई मजबूत आपूर्ति की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 64 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है. पिछले छह से नौ महीनों से, प्रमुख रिटेल ब्रांड शॉपिंग मॉल में गुणवत्तापूर्ण स्थान की कमी के कारण विस्तार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसने उन्हें स्टोर विस्तार के लिए वैकल्पिक प्रारूपों का मूल्यांकन करने पर मजबूर किया है.
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क्यों आया उछाल?
उपभोक्ताओं की अनुभव-आधारित खुदरा प्राथमिकताओं के कारण संगठित रिटेल स्पेस की मांग मजबूत हुई है. इसके साथ ही कुल लीजिंग में मॉल की हिस्सेदारी 2025 की पहली छमाही के 38.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 की पहली छमाही में 43.1 प्रतिशत हो गई है.
(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)
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