कागज से बनाती हैं डॉल, कार्टून और सनफ्लावर ईयररिंग्स, इंस्टाग्राम से देशभर में बेचती हैं अपना हुनर
झारखंड के बोकारो सेक्टर-4 की 19 वर्षीय नेहा बरनवाल ने कोरोना काल में 13 साल की उम्र में YouTube से क्विलिंग आर्ट बनाना सीखा और अपने शौक को धीरे-धीरे कारोबार में बदल दिया. रंग-बिरंगे कागज की पतली पट्टियों से वह भगवान गणेश, भगवान जगन्नाथ, कार्टून कैरेक्टर और कई तरह की आकर्षक कलाकृतियां तैयार करती हैं. नेहा के बनाए हैंडीक्राफ्ट की कीमत करीब 300 से 1,000 रुपये तक है और उनके मुताबिक हर महीने करीब 100 ऑर्डर मिलते हैं. वह पहले Amazon के जरिए भी अपने प्रोडक्ट बेच चुकी हैं और एक साल में करीब 2 लाख रुपये का कारोबार किया था. अब वह Instagram के जरिए देशभर में ऑर्डर ले रही हैं और पढ़ाई के साथ अपने इस काम को आगे बढ़ाकर भविष्य में बिजनेस वूमेन बनने का लक्ष्य रखती हैं.
Radheshyam Pipalwa: सीकर के राधेश्याम पीपलवा ने जीता 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
Radheshyam Pipalwa National Film Award: सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी निवासी राधेश्याम पीपलवा ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ कोंकणी फिल्म 'मोग आसुम' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है. गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान दिया. वे राजस्थान के एकमात्र ऐसे फिल्मकार हैं जिन्होंने अब तक पांच राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं. उनकी यह ऐतिहासिक सफलता छोटे कस्बों के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है. जल्द ही वे राजस्थानी संस्कृति पर आधारित एक नई फिल्म भी दर्शकों के लिए लेकर आ रहे हैं.
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