Supreme Court ने हत्या की सजा घटाने पर जताई नाराजगी, HC के आदेश पर भेजा नोटिस
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले पर नाखुशी जाहिर की, जिसके तहत हत्या के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को रद्द करते हुए उसे गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया तथा उसकी उम्रकैद की सजा घटाकर 10 साल की कैद में तब्दील कर दी गई। शीर्ष अदालत ने मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “जरा उच्च न्यायालय की दयनीय स्थिति तो देखिए।” न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्य सरकार और आरोपी चिंतामणि उर्फ चिंटू पटेल को नोटिस जारी कर पूछा कि उच्च न्यायालय के आदेश को क्यों न रद्द कर दिया जाए और हत्या के मामले में पटेल को दोषी ठहराने वाले निचली अदालत के फैसले को बहाल किया जाए। पीठ ने कहा, “जरा उच्च न्यायालय की दयनीय स्थिति तो देखिए।
न्यायाधीशों को यह तक नहीं पता कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 304 के भाग एक और दो में क्या प्रावधान हैं। और आप उम्मीद करते हैं कि वे सबूतों का सही विश्लेषण करेंगे।” आईपीसी की धारा 304 का भाग ऐसी गैर-इरादतन हत्या से संबंधित है, जिसमें मौत का कारण बनने या ऐसी चोट पहुंचाने का इरादा होता है, जिससे जान जाने की आशंका हो। वहीं, भाग दो उन मामलों से संबंधित है, जिनमें आरोपी को इस बात का ज्ञान होता है कि उसके कृत्य से मौत होने की आशंका है, लेकिन उसका जान लेने का कोई इरादा नहीं होता।
चिंतामणि के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई सबूत नहीं था और उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में गलती की थी। न्यायमूर्ति पारदीवाला ने वकील से कहा, “यह इस तरह का पहला फैसला नहीं है, जो हमारे सामने आया है। ये सभी कानून के वे सिद्धांत हैं, जिन्हें विधि महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र के पहले वर्ष में ही पढ़ाया जाता है।” पीठ ने आदेश दिया, “याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया जाए और उससे कारण बताने को कहा जाए कि उच्च न्यायालय के आदेश को क्यों न रद्द कर दिया जाए और उसे हत्या का दोषी ठहराने वाले निचली अदालत के फैसले को क्यों न बहाल किया जाए।
हम मामले के तथ्यों और गुण-दोष को ध्यान में रखते हुए इस पहलू पर फिर से विचार करेंगे।” शीर्ष अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय ने घातक चोटों की प्रकृति और मृतक को ये चोटें किस तरह लगीं, इस बात पर विचार नहीं किया। उसने कहा कि उच्च न्यायालय अपराध की परिस्थितियों की ठीक से जांच करने में विफल रहा। पीठ ने कहा, “उच्च न्यायालय ने हमेशा की तरह बेहद लापरवाही से और कानून की समझ के बिना अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 से बदलकर धारा 304 के भाग दो के तहत कर दिया।
ऐसा प्रतीत होता है कि उच्च न्यायालय ने चोटों की प्रकृति, इस्तेमाल किए गए हथियारों और घटना के मूल कारण पर ध्यान नहीं दिया।” यह मामला फरवरी 2021 में एक महिला की मौत से जुड़ा है। आरोप है कि चिंतामणि ने नशे की हालत में महिला को धक्का दे दिया था, जिससे वह ईंटों पर गिर गई थी और उसकी मौत हो गई थी। मृतका की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में किसी कठोर और कुंद वस्तु से जोरदार प्रहार के कारण सिर पर लगी गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव को मौत की वजह बताया गया था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी महिला के बेटे को तलाशते हुए उसके घर पहुंचा था, जिसके बाद वह खून से लथपथ हालत में पड़ी मिली थी। पुलिस के अनुसार, मौत से पहले महिला ने अपने पति को बताया था कि आरोपी ने उसके साथ मारपीट की थी। निचली अदालत ने गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद सितंबर 2022 में चिंतामणि को हत्या का दोषी ठहराते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
उच्च न्यायालय ने आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते समय मामले पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने का फैसला किया और यह निष्कर्ष निकाला कि यह हत्या का मामला नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या का मामला है। उच्च न्यायालय ने नवंबर 2024 के अपने आदेश में कहा था कि यह स्पष्ट रूप से साबित हो गया है कि घटना के समय याचिकाकर्ता (चिंतामणि) नशे में था। उसने कहा था कि अभियोजन पक्ष न तो हत्या का कोई मकसद साबित कर पाया और न ही यह साबित हुआ कि याचिकाकर्ता ने मृतका रायमोती पटेल की हत्या की पूर्व साजिश की थी।
London में Prince William ने Sourav Ganguly और Ajinkya Rahane संग खेला Cricket
लंदन की मशहूर सड़क द मॉल पर मंगलवार को नजारा कुछ अलग देखने को मिला। आमतौर पर शाही जुलूस और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाली इस सड़क पर ब्रिटेन के प्रिंस विलियम ने क्रिकेट का मैदान सजा दिया। इस अनौपचारिक मुकाबले में कई मौजूदा और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर शामिल हुए। खास बात यह रही कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और हाल ही में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने वाले अजिंक्य रहाणे भी इस आयोजन का हिस्सा बने।
बकिंघम पैलेस की बैकड्राप में हुए इस खेल में वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर ब्रायन लारा, इंग्लैंड के जो रूट और हैरी ब्रूक भी मौजूद रहे। यह आयोजन ब्रिटिश शाही परिवार से जुड़े एक सम्मान समारोह से पहले किया गया था। इसमें खिलाड़ियों ने टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला और खेल के मैदान से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं।
प्रिंस विलियम ने भी हाथ में बल्ला थामा और सौरव गांगुली की गेंदों का सामना किया। शर्ट और स्वेटर पहने प्रिंस ने कुछ शॉट लगाए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। जब गांगुली से प्रिंस विलियम की बल्लेबाजी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने ठीक-ठाक बल्लेबाजी की।
गौरतलब है कि द मॉल लंदन के बीचोंबीच स्थित एक प्रमुख सड़क है, जो बकिंघम पैलेस की ओर जाती है। यहां आमतौर पर शाही समारोह, परेड और राष्ट्रीय उत्सव आयोजित होते हैं। ऐसे स्थान पर क्रिकेट का आयोजन अपने आप में खास रहा, क्योंकि इसने खेल को शाही परंपराओं से जुड़े एक अलग माहौल में पेश किया।
अजिंक्य रहाणे ने बुधवार को लिंक्डइन पर अपनी इस मुलाकात का अनुभव साझा किया। उन्होंने लिखा कि दुनिया के कई शानदार मैदानों पर क्रिकेट खेलने का मौका मिला है, लेकिन बकिंघम पैलेस के सामने द मॉल पर टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलना लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव रहेगा।
रहाणे ने प्रिंस विलियम के साथ समय बिताने और सौरव गांगुली, ब्रायन लारा, जो रूट, हैरी ब्रूक तथा दूसरे खिलाड़ियों से मिलने को भी खास बताया। उनके मुताबिक, इस दौरान क्रिकेट की उस ताकत पर चर्चा हुई, जो अलग-अलग देशों और लोगों को एक साथ जोड़ती है। खिलाड़ियों ने इंग्लैंड और भारत में खेलने के अपने अनुभवों के साथ खेल के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी पर भी बात की।
बता दें कि क्रिकेट केवल मैदान पर जीत और हार तक सीमित नहीं है। यह अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों और प्रशंसकों को जोड़ने का माध्यम भी है। भारत, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के दिग्गजों का एक साथ आना इसी भावना को दिखाता है। प्रिंस विलियम की इस पहल ने क्रिकेट को शाही समारोह से पहले एक अनौपचारिक और दोस्ताना रंग दिया है, जिसे खिलाड़ी लंबे समय तक याद रखने वाले हैं।
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