गुजरात: पाटन में Congress कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर बवाल, पुलिस आश्वासन के बाद धरना खत्म
कांग्रेस ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर स्याही फेंकने के आरोप में दो महिला कार्यकर्ताओं को जेल भेजे जाने के खिलाफ बुधवार को हुआ विरोध प्रदर्शन पुलिस की ओर से आश्वासन मिलने के बाद खत्म कर दिया। यौन उत्पीड़न के आरोपों में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर पद से बर्खास्त किए जा चुके कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम के खिलाफ सोमवार को यहां कांग्रेस कार्यालय के बाहर भाजपा महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान हंगामा हुआ था। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उन पर स्याही फेंकी।
इसके बाद कांग्रेस की दो महिला कार्यकर्ताओं भूमिबेन और जयाबेन को गिरफ्तार कर लिया गया। बनासकांठा से कांग्रेस सांसद गनीबेन ठाकोर ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता अपने साथ स्याही लेकर आई थीं और उन्होंने उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला करने की योजना बनाई थी। ठाकोर ने दावा किया कि भाजपा के रमेश सिंधव के दबाव में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 117(सी) के तहत झूठी प्राथमिकी दर्ज की।
सांसद ने सवाल उठाया कि पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि स्याही कौन लाया था, ऐसे में केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों की जा रही है। कांग्रेस विधायक किरीट पटेल ने दावा किया कि पुलिस ने कोई शुरुआती जांच किए बिना ही भूमिबेन और जयाबेन के खिलाफ बीएनएस की धारा 117(सी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की। ठाकोर, पटेल, चाणस्मा के विधायक दिनेश ठाकोर, पूर्व विधायक चंदनजी ठाकोर, पूर्व सांसद जगदीश ठाकोर और अन्य नेताओं के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुधवार को विरोध मार्च निकाला।
यह मार्च बी डिवीजन पुलिस थाने तक निकाला गया। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक प्रशांत सुम्बे से मुलाकात की। इसके बाद विधायक पटेल ने दावा किया कि पुलिस अधीक्षक ने उनकी मांगें स्वीकार कर लीं, जिसके बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया।
बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर Supreme Court के फैसले को असदुद्दीन ओवैसी ने दी चुनौती
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर 27 मई के उस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है जिसमें बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने संबंधी निर्वाचन आयोग के अधिकार को बरकरार रखा गया था। उच्चतम न्यायालय ने 27 मई को निर्वाचन आयोग के मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने के अधिकार को बरकरार रखते हुए कहा था कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक दायित्व में ‘‘जान फूंकती है।’’ प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा था कि एसआईआर प्रक्रिया ‘‘स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाती है।’’ ओवैसी ने फैसले पर पुनर्विचार किये जाने का अनुरोध करते हुए मंगलवार को वकील जफीर अहमद के माध्यम से दायर अपनी याचिका में कहा, ‘‘अदालत 27 मई, 2026 को सुनाए गए फैसले और अंतिम आदेश को वापस ले तथा इससे जुड़े अन्य मामलों पर भी पुनर्विचार करे।’’ इसमें कहा गया है कि यह पुनर्विचार याचिका बाद में सामने आई ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियों के कारण दायर की गई है, जिनसे निर्वाचन आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा होता है। याचिका में कहा गया है, ‘‘इन तथ्यों से उन वैधानिक सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन को लेकर भी गंभीर सवाल उठते हैं, जिनके आधार पर इस माननीय न्यायालय ने एसआईआर को बरकरार रखा था।” ओवैसी ने निर्वाचन आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से संबंधित नयी और महत्वपूर्ण जानकारियों का हवाला दिया है।
याचिका में कहा गया है कि इन खुलासों से सवाल उठता है कि क्या मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े वैधानिक सुरक्षा उपायों को पर्याप्त रूप से लागू किया गया था। ओवैसी, जो मूल रिट याचिका की सुनवाई में पक्षकार नहीं थे, ने पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए अदालत से अनुमति मांगी है। उन्होंने इसके लिए मतदाता, निर्वाचित जनप्रतिनिधि और एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रमुख के रूप में अपनी स्थिति का हवाला दिया है।
उनकी पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष ने ही मूल याचिका दायर की थी।
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