IDBI Bank रणनीतिक बिक्री से 8 साल बाद विनिवेश लक्ष्य पार करेगी सरकार
सरकार को चालू वित्त वर्ष में विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण से तय बजट लक्ष्य से अधिक राशि जुटने की उम्मीद है। वर्ष 2018-19 के बाद आठ साल में ऐसा पहली बार होगा। इसमें आईडीबीआई बैंक की 52,878 करोड़ रुपये की रणनीतिक बिक्री की अहम भूमिका होगी।
सरकार ने पूरे वित्त वर्ष के लिए विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण से 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार अबतक नौ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री, इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की रणनीतिक बिक्री और स्पेसिफाइड अंडरटेकिंग ऑफ द यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (एसयूयूटीआई) से प्राप्त राशि के जरिये 55,757 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। इसमें भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और कोल इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी की बिक्री भी शामिल है।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को फेयरफैक्स की अनुषंगी कंपनी मेसर्स 10955230 कनाडा इंक को आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री के लिए खरीदार के रूप में मंजूरी दी। इसके तहत सरकार की 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,620 करोड़ रुपये में और सार्वजनिक क्षेत्र की एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 26,440 करोड़ रुपये में बेची जाएगी। रणनीतिक बिक्री से मिलने वाली राशि लेनदेन पूरा होने के बाद सरकारी खजाने में आएगी।
इसके वित्त वर्ष 2026-27 के अंत से पहले पूरा होने की संभावना है। चालू वित्त वर्ष में अबतक विनिवेश से जुटाई गई राशि और आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री से मिलने वाली रकम को मिलाकर कुल प्राप्तियां 82,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाती हैं। वित्त वर्ष 2023-24 के संशोधित अनुमान से विनिवेश के लिए अलग लक्ष्य तय करने की व्यवस्था बंद कर दी गई है।
हालांकि, विनिवेश और परिसंपत्ति मौद्रीकरण सहित विविध पूंजीगत प्राप्तियों के तहत वित्त वर्ष 2023-24 के संशोधित अनुमान में 30,000 करोड़ रुपये, 2024-25 में 33,000 करोड़ रुपये, 2025-26 में 33,837 करोड़ रुपये और 2026-27 के बजट अनुमान में 80,000 करोड़ रुपये रखे गए थे। वित्त वर्ष 2021-22 और 2022-23 में सरकार ने संबंधित बजट में तय 78,000 करोड़ रुपये और 50,000 करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्यों के मुकाबले क्रमशः 13,534 करोड़ रुपये और 35,294 करोड़ रुपये जुटाए थे। वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 में 65,000 करोड़ रुपये और 32,000 करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्यों के मुकाबले वास्तविक प्राप्तियां क्रमशः 50,300 करोड़ रुपये और 32,886 करोड़ रुपये रही थीं।
वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश से 84,972 करोड़ रुपये जुटाए थे, जबकि उस वर्ष का बजट लक्ष्य 80,000 करोड़ रुपये था।
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