जम्मू, चार अगस्त कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए 57 दिवसीय वार्षिक यात्रा के तहत 964 श्रद्धालुओं का एक नया जत्था मंगलवार तड़के जम्मू के आधार शिविर से रवाना हुआ। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष अब तक रवाना हुआ यह सबसे छोटा जत्था है। अधिकारियों ने बताया कि फिसलन भरी सड़क और मलबा हटाने के अभियान के कारण कई घंटे तक बंद रहने के बाद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल कर दिया गया, जिससे यात्रा सुचारू रूप से जारी है।
उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं का यह जत्था मंगलवार तड़के करीब तीन बजे भगवती नगर आधार शिविर से 39 वाहनों में बालटाल मार्ग के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे के रवाना होने के साथ ही इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू आधार शिविर से अब तक प्रस्थान करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या बढ़कर 1,41,712 हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार को 1,056 श्रद्धालु यात्रा के लिए रवाना हुए थे, जबकि रविवार को 3,886 श्रद्धालुओं का जत्था जम्मू से निकला था।
कुल 57 दिनों तक चलने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा 28 अगस्त को संपन्न होगी।
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मंगलवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कांग्रेस खेमे में चल रही उस खींचतान को कम करके आंका, जो दो विधायकों के कैबिनेट में जगह न मिलने पर इस्तीफ़ा देने की पेशकश के बाद शुरू हुई थी। सोमवार को कांग्रेस के 19 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, राज्य कैबिनेट के विस्तार में जगह न मिलने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने विधायक पद से इस्तीफ़ा दे दिया और बेलूर गोपालकृष्ण ने भी इस्तीफ़ा देने की पेशकश की।
पत्रकारों से बात करते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि इस्तीफ़ा देना राजनीति का हिस्सा है। दोनों कांग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि कैबिनेट में जगह पाने के लिए उन्होंने और जी. परमेश्वर ने धैर्य बनाए रखा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस्तीफ़ा देना राजनीति का हिस्सा है। जो इस्तीफ़ा देना चाहते हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता। अगर वे पार्टी और अपना राजनीतिक भविष्य चाहते हैं, तो उन्हें बने रहना चाहिए। अगर पार्टी है, तो बाकी सब कुछ है। जब धर्म सिंह और सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान मुझे मंत्री पद नहीं मिला था, तब मैं भी इस्तीफ़ा दे सकता था। क्या मैंने और जी. परमेश्वर ने धैर्य नहीं बनाए रखा था? मैंने सभी मंत्रियों को यह भी निर्देश दिया है कि वे तुरंत अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा करें और सूखे से राहत की स्थिति का जायज़ा लें।
इससे पहले सोमवार को शिवकुमार ने उन कांग्रेस नेताओं को भरोसा दिलाया जिन्हें कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था कि उन्हें "सही ज़िम्मेदारियाँ" दी जाएँगी। उन्होंने नाराज़ नेताओं से सब्र रखने को कहा। शपथ ग्रहण समारोह के बाद मीडिया से बात करते हुए शिवकुमार ने माना कि कुछ नेता कैबिनेट में शामिल न किए जाने से नाराज़ हैं और कहा कि पार्टी उनसे बात करेगी और उनकी चिंताओं का समाधान करेगी।
उन्होंने कहा कि हर किसी की अपनी उम्मीदें होती हैं, लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि सभी को सही ज़िम्मेदारियाँ दी जाएँगी और पूरा सम्मान दिया जाएगा। मैं उन सभी लोगों से गुज़ारिश करता हूँ जो नाराज़ हैं कि वे इंतज़ार करें और सब्र रखें। हाँ, कुछ लोग नाराज़ हैं और हम उनसे बात करेंगे। चिंता करने की कोई बात नहीं है। हम अपने सभी नेताओं से बात करेंगे और उनकी चिंताओं का समाधान करेंगे।
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